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Mahoba News: कक्षा छह से आठ के बच्चों का सुधरेगा लर्निंग गैप
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-कमजोर बच्चों के लिए अपनाई जाएगी कैचअप शिक्षण प्रक्रिया
संवाद न्यूज एजेंसी
महोबा। परिषदीय विद्यालयों में एक तरफ जहां कक्षा एक से पांच तक के बच्चों के लिए निपुण भारत मिशन को प्रभावी बनाया जा रहा है। वहीं अब कक्षा छह से आठ के बच्चों के लिए लर्निंग इंहैसमेंट प्रोग्राम (एलईपी) लागू होगा। इससे बच्चों का लर्निंग गैप कम करने की पहल की जाएगी।
स्कूल शिक्षा महानिदेशक मोनिका रानी ने बीएसए को निर्देश जारी किए हैं। जिले में 848 परिषदीय विद्यालय संचालित हैं। इनमें करीब 80 हजार छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। प्रोग्राम के तहत कमजोर बच्चों के लिए कैचअप शिक्षण प्रक्रिया अपनाई जाएगी। इसका उद्देश्य बच्चों के लिए अधिगम स्तर का आकलन कर कमियों की पहचान करना और विषयवार दक्षता हासिल करना है। तालिका और निपुण एप से दक्षता आधारित आकलन किया जाएगा। बेहतर प्रदर्शन करने वाले बच्चों को सम्मानित व प्रोत्साहित भी किया जाएगा।
विभाग के अनुसार पढ़ाई में कुछ बच्चे अपेक्षाकृत पीछे रह जाते हैं। समय से अतिरिक्त ध्यान देकर उनका अधिगम स्तर सुधारा जा सकता है। समय-समय पर मूल्यांकन कर उन्हें कैचअप शिक्षण से बेहतर किया जा सकता है। बच्चों को प्रोजेक्ट, मॉडल और अलग-अलग किट के माध्यम से सिखाया व समझाया जाएगा।
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संवाद न्यूज एजेंसी
महोबा। परिषदीय विद्यालयों में एक तरफ जहां कक्षा एक से पांच तक के बच्चों के लिए निपुण भारत मिशन को प्रभावी बनाया जा रहा है। वहीं अब कक्षा छह से आठ के बच्चों के लिए लर्निंग इंहैसमेंट प्रोग्राम (एलईपी) लागू होगा। इससे बच्चों का लर्निंग गैप कम करने की पहल की जाएगी।
स्कूल शिक्षा महानिदेशक मोनिका रानी ने बीएसए को निर्देश जारी किए हैं। जिले में 848 परिषदीय विद्यालय संचालित हैं। इनमें करीब 80 हजार छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। प्रोग्राम के तहत कमजोर बच्चों के लिए कैचअप शिक्षण प्रक्रिया अपनाई जाएगी। इसका उद्देश्य बच्चों के लिए अधिगम स्तर का आकलन कर कमियों की पहचान करना और विषयवार दक्षता हासिल करना है। तालिका और निपुण एप से दक्षता आधारित आकलन किया जाएगा। बेहतर प्रदर्शन करने वाले बच्चों को सम्मानित व प्रोत्साहित भी किया जाएगा।
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विभाग के अनुसार पढ़ाई में कुछ बच्चे अपेक्षाकृत पीछे रह जाते हैं। समय से अतिरिक्त ध्यान देकर उनका अधिगम स्तर सुधारा जा सकता है। समय-समय पर मूल्यांकन कर उन्हें कैचअप शिक्षण से बेहतर किया जा सकता है। बच्चों को प्रोजेक्ट, मॉडल और अलग-अलग किट के माध्यम से सिखाया व समझाया जाएगा।
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