{"_id":"5873cd364f1c1bb037ba7d87","slug":"bandiyon-ko-dee-kaanoonee-adhikaaron-kee-jaanakaaree","type":"story","status":"publish","title_hn":"बंदियों को दी कानूनी अधिकारों की जानकारी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बंदियों को दी कानूनी अधिकारों की जानकारी
अमर उजाला ब्यूरो मैनपुरी
Updated Mon, 09 Jan 2017 11:35 PM IST
विज्ञापन
संबोधित करते न्यायिक अधिकारी
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जेल में बंद होने से इंसान के कानूनी अधिकार समाप्त नहीं हो जाते। मानवाधिकार का हनन कहीं भी नहीं हो सकता है। जेल में बंदी भी कानूनी जानकारी पाने के हकदार हैं। यह बातें अपर जिला जज प्रदीप कुमार ने विधिक साक्षरता शिविर में कहीं।
सोमवार को जिला कारागार में विधिक सेवा प्राधिकरण के तत्वावधान में लगाए गए विधिक साक्षरता शिविर में उन्होंने कहा जो बंदी अपने जुर्म का इकबाल करना चाहते हैं वह लोक अदालत में आवेदन कर सकते हैं। उनको पूरी मदद दी जाएगी। प्राधिकारण के सचिव सिविल जज जनार्दन प्रसाद यादव ने कहा जो बंदी आधी से अधिक सजा जेल में काट चुके हैं। वह जेल से रिहा हो सकते हैं। जिसके लिए उनको कानूनी औपचारिकताएं पूरी करनी होंगी। जो बंदी गरीब हैं और उनके पास मुकदमा लड़ने के लिए वकील नहीं हैं उनको विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा नि:शुल्क वकील उपलब्ध कराया जाता है।
सिविल जज हरीराम ने कहा जिन बंदियों की दो माह पूर्व जमानत हो चुकी है और उनके पास जमानतगीर नहीं होने के कारण वह जेल से रिहा नहीं हो पा रहे हैं वह भी कानूनी औपचारिकताएं पूरी करके जेल से रिहा किए जा सकते हैं। इस संबंध में उच्च न्यायालय के आदेश भी हैं। उन्होंने बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान के संबंध में भी बंदियों को जानकारी दी।
विज्ञापन
इस मौके पर जेल अधीक्षक वीके सिंह, जेलर सुरेश मिश्र, प्राधिकरण कार्यालय प्रभारी आराधना शर्मा आदि मौजूद थे।
विज्ञापन
सोमवार को जिला कारागार में विधिक सेवा प्राधिकरण के तत्वावधान में लगाए गए विधिक साक्षरता शिविर में उन्होंने कहा जो बंदी अपने जुर्म का इकबाल करना चाहते हैं वह लोक अदालत में आवेदन कर सकते हैं। उनको पूरी मदद दी जाएगी। प्राधिकारण के सचिव सिविल जज जनार्दन प्रसाद यादव ने कहा जो बंदी आधी से अधिक सजा जेल में काट चुके हैं। वह जेल से रिहा हो सकते हैं। जिसके लिए उनको कानूनी औपचारिकताएं पूरी करनी होंगी। जो बंदी गरीब हैं और उनके पास मुकदमा लड़ने के लिए वकील नहीं हैं उनको विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा नि:शुल्क वकील उपलब्ध कराया जाता है।
विज्ञापन
सिविल जज हरीराम ने कहा जिन बंदियों की दो माह पूर्व जमानत हो चुकी है और उनके पास जमानतगीर नहीं होने के कारण वह जेल से रिहा नहीं हो पा रहे हैं वह भी कानूनी औपचारिकताएं पूरी करके जेल से रिहा किए जा सकते हैं। इस संबंध में उच्च न्यायालय के आदेश भी हैं। उन्होंने बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान के संबंध में भी बंदियों को जानकारी दी।
विज्ञापन
इस मौके पर जेल अधीक्षक वीके सिंह, जेलर सुरेश मिश्र, प्राधिकरण कार्यालय प्रभारी आराधना शर्मा आदि मौजूद थे।