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मारने की धमकी देकर बच्चों से पूछा कहां रखा है सोना
अमर उजाला ब्यूरो मैनपुरी
Updated Fri, 01 Jul 2016 11:10 PM IST
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मारने की धमकी देकर बच्चों से पूछा कहां रखा है सोना
- फोटो : अमर उजाला
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गुरुवार रात हुई इस दिल दहला देने वाली वारदात के प्रत्यक्षदर्शी धीरेंद्र के दो मासूम बच्चे दीपक (11) और दिव्या (आठ) हैं, इनकी आंखों के सामने बदमाशों ने वारदात को अंजाम दिया। बदमाशों की दहशत अभी भी इनके चेहरों पर झलक रही है। बदमाश बार-बार इनसे पूछ रहे थे कि बताओ सोना कहा रखा है, नहीं तो तुम्हें भी मार देंगे।
परिवार और रिश्तेदारों के साथ यह भी बिलख रहे हैं, इनके सवालों पर परिवारीजन व रिश्तेदार इन्हें अपने गले से लगा लेते और दिलासा देकर बहलाने का प्रयास करते। धीरेंद्र की पत्नी और भाई अभी होश में नहीं है। दीपक और दिव्या ने पुलिस को बताया कि बदमाश अपने हाथों में डंडा और सरिया लिए हुए थे। बदमाश जब इनके चाचा सुखेंद्र को पीट रहे थे, तभी इनकी भी आंख खुल गई। ये रोने लगे तो बदमाशों ने कहा कि रोना बंद करों और हमें बताओ की सोना कहां रखा हुआ है, नहीं तो तुम्हें भी मार देंगे। बदमाशों की पिटाई के दौरान मची चीख पुकार से बस्ती में जगार हो गई और बदमाश माल समेटकर भाग निकले। जगार होने से बच्चों की जान बच गई।
धीरेंद्र के पिता हरिभान सिंह इंद्रजीत शिक्षा सदन विद्यालय जोत में चपरासी थे। दो पुत्र और तीन पुत्रियों की पढ़ाई लिखाई और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच वो हमेशा अपने बच्चों को होनहार बनाना चाहते थे। उन्हें गर्व था कि उनका बेटा देश की सेवा कर रहा है, लेकिन उसकी असमय मौत ने उन्हें तोड़कर रख दिया है।
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डीआईजी ने किया घटनास्थल का निरीक्षण
मैनपुरी। डीआईजी अजय मोहन शर्मा शुक्रवार दोपहर घटनास्थल पहुंचे। घटना के संबंध में एसपी देवरंजन वर्मा से जानकारी जुटाई। उन्होंने आसपास निर्माण कार्य में लगे मजदूरों और कार्य करा रहे ठेकेदारों के बारे में जानकारी जुटाने के लिए कहा। साथ ही हत्याकांड को अंजाम देने वालों की जल्द से जल्द गिरफ्तारी करने के निर्देश दिए।
साथी भी न रोक पाए आंसू
अलीगढ़ में तैनाती के समय मृतक धीरेंद्र के कई साथी थे। उसकी मौत की जानकारी होते ही संजीत, बलराम और समीर मैनपुरी आ गए। उन्हाेंने बताया कि मृतक सबसे मेलजोल रखने वाला था। कभी किसी से तकरार नहीं होती थी। खाली समय में वो साथियों को खूब हंसाता रहता था। धीरेंद्र की बातों को याद कर उनकी आंखों से भी आंसू बह निकले।
हर किसी की आंख छलक पड़ी
धीरेंद्र यादव की मौत के बाद दोपहर बाद शव का अंतिम संस्कार पैतृक गांव शिव सिंहपुर में किया गया। आर ए एफ के सहायक कमाडेंट दीपक कुमार गुप्ता के नेतृत्व में सशस्त्र टुकड़ी ने अंतिम सलामी दी। मृतक के पुत्र अंशुल ने पिता को मुखागिभन दी। हर किसी की आंख छलक पड़ी थी।
