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26 साल बाद मिला इंसाफ तो बोले धन्यवाद अमर उजाला
अमर उजाला ब्यूरो मैनपुरी
Updated Fri, 20 Jan 2017 11:57 PM IST
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परिवार के साथ एसएस चौहान
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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देश की सीमा पर दुश्मन के दांत खट्टे करने वाले फौजी को देश के अंदर ही 26 साल बाद इंसाफ मिला तो उसके मुंह से सिर्फ यही निकला धन्यवाद अमर उजाला। अमर उजाला पिछले 24 सालों से इस जांबाज फौजी की आवाज बुलंद करता रहा है। हर मोड़ पर आवश्यकता पड़ने पर इनका पक्ष सरकार से लेकर आम जनता तक पहुंचाया है। शहर के शत्रुघ्न सिंह चौहान को गुरुवार को सशस्त्र सैन्य अभिकरण ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए निर्दोष साबित किया तो परिवार में खुशी का माहौल नजर आया। शुक्रवार को एसएस चौहान लखनऊ से लौटकर अपने गांव असरगढ़ी गए और मंदिर में पूजा की।
एसएस चौहान ने बताया सेना और देश की सरकारों ने कभी उनके साथ गलत नहीं किया। सिर्फ सेना के कुछ अधिकारियों जैसे तत्कालीन लेफ्टिनेंट जनरल मोहम्मद अहमद जकी और कर्नल आरएस पंवार ने ही सोने के बिस्कुट हड़पने और निजी हितों के चलते उनके खिलाफ झूठी कार्रवाई शुरू कर्राई। जब तत्कालीन जांच अधिकारी कमांडिंग आफिसर कर्नल केएस दलाल और कोर्ट के जज मनजीत सिंह ने मामले की जांच की तो उनकी एक न सुनी गई और उन्हें सुनवाई से ही हटा दिया गया। यही नहीं बिना सबूतों और गवाह के आधार पर रिपोर्ट दर्ज कर उनके खिलाफ कोर्ट मार्शल तक की कार्रवाई की गई।
उन्होंने कहा कि इस निर्णय के बाद उन्हें विश्वास हो गया है कि धरती पर भगवान है। नहीं तो सेना से इतने लंबे समय तक केस लड़ने के बाद वह जीतने की आस ही छोड़ चुके थे। अभिकरण ने सेना को निर्देश दिए वो एसएस चौहान को सेना में ज्वाइनिंग के साथ ही 1991 से सभी लाभ और वेतन भी उपलब्ध कराएं। वहीं एसएस चौहान का कहना है कि इतनी लंबी लड़ाई के बाद अब सेना ज्वाइन करने का मन नहीं हैं। हालांकि परिवार चाहता है कि वो ज्वाइन कर लें। एसएस चौहान ने कहा इतनी लंबी लड़ाई लड़ने में पत्नी और बच्चों ने साथ दिया। उन्होंने कहा कि 30 करोड़ रुपये उन्हें मुआवजा के रूप में मिलेगा।
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इतने लंबे समय तक लड़ाई लड़ने के बाद मिली जीत से काफी खुश हूं। यह जीत उन लोगों के लिए जवाब है जो झूठे आरोप लगने पर समाज में हंसी उड़ाते थे। इस जीत से उनका मुंह बंद हो जाएगा।
गीता चौहान, पत्नी
आरोपी अधिकारियों पर रिपोर्ट दर्ज करने के आदेश
एसएस चौहान ने बताया कि निर्णय सुनाने वाले अधिकारियों ने सेना के तत्कालीन आरोपी अधिकारियों के खिलाफ श्रीनगर के बटमालू थाना में रिपोर्ट दर्ज कराने और उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। हालांकि उक्त मामले के सभी आरोपी अधिकारी सेना से रिटायर हो चुके हैं।
यह है मामला
