{"_id":"294c545074ac3dcd4e46140a227c9d2d","slug":"best-yoga-brought-vasant-panchami-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"श्रेष्ठ योग लेकर आई वसंत पंचमी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
श्रेष्ठ योग लेकर आई वसंत पंचमी
Thu, 09 Nov 2023 07:05 PM IST
Anonymous User
ब्यूरो अमर उजाला मैनपुरी
ब्यूरो अमर उजाला मैनपुरी
Published by: Anonymous User
Updated Thu, 09 Nov 2023 07:05 PM IST
विज्ञापन
वसंत पंचमी मां सरस्वती की आराधना का महापर्व शुक्रवार को है। यह ज्ञान, विवेक और यश प्रदान करने वाली देवी हैं। शुक्रवार को वसंत पंचमी अनेक शुभ योग लेकर आ रही है। इस दिन पड़ रहे योग समस्त श्रेष्ठ कार्य सफल बनाएंगे।
पंडित नंद किशोर मिश्र का कहना है कि शुक्रवार को सर्वार्थ सिद्धि व अमृत योग पड़ रहा है। ये दोनों ही योग शुभ कार्यों के लिए अतिश्रेष्ठ होते हैं। इनमें किया गया कार्य निर्विघ्न संपन्न होता है। वसंत पंचमी को देवी सरस्वती का पूजन कर शुभ कार्यों का श्रीगणेश करने से साधकों को सफलता मिलेगी। पौराणिक मान्यता के अनुसार, माघ मास में शुक्ल पक्ष की पंचमी को देवी सरस्वती का उद्भव हुआ था। अत: हर साल यह दिन उन्हीं की वंदना करते हुए उनके शुभ गुणों को समर्पित किया जाता है। वसंत पंचमी के दौरान मौसम भी बड़ा सुहावना होता है। न ज्यादा सर्दी होती है और न गर्मी तन और मन की प्रसन्नता के लिए यह मौसम बहुत ही श्रेष्ठ माना जाता है। इसी समय प्रकृति भी अपने विविध रंगों से श्रंगार करती है।
कब करें शुभ काम
पंडित ब्रह्मप्रकाश के अनुसार पंचमी तिथि यानि शुक्रवार की मध्य रात्रि दो बजकर 32 मिनट तक रहेगी। 13 फरवरी को तिथि का क्षय हो रहा है। अत: शुभ कार्य व अनुष्ठान आदि आज ही करने चाहिए। दूसरी ओर वसंत पंचमी के दिन सूर्योदय से प्रात: 9.16 बजे तक भद्रा, रहेगी। भद्रा में पूजन और शुभ कार्यों का निषेध किया जाता है। इसलिए मां सरस्वती का पूजन भद्रा समाप्ति के पश्चात ही करना चाहिए। पूजन के लिए श्रेष्ठ समय सुबह 9 बजकर तीस मिनट से प्रारंभ होकर संपूर्ण दिन रहेगा।
विज्ञापन
आज से ही बच्चों को दिया जाता अक्षर ज्ञान
वसंत पंचमी से कुछ और भी पंरपराएं भी जुड़ी हैं। इसी दिन होलिका का निर्माण शुरू होता है। फाल्गुन के गीत शुरू हो जाते हैं। यह दिन विद्या की देवी को समर्पित है। इसीलिए वसंत पंचमी से बच्चों को अक्षर ज्ञान भी दिया जाता है।
विज्ञापन
पंडित नंद किशोर मिश्र का कहना है कि शुक्रवार को सर्वार्थ सिद्धि व अमृत योग पड़ रहा है। ये दोनों ही योग शुभ कार्यों के लिए अतिश्रेष्ठ होते हैं। इनमें किया गया कार्य निर्विघ्न संपन्न होता है। वसंत पंचमी को देवी सरस्वती का पूजन कर शुभ कार्यों का श्रीगणेश करने से साधकों को सफलता मिलेगी। पौराणिक मान्यता के अनुसार, माघ मास में शुक्ल पक्ष की पंचमी को देवी सरस्वती का उद्भव हुआ था। अत: हर साल यह दिन उन्हीं की वंदना करते हुए उनके शुभ गुणों को समर्पित किया जाता है। वसंत पंचमी के दौरान मौसम भी बड़ा सुहावना होता है। न ज्यादा सर्दी होती है और न गर्मी तन और मन की प्रसन्नता के लिए यह मौसम बहुत ही श्रेष्ठ माना जाता है। इसी समय प्रकृति भी अपने विविध रंगों से श्रंगार करती है।
विज्ञापन
कब करें शुभ काम
पंडित ब्रह्मप्रकाश के अनुसार पंचमी तिथि यानि शुक्रवार की मध्य रात्रि दो बजकर 32 मिनट तक रहेगी। 13 फरवरी को तिथि का क्षय हो रहा है। अत: शुभ कार्य व अनुष्ठान आदि आज ही करने चाहिए। दूसरी ओर वसंत पंचमी के दिन सूर्योदय से प्रात: 9.16 बजे तक भद्रा, रहेगी। भद्रा में पूजन और शुभ कार्यों का निषेध किया जाता है। इसलिए मां सरस्वती का पूजन भद्रा समाप्ति के पश्चात ही करना चाहिए। पूजन के लिए श्रेष्ठ समय सुबह 9 बजकर तीस मिनट से प्रारंभ होकर संपूर्ण दिन रहेगा।
विज्ञापन
आज से ही बच्चों को दिया जाता अक्षर ज्ञान
वसंत पंचमी से कुछ और भी पंरपराएं भी जुड़ी हैं। इसी दिन होलिका का निर्माण शुरू होता है। फाल्गुन के गीत शुरू हो जाते हैं। यह दिन विद्या की देवी को समर्पित है। इसीलिए वसंत पंचमी से बच्चों को अक्षर ज्ञान भी दिया जाता है।