{"_id":"66c5d25421fe7c1adc0e41ac","slug":"couple-got-divorced-within-five-years-in-mainpuri-settlement-done-for-2-5-lakh-2024-08-21","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"UP News: पांच साल भी न चला सात जन्मों का बंधन, कोर्ट से अलग हुए जीवनभर साथ निभाने का वादा करने वाले","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
UP News: पांच साल भी न चला सात जन्मों का बंधन, कोर्ट से अलग हुए जीवनभर साथ निभाने का वादा करने वाले
Wed, 21 Aug 2024 07:08 PM IST
भूपेन्द्र सिंह
संवाद न्यूज एजेंसी, मैनपुरी
संवाद न्यूज एजेंसी, मैनपुरी
Published by: भूपेन्द्र सिंह
Updated Wed, 21 Aug 2024 07:08 PM IST
सार
मैनपुरी में सात जन्मों का बंधन पांच साल भी न चला। जीवनभर साथ निभाने का वादा करने वाले कोर्ट से अलग हुए। 2.5 लाख रुपये एकमुश्त देने पर समझौता हुआ।
विज्ञापन
शादी(सांकेतिक)
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
उत्तर प्रदेश के मैनपुरी में विवाद के चलते एक दंपती की शादी पांच साल भी नहीं चली। उनके बीच विवाह विच्छेद हो गया। सुलह समझौता केंद्र में समझौता नहीं होने पर दंपती ने अलग अलग रहने पर सहमति जताई। पति द्वारा एकमुश्त 2.50 लाख रुपये देने की बात पर दोनों ने अलग रहने की बात केंद्र में लिखकर दे दी।
विज्ञापन
थाना कुरावली के जुन्हैसा निवासी स्नेहलता की शादी दिनेश कुमार निवासी नगला धनी एटा के साथ पांच साल पहले हुई। शादी के बाद दंपती के बीच विवाद होने पर स्नेहलता ससुराल से मायके आ गई। उसने अपने पति के खिलाफ दहेज की मांग पूरी नहीं होने पर मारपीट करके घर से निकाल देने की रिपोर्ट थाना कुरावली में दर्ज कराई।
विज्ञापन
Trending Videos
पुलिस ने जांच करके मुकदमे की सुनवाई के लिए दिनेश के खिलाफ चार्जशीट कोर्ट में भेज दी। मुकदमे की सुनवाई अपर सिविल जज के न्यायालय में हुई। दिनेश ने जमानत पाने के लिए न्यायालय में आवेदन किया। अपर सिविल जज ने दिनेश को जमानत तो दे दी लेकिन दंपती के बीच समझौता कराने के लिए मुकदमे को सुलह समझौता केंद्र में भेज दिया।
विज्ञापन
मीडिएटर संजय चौहान के सामने दोनों ने अपना पक्ष तो रखा लेकिन साथ रहने के लिए राजी नहीं हुए। दोनों ने विवाह विच्छेद करने की बात रखी। उनके बीच एकमुश्त 2.50 लाख रुपया देने पर विवाह विच्छेद की सहमति बनी। दिनेश अपनी पत्नी स्नेहलता को दो बार में 2.50 लाख रुपया देगा। इसके बाद मुकदमा समाप्त कराने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।