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ग्राम पंचायतों का गलत इतिहास पढ़ा रहा पंचायतीराज विभाग
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महोबा। पंचायती राज विभाग परिचयात्मक प्रशिक्षण में वितरित पुस्तक के जरिए प्रदेश के 58,189 नवनिर्वाचित ग्राम प्रधानों को पंचायतों के गठन का गलत इतिहास पढ़ा रहा है। पुस्तक के पेज 14 और 15 पर पंचायत गठन के वर्ष अलग-अलग लिखकर मतभेद की स्थिति बन गई है। पुस्तक में त्रिस्तरीय पंचायत के गठन की तारीख को भी देश की पहली पंचायत गठन की तारीख बता दी गई है।
पंचायतीराज विभाग द्वारा प्रशिक्षण में प्रधानों को वितरित करने के लिए संदर्भ साहित्य पुस्तिका सहायक विकास अधिकारियों के पास भेजी गई है। इस पुस्तक के पेज नंबर 15 के दूसरे पैराग्राफ में लिखा है कि वर्ष 1958 में राष्ट्रीय विकास परिषद ने बलवंत राय मेहता समिति की सिफारिशें स्वीकार कीं तथा 02 अक्तूबर 1959 को नागौर (राजस्थान) जिले में तत्कालीन प्रधानमंत्री पं. जवाहरलाल नेहरू द्वारा देश की पहली ग्राम पंचायत का उद्घाटन किया गया है, जबकि वास्तविकता यह है कि देश में गांव पंचायतों का गठन तो 15 अगस्त 1949 को हो चुका था। पंडित जवाहर लाल नेहरू ने तो 02 अक्तूबर 1959 को पहली त्रिस्तरीय पंचायत (जिला पंचायत, क्षेत्र पंचायत और गांव पंचायत) का नागौर जिले में उद्घाटन किया था। हालांकि इसी पुस्तक के पेज नंबर 14 पर दूसरे पैराग्राफ की दूसरी लाइन में उत्तर प्रदेश में ग्राम पंचायतों की स्थापना 15 अगस्त 1949 से लिखी गई है। इस तिथि से ही उत्तर प्रदेश में लगभग 35 हजार ग्राम पंचायतें अस्तित्व में आईं थीं। ऐसे में आमने-सामने के पेज पर गांव पंचायतों के गठन की अलग-अलग तिथि प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे प्रधानों को भ्रमित कर रहे हैं।
इंटरनेट पर पंचायतीराज विभाग की वेबसाइट और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारियों के लिए आने वाली पुस्तकों के मुताबिक वर्ष 1957 में गठित बलवंत राय मेहता समिति ने वर्ष 1958 में भारत में त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था के गठन की सिफारिश की थी। इसके बाद ग्राम पंचायत (ग्राम स्तर पर), पंचायत समिति (मध्यवर्ती स्तर पर) और जिला परिषद (जिला स्तर पर) शामिल हैं। इस पुस्तक में नागौर जिले में गठित जिस पंचायत को देश की पहली पंचायत बताया गया है, वह असल में देश की पहली त्रिस्तरीय पंचायत है।
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कोट्स....
पंचायतों में ग्राम प्रधानों को प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। पुस्तकों को विभाग द्वारा ही छपवाकर भेजा गया है। पंचायतों के गठन को लेकर गलत इतिहास पढ़ाए जाने की जानकारी नहीं हैं। पुस्तक में दिए गए तथ्य पढ़कर ही बता पाएंगे।
डॉ. हरिचरन सिंह, मुख्य विकास अधिकारी
क्या बोले इतिहासकार
ग्राम पंचायतों में प्रधानों को बांटी गई पुस्तिका में 1959 को नागौर जिले में तत्कालीन प्रधानमंत्री पं. जवाहरलाल नेहरू द्वारा देश की पहली पंचायत का उद्घाटन किया जाना लिखा गया है, जबकि यहां पर त्रिस्तरीय पंचायत होना चाहिए था। शब्दों के गलत होने से भ्रम फैल रहा है।
डॉ. एलसी अनुरागी, इतिहासकार
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पंचायतीराज विभाग द्वारा प्रशिक्षण में प्रधानों को वितरित करने के लिए संदर्भ साहित्य पुस्तिका सहायक विकास अधिकारियों के पास भेजी गई है। इस पुस्तक के पेज नंबर 15 के दूसरे पैराग्राफ में लिखा है कि वर्ष 1958 में राष्ट्रीय विकास परिषद ने बलवंत राय मेहता समिति की सिफारिशें स्वीकार कीं तथा 02 अक्तूबर 1959 को नागौर (राजस्थान) जिले में तत्कालीन प्रधानमंत्री पं. जवाहरलाल नेहरू द्वारा देश की पहली ग्राम पंचायत का उद्घाटन किया गया है, जबकि वास्तविकता यह है कि देश में गांव पंचायतों का गठन तो 15 अगस्त 1949 को हो चुका था। पंडित जवाहर लाल नेहरू ने तो 02 अक्तूबर 1959 को पहली त्रिस्तरीय पंचायत (जिला पंचायत, क्षेत्र पंचायत और गांव पंचायत) का नागौर जिले में उद्घाटन किया था। हालांकि इसी पुस्तक के पेज नंबर 14 पर दूसरे पैराग्राफ की दूसरी लाइन में उत्तर प्रदेश में ग्राम पंचायतों की स्थापना 15 अगस्त 1949 से लिखी गई है। इस तिथि से ही उत्तर प्रदेश में लगभग 35 हजार ग्राम पंचायतें अस्तित्व में आईं थीं। ऐसे में आमने-सामने के पेज पर गांव पंचायतों के गठन की अलग-अलग तिथि प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे प्रधानों को भ्रमित कर रहे हैं।
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इंटरनेट पर पंचायतीराज विभाग की वेबसाइट और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारियों के लिए आने वाली पुस्तकों के मुताबिक वर्ष 1957 में गठित बलवंत राय मेहता समिति ने वर्ष 1958 में भारत में त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था के गठन की सिफारिश की थी। इसके बाद ग्राम पंचायत (ग्राम स्तर पर), पंचायत समिति (मध्यवर्ती स्तर पर) और जिला परिषद (जिला स्तर पर) शामिल हैं। इस पुस्तक में नागौर जिले में गठित जिस पंचायत को देश की पहली पंचायत बताया गया है, वह असल में देश की पहली त्रिस्तरीय पंचायत है।
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पंचायतों में ग्राम प्रधानों को प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। पुस्तकों को विभाग द्वारा ही छपवाकर भेजा गया है। पंचायतों के गठन को लेकर गलत इतिहास पढ़ाए जाने की जानकारी नहीं हैं। पुस्तक में दिए गए तथ्य पढ़कर ही बता पाएंगे।
डॉ. हरिचरन सिंह, मुख्य विकास अधिकारी
क्या बोले इतिहासकार
ग्राम पंचायतों में प्रधानों को बांटी गई पुस्तिका में 1959 को नागौर जिले में तत्कालीन प्रधानमंत्री पं. जवाहरलाल नेहरू द्वारा देश की पहली पंचायत का उद्घाटन किया जाना लिखा गया है, जबकि यहां पर त्रिस्तरीय पंचायत होना चाहिए था। शब्दों के गलत होने से भ्रम फैल रहा है।
डॉ. एलसी अनुरागी, इतिहासकार