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जिले में पशुओं के उपचार का संकट
Mainpuri
Updated Sat, 05 Jan 2013 05:30 AM IST
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मैनपुरी। सर्दी के मौसम में ग्रामीण क्षेत्रों में पशुओं में बीमारियां बढ़ने लगी हैं। पशुओं को कोल्ड स्ट्रोक, जुकाम, बुखार आदि रोग होने पर पशु पालक उनका इलाज झोलाछापों से कराने को मजबूर हैं। जिले में अगर पशु चिकित्सा विभाग की स्थिति पर नजर डालें तो जिले में 29 पशु सेवा केंद्रों पर पशुधन प्रसार अधिकारी ही तैनात नहीं हैं। 12 अस्पतालों में डाक्टरों की तैनाती ही नहीं हुई है। ऐसे में पशुओं को भी उपचार का संकट है।
जनपद में पशुओं के बेहतर इलाज के लिए 41 पशु सेवाकेंद्र और 33 राजकीय पशु चिकित्सालय हैं। जिले में भी उदासीनता के चलते चिकित्सकों और पशुधन प्रसार अधिकारी (एलईओ) की मांग के सापेक्ष तैनाती नहीं की गई है। 41 पशु सेवाकेंद्रों में से 12 पर ही पशुधन प्रसार अधिकारियों की तैनाती है। 29 पशु सेवाकेंद्र खाली हैं। ऐसे में यहां पशु पालकों को कोई सुविधा नहीं मिल पा रही है। राजकीय पशु चिकित्सालयों की स्थिति भी कोई खास अच्छी नहीं है। 33 अस्पतालों में 21 में ही डाक्टरों की तैनाती है। 12 चिकित्सालय रिक्त हैं। ऐसे में यहां भी पशुओं को इलाज नहीं मिलता। मजबूरन पशु पालक झोलाछापों से ही इलाज कराते हैं।
सर्दी में फैलने वाले रोग
सर्दी के मौसम में जुकाम, बुखार, कोल्ड स्ट्रोक, निमोनिया, मुंह-नाक से पानी बहना आदि बीमारियां फैलती हैं। कोल्ड स्ट्रोक में समय से इलाज न मिलने पर पशु की अचानक गिरकर मौत हो जाती है। हालांकि जिले में अभी तक इस रोग से मौत की जानकारी नहीं मिली है।
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पशुओं को पर्याप्त मात्रा में पिलाएं पानी
सीवीओ डा. द्विवेदी का कहना है कि पशु पालक जानकारी के अभाव के चलते सर्दी में पशुओं को पानी नहीं पिलाते। सर्दी में पशुओं को ताजा पानी पर्याप्त मात्रा में पिलाना चाहिए। चारा खिलाएं और पशुओं को ऐसे कमरे में बांधे जहां हवा और ओस से बचाव हो। पशुओं के नीचे बाजरा का भूसा डालें। बीमार होने पर कुशल डाक्टर से परामर्श लें।
जिले में तैनात सभी पशु चिकित्साधिकारियों तथा पशुधन प्रसार अधिकारियों को नियमित ड्यूटी कर क्षेत्रों में बीमारी की जानकारी पर पहुंचकर इलाज के निर्देश दिए गए हैं। मौजूदा संसाधनों से काम चलाया जा रहा है। रिक्तियों की सूचना शासन और उच्चाधिकारियों को भेजी गई है।
डा. एसके द्विवेदी
सीवीओ।
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जनपद में पशुओं के बेहतर इलाज के लिए 41 पशु सेवाकेंद्र और 33 राजकीय पशु चिकित्सालय हैं। जिले में भी उदासीनता के चलते चिकित्सकों और पशुधन प्रसार अधिकारी (एलईओ) की मांग के सापेक्ष तैनाती नहीं की गई है। 41 पशु सेवाकेंद्रों में से 12 पर ही पशुधन प्रसार अधिकारियों की तैनाती है। 29 पशु सेवाकेंद्र खाली हैं। ऐसे में यहां पशु पालकों को कोई सुविधा नहीं मिल पा रही है। राजकीय पशु चिकित्सालयों की स्थिति भी कोई खास अच्छी नहीं है। 33 अस्पतालों में 21 में ही डाक्टरों की तैनाती है। 12 चिकित्सालय रिक्त हैं। ऐसे में यहां भी पशुओं को इलाज नहीं मिलता। मजबूरन पशु पालक झोलाछापों से ही इलाज कराते हैं।
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सर्दी में फैलने वाले रोग
सर्दी के मौसम में जुकाम, बुखार, कोल्ड स्ट्रोक, निमोनिया, मुंह-नाक से पानी बहना आदि बीमारियां फैलती हैं। कोल्ड स्ट्रोक में समय से इलाज न मिलने पर पशु की अचानक गिरकर मौत हो जाती है। हालांकि जिले में अभी तक इस रोग से मौत की जानकारी नहीं मिली है।
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पशुओं को पर्याप्त मात्रा में पिलाएं पानी
सीवीओ डा. द्विवेदी का कहना है कि पशु पालक जानकारी के अभाव के चलते सर्दी में पशुओं को पानी नहीं पिलाते। सर्दी में पशुओं को ताजा पानी पर्याप्त मात्रा में पिलाना चाहिए। चारा खिलाएं और पशुओं को ऐसे कमरे में बांधे जहां हवा और ओस से बचाव हो। पशुओं के नीचे बाजरा का भूसा डालें। बीमार होने पर कुशल डाक्टर से परामर्श लें।
जिले में तैनात सभी पशु चिकित्साधिकारियों तथा पशुधन प्रसार अधिकारियों को नियमित ड्यूटी कर क्षेत्रों में बीमारी की जानकारी पर पहुंचकर इलाज के निर्देश दिए गए हैं। मौजूदा संसाधनों से काम चलाया जा रहा है। रिक्तियों की सूचना शासन और उच्चाधिकारियों को भेजी गई है।
डा. एसके द्विवेदी
सीवीओ।