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पत्नी और बेटियां कर रही खुशियों का इंतजार
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सुनील कुशवाहा के आने की जानकारी होने पर प्रसन्न मुद्रा में पत्नी व बेटियां।
- फोटो : MAHOBA
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कबरई (महोबा)। पाकिस्तान के सिंध प्रांत के कराची की लांडी जेल में चार वर्ष तीन माह से बंद मछुआरे के रिहा हो जाने पर परिवार सहित पूरे गांव में खुशी का माहौल बना हुआ है। उसकी बेटियों खुशबू व रोशनी ने बताया कि रविवार के दिन हमारे पापा घर आ जाएंगे। सवा चार साल बाद हमलोग अपने पापा को