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एक बार चार्जिंग पर 20 किलोमीटर दौड़ेगी ई-साइकिल
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ई-साइकिल चलाता छात्र।
- फोटो : MAHOBA
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चरखारी (महोबा)। आईटीआई में मोटर मैकेनिक ट्रेड के दो छात्रों ने ई-साइकिल बनाई है। यह एक बार चार्जिंग पर 20 किमी दौड़ेगी। इस साइकिल पर 15 हजार रुपये का खर्च आया है।
चरखारी के राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान में मोटर मैकेनिक से प्रशिक्षण ले रहे प्रथम वर्ष के अक्ठौंहा गांव निवासी हरिचरन ने संस्थान के ही दो पूर्व संस्थान के छात्र रहे इंद्र कुमार के सहयोग से ई-साइकिल तैयार की है। इस साइकिल में उन्होंने 24 वोल्ट की 8 एचपी बैटरी का इस्तेमाल किया है। साइकिल को एक बार चार्ज करने पर 20 किलोमीटर तक दौड़ेगी। छात्रों ने एक माह में इस प्रोजेक्ट को पूरा किया है।
हरिचरन व इंद्र कुमार अपने गांव से आठ किमी दूर संस्थान तक साइकिल से ही पहुंचते थे। वह कई बार लेट हो जाते और थक भी जाते थे। इसी दौरान उन्हें ई-साइकिल का आइडिया आया। उन्होंने मोटर मैकेनिक के प्रशिक्षक विवेक कुमार और विनय से हरिचरन और इन्द्र कुशवाहा ने अपनी समस्या बताई तो उन्हें भी लगा कि तकनीकी रूप से इन बच्चों का सहयोग करना चाहिए। इस तरह ई-साइकिल बन गई।
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छात्रों के प्रयोग से प्रशिक्षक और छात्र उत्साहित हैं। छात्रों का मानना है कि यदि लैड बैटरी की जगह लिथियम बैटरी का उपयोग किया जाए तो इस साइकिल की क्षमता चार्ज होने के बाद 40 से 50 किलोमीटर हो जाएगी। मोटर मैकेनिक ट्रेड के प्रशिक्षक विवेक कुमार ने बताया कि शुरू से ही यह छात्र प्रतिभावान रहा है और कुछ अलग करने की ठानी और उनका संकल्प पूरा हुआ।
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चरखारी के राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान में मोटर मैकेनिक से प्रशिक्षण ले रहे प्रथम वर्ष के अक्ठौंहा गांव निवासी हरिचरन ने संस्थान के ही दो पूर्व संस्थान के छात्र रहे इंद्र कुमार के सहयोग से ई-साइकिल तैयार की है। इस साइकिल में उन्होंने 24 वोल्ट की 8 एचपी बैटरी का इस्तेमाल किया है। साइकिल को एक बार चार्ज करने पर 20 किलोमीटर तक दौड़ेगी। छात्रों ने एक माह में इस प्रोजेक्ट को पूरा किया है।
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हरिचरन व इंद्र कुमार अपने गांव से आठ किमी दूर संस्थान तक साइकिल से ही पहुंचते थे। वह कई बार लेट हो जाते और थक भी जाते थे। इसी दौरान उन्हें ई-साइकिल का आइडिया आया। उन्होंने मोटर मैकेनिक के प्रशिक्षक विवेक कुमार और विनय से हरिचरन और इन्द्र कुशवाहा ने अपनी समस्या बताई तो उन्हें भी लगा कि तकनीकी रूप से इन बच्चों का सहयोग करना चाहिए। इस तरह ई-साइकिल बन गई।
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छात्रों के प्रयोग से प्रशिक्षक और छात्र उत्साहित हैं। छात्रों का मानना है कि यदि लैड बैटरी की जगह लिथियम बैटरी का उपयोग किया जाए तो इस साइकिल की क्षमता चार्ज होने के बाद 40 से 50 किलोमीटर हो जाएगी। मोटर मैकेनिक ट्रेड के प्रशिक्षक विवेक कुमार ने बताया कि शुरू से ही यह छात्र प्रतिभावान रहा है और कुछ अलग करने की ठानी और उनका संकल्प पूरा हुआ।