{"_id":"58f8b6314f1c1bf258470f62","slug":"bhajan-ka-star-jhaankiyon-ne-giraaya-manoj-sharma","type":"story","status":"publish","title_hn":"भजन का स्तर झांकियों ने गिराया: मनोज शर्मा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
भजन का स्तर झांकियों ने गिराया: मनोज शर्मा
अमर उजाला ब्यूरो, मैनपुरी
Updated Thu, 20 Apr 2017 06:52 PM IST
विज्ञापन
बातचीत
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
भजन का स्तर लगातार गिरने के लिए झांकियां ही दोषी हैं। झांकियों में तीसरी प्रजाति के लोग भजनों का भाव ही बदल रहे हैं। आज भी लोगों में भजन के प्रति क्रेज है मगर लोकप्रियता हासिल करने के लिए मंचीय गायक फूहड़ता का सहारा ले रहे हैं। यह बातें भजन गायक मनोज शर्मा ने कहीं।
मुंबई निवासी भजन गायक मनोज शर्मा ने गुरुवार को गोपाल नगर में किशन दुबे के आवास पर अमर उजाला से कहा उनको योगीराज भगवान कृष्ण की आराधना से ही भजन गायन की प्रेरणा मिली। 31 दिसंबर 1999 को राजस्थान के झुनझुनू में पहली बार गाए भजन सुन राधिका दुलारी, मैं हूं आंधरो भिखारी ने उनको देश और विदेश में पहचान दी। उन्होंने कहा भजन तो भजन है। संगीतमय भजन सभी को पसंद हैं। रावण तथा भगवान राम दोनों को ही संगीत पसंद था। भजन गायक ने बताया बच्चों में अच्छे संस्कारों तथा सोच विचार में बदलाव के लिए भजन सुनना जरूरी है। विभिन्न स्तरों पर होने वाले कार्यक्रमों में होने वाली झांकियों में तीसरी प्रजाति के लोगों द्वारा गाए जाने वाले भजनों से उनका भाव ही बदलता जा रहा है। नशे की हालत में तो कोई भी गायन नहीं किया जाना चाहिए। पब्लिक प्रोग्राम में तो हर तरह के भजन पसंद किए जाते हैं। उन्होंने यूरोप, लंदन, ईरान, नेपाल में भजन गाए हैं मगर भारत जैसा भक्तिमय माहौल आज भी नहीं है। इस मौके पर किशन दुबे, आशीष पांडेय मौजूद थे।
विज्ञापन
मुंबई निवासी भजन गायक मनोज शर्मा ने गुरुवार को गोपाल नगर में किशन दुबे के आवास पर अमर उजाला से कहा उनको योगीराज भगवान कृष्ण की आराधना से ही भजन गायन की प्रेरणा मिली। 31 दिसंबर 1999 को राजस्थान के झुनझुनू में पहली बार गाए भजन सुन राधिका दुलारी, मैं हूं आंधरो भिखारी ने उनको देश और विदेश में पहचान दी। उन्होंने कहा भजन तो भजन है। संगीतमय भजन सभी को पसंद हैं। रावण तथा भगवान राम दोनों को ही संगीत पसंद था। भजन गायक ने बताया बच्चों में अच्छे संस्कारों तथा सोच विचार में बदलाव के लिए भजन सुनना जरूरी है। विभिन्न स्तरों पर होने वाले कार्यक्रमों में होने वाली झांकियों में तीसरी प्रजाति के लोगों द्वारा गाए जाने वाले भजनों से उनका भाव ही बदलता जा रहा है। नशे की हालत में तो कोई भी गायन नहीं किया जाना चाहिए। पब्लिक प्रोग्राम में तो हर तरह के भजन पसंद किए जाते हैं। उन्होंने यूरोप, लंदन, ईरान, नेपाल में भजन गाए हैं मगर भारत जैसा भक्तिमय माहौल आज भी नहीं है। इस मौके पर किशन दुबे, आशीष पांडेय मौजूद थे।
विज्ञापन