सीआरपीएफ जवान की हत्या में कच्छा बनियान गिरोह के सदस्यों के शामिल होने की बात सामने आई है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। हत्यारों की तलाश की जा रही है। जल्द ही जवान के हत्यारे पुलिस की गिरफ्त मे होंगे।
- देवरंजन वर्मा, एसपी
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परिवार और रिश्तेदारों के साथ यह भी बिलख रहे हैं, इनके सवालों पर परिवारीजन व रिश्तेदार इन्हें अपने गले से लगा लेते और दिलासा देकर बहलाने का प्रयास करते। धीरेंद्र की पत्नी और भाई अभी होश में नहीं है। दीपक और दिव्या ने पुलिस को बताया कि बदमाश अपने हाथों में डंडा और सरिया लिए हुए थे। बदमाश जब इनके चाचा सुखेंद्र को पीट रहे थे, तभी इनकी भी आंख खुल गई। ये रोने लगे तो बदमाशों ने कहा कि रोना बंद करों और हमें बताओ की सोना कहां रखा हुआ है, नहीं तो तुम्हें भी मार देंगे। बदमाशों की पिटाई के दौरान मची चीख पुकार से बस्ती में जगार हो गई और बदमाश माल समेटकर भाग निकले। जगार होने से बच्चों की जान बच गई।
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धीरेंद्र के पिता हरिभान सिंह इंद्रजीत शिक्षा सदन विद्यालय जोत में चपरासी थे। दो पुत्र और तीन पुत्रियों की पढ़ाई लिखाई और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच वो हमेशा अपने बच्चों को होनहार बनाना चाहते थे। उन्हें गर्व था कि उनका बेटा देश की सेवा कर रहा है, लेकिन उसकी असमय मौत ने उन्हें तोड़कर रख दिया है।
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डीआईजी ने किया घटनास्थल का निरीक्षण
मैनपुरी। डीआईजी अजय मोहन शर्मा शुक्रवार दोपहर घटनास्थल पहुंचे। घटना के संबंध में एसपी देवरंजन वर्मा से जानकारी जुटाई। उन्होंने आसपास निर्माण कार्य में लगे मजदूरों और कार्य करा रहे ठेकेदारों के बारे में जानकारी जुटाने के लिए कहा। साथ ही हत्याकांड को अंजाम देने वालों की जल्द से जल्द गिरफ्तारी करने के निर्देश दिए।
साथी भी न रोक पाए आंसू
अलीगढ़ में तैनाती के समय मृतक धीरेंद्र के कई साथी थे। उसकी मौत की जानकारी होते ही संजीत, बलराम और समीर मैनपुरी आ गए। उन्हाेंने बताया कि मृतक सबसे मेलजोल रखने वाला था। कभी किसी से तकरार नहीं होती थी। खाली समय में वो साथियों को खूब हंसाता रहता था। धीरेंद्र की बातों को याद कर उनकी आंखों से भी आंसू बह निकले।
हर किसी की आंख छलक पड़ी
धीरेंद्र यादव की मौत के बाद दोपहर बाद शव का अंतिम संस्कार पैतृक गांव शिव सिंहपुर में किया गया। आर ए एफ के सहायक कमाडेंट दीपक कुमार गुप्ता के नेतृत्व में सशस्त्र टुकड़ी ने अंतिम सलामी दी। मृतक के पुत्र अंशुल ने पिता को मुखागिभन दी। हर किसी की आंख छलक पड़ी थी।
सीआरपीएफ जवान की हत्या में कच्छा बनियान गिरोह के सदस्यों के शामिल होने की बात सामने आई है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। हत्यारों की तलाश की जा रही है। जल्द ही जवान के हत्यारे पुलिस की गिरफ्त मे होंगे।
- देवरंजन वर्मा, एसपी