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जर्जर भवनों के नीचे भविष्य और जीवन असुरक्षित
अमर उजाला ब्यूरो, मैनपुरी
Updated Wed, 03 Aug 2016 11:30 PM IST
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खतरे की जान
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
सरकार प्राइमरी शिक्षा पर लाखों रुपये खर्च कर रही है लेकिन इन स्कूलों का हाल जर्जर है। जर्जर भवन के नीचे बैठकर पढ़ रहे इन बच्चों का भविष्य तो क्या जीवन ही सुरक्षित नहीं हैं। जिले में 2200 परिषदीय स्कूल हैं अधिकांश का हाल बुरा ही है।
कहीं शिक्षकों की कमी के चलते कई स्कूल बंद चल रहे हैं तो जहां खुल रहे हैं उनके कई स्कूलों के भवन जर्जर हैं। शिक्षकों की शिकायत पर भी विभागीय अधिकारी नहीं सुनते हैं। वह इस बात से अनजान बने रहते हैं। इसके चलते शिक्षकों और अभिभावकों को अनहोनी का डर सताता रहता है।
केस: एक
पूर्व माध्यमिक विद्यालय मधुपुरी में 54 छात्र-छात्राएं हैं। अधिकारियों की माने तो इस स्कूल का भवन 1975 में बना था। इस समय काफी जर्जर हाल में है। इससे कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है। प्रधानाध्यापिका सरला चौहान का कहना है कि कई बार शिकायत के बाद भी कोई सुनवाई नहीं हुई।
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केस: दो
प्राथमिक विद्यालय चित्तरपुर में 64 विद्यार्थी हैं। यह स्कूल जर्जर हाल में है। साथ ही गांव में जलनिकासी न होने के चलते घरों का पानी स्कूल के प्रांगण में भरा रहता है। इससे यह स्कूल न लगकर तालाब जैसा नजर आता है। इसके चलते बच्चे जर्जन भवन में पढ़ने को मजबूर हैं।
केस: तीन
प्राथमि विद्यालय त्रिलोकपुर की प्रधानाध्यापिका मालती देवी ने बताया कि समय में 73 बच्चे पंजीकृत हैं। यहां बने भवन में कई जगह से दरारें आ गई हैं। कई बार आलाधिकारियों से शिकायत की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
केस: चार
प्राथमिक विद्यालय विक्रमपुर का भवन 20 साल पूर्व बना था। अब यह विद्यालय जर्जर हो चुका है। इस विद्यालय में 78 बच्चे पंजीकृत हैं। प्रधानाध्यापक विनोद कुमार का कहना है भवन जर्जर होने के चलते ज्यादातार बच्चों को खुले में बैठाकर पढ़ाते हैं।
जर्जर भवन की जानकारी हैं। इनकी मरम्मत के लिए और नवीन भवन बनवाने के लिए शासन को पत्र लिखा है। धनराशि यदि मिल जाएगी तो भवन की मरम्मत या नए बनवा दिए जाएंगे।
- भारती शाक्य, प्रभारी बीएसए
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कहीं शिक्षकों की कमी के चलते कई स्कूल बंद चल रहे हैं तो जहां खुल रहे हैं उनके कई स्कूलों के भवन जर्जर हैं। शिक्षकों की शिकायत पर भी विभागीय अधिकारी नहीं सुनते हैं। वह इस बात से अनजान बने रहते हैं। इसके चलते शिक्षकों और अभिभावकों को अनहोनी का डर सताता रहता है।
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केस: एक
पूर्व माध्यमिक विद्यालय मधुपुरी में 54 छात्र-छात्राएं हैं। अधिकारियों की माने तो इस स्कूल का भवन 1975 में बना था। इस समय काफी जर्जर हाल में है। इससे कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है। प्रधानाध्यापिका सरला चौहान का कहना है कि कई बार शिकायत के बाद भी कोई सुनवाई नहीं हुई।
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केस: दो
प्राथमिक विद्यालय चित्तरपुर में 64 विद्यार्थी हैं। यह स्कूल जर्जर हाल में है। साथ ही गांव में जलनिकासी न होने के चलते घरों का पानी स्कूल के प्रांगण में भरा रहता है। इससे यह स्कूल न लगकर तालाब जैसा नजर आता है। इसके चलते बच्चे जर्जन भवन में पढ़ने को मजबूर हैं।
केस: तीन
प्राथमि विद्यालय त्रिलोकपुर की प्रधानाध्यापिका मालती देवी ने बताया कि समय में 73 बच्चे पंजीकृत हैं। यहां बने भवन में कई जगह से दरारें आ गई हैं। कई बार आलाधिकारियों से शिकायत की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
केस: चार
प्राथमिक विद्यालय विक्रमपुर का भवन 20 साल पूर्व बना था। अब यह विद्यालय जर्जर हो चुका है। इस विद्यालय में 78 बच्चे पंजीकृत हैं। प्रधानाध्यापक विनोद कुमार का कहना है भवन जर्जर होने के चलते ज्यादातार बच्चों को खुले में बैठाकर पढ़ाते हैं।
जर्जर भवन की जानकारी हैं। इनकी मरम्मत के लिए और नवीन भवन बनवाने के लिए शासन को पत्र लिखा है। धनराशि यदि मिल जाएगी तो भवन की मरम्मत या नए बनवा दिए जाएंगे।
- भारती शाक्य, प्रभारी बीएसए