शहर में आगरा रोड स्थित कोठी सदर ए आला निवासी शत्रुघ्न सिंह चौहान ने अप्रैल 1990 में सेना में ज्वाइनिंग की थी। उन्होंने 6 राजपूताना राइफल्स में ज्वाइनिंग की थी। 11 अप्रैल 1990 को श्रीनगर में सर्च के दौरान 147 सोने के बिस्कुट मिले थे। इसके बाद उन पर तमाम आरोप लगे। इसके एक साल बाद उन्हें 1991 में ही सेना के अधिकारियों ने श्रीनगर में उनके पेट में गोली मार दी थी, जिससे वह घायल हो गए थे। साथ ही कोर्ट मार्शल कर सेना से बर्खास्त कर दिया था। वो तभी से सेना के तत्कालीन अधिकारियों के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे थे। 26 साल बाद उनके कोर्ट मार्शल और बर्खास्तगी को सशस्त्र सैन्य अभिकरण ने अवैध ठहरा दिया है।
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एसएस चौहान ने बताया सेना और देश की सरकारों ने कभी उनके साथ गलत नहीं किया। सिर्फ सेना के कुछ अधिकारियों जैसे तत्कालीन लेफ्टिनेंट जनरल मोहम्मद अहमद जकी और कर्नल आरएस पंवार ने ही सोने के बिस्कुट हड़पने और निजी हितों के चलते उनके खिलाफ झूठी कार्रवाई शुरू कर्राई। जब तत्कालीन जांच अधिकारी कमांडिंग आफिसर कर्नल केएस दलाल और कोर्ट के जज मनजीत सिंह ने मामले की जांच की तो उनकी एक न सुनी गई और उन्हें सुनवाई से ही हटा दिया गया। यही नहीं बिना सबूतों और गवाह के आधार पर रिपोर्ट दर्ज कर उनके खिलाफ कोर्ट मार्शल तक की कार्रवाई की गई।
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उन्होंने कहा कि इस निर्णय के बाद उन्हें विश्वास हो गया है कि धरती पर भगवान है। नहीं तो सेना से इतने लंबे समय तक केस लड़ने के बाद वह जीतने की आस ही छोड़ चुके थे। अभिकरण ने सेना को निर्देश दिए वो एसएस चौहान को सेना में ज्वाइनिंग के साथ ही 1991 से सभी लाभ और वेतन भी उपलब्ध कराएं। वहीं एसएस चौहान का कहना है कि इतनी लंबी लड़ाई के बाद अब सेना ज्वाइन करने का मन नहीं हैं। हालांकि परिवार चाहता है कि वो ज्वाइन कर लें। एसएस चौहान ने कहा इतनी लंबी लड़ाई लड़ने में पत्नी और बच्चों ने साथ दिया। उन्होंने कहा कि 30 करोड़ रुपये उन्हें मुआवजा के रूप में मिलेगा।
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इतने लंबे समय तक लड़ाई लड़ने के बाद मिली जीत से काफी खुश हूं। यह जीत उन लोगों के लिए जवाब है जो झूठे आरोप लगने पर समाज में हंसी उड़ाते थे। इस जीत से उनका मुंह बंद हो जाएगा।
गीता चौहान, पत्नी
आरोपी अधिकारियों पर रिपोर्ट दर्ज करने के आदेश
एसएस चौहान ने बताया कि निर्णय सुनाने वाले अधिकारियों ने सेना के तत्कालीन आरोपी अधिकारियों के खिलाफ श्रीनगर के बटमालू थाना में रिपोर्ट दर्ज कराने और उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। हालांकि उक्त मामले के सभी आरोपी अधिकारी सेना से रिटायर हो चुके हैं।
यह है मामला
शहर में आगरा रोड स्थित कोठी सदर ए आला निवासी शत्रुघ्न सिंह चौहान ने अप्रैल 1990 में सेना में ज्वाइनिंग की थी। उन्होंने 6 राजपूताना राइफल्स में ज्वाइनिंग की थी। 11 अप्रैल 1990 को श्रीनगर में सर्च के दौरान 147 सोने के बिस्कुट मिले थे। इसके बाद उन पर तमाम आरोप लगे। इसके एक साल बाद उन्हें 1991 में ही सेना के अधिकारियों ने श्रीनगर में उनके पेट में गोली मार दी थी, जिससे वह घायल हो गए थे। साथ ही कोर्ट मार्शल कर सेना से बर्खास्त कर दिया था। वो तभी से सेना के तत्कालीन अधिकारियों के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे थे। 26 साल बाद उनके कोर्ट मार्शल और बर्खास्तगी को सशस्त्र सैन्य अभिकरण ने अवैध ठहरा दिया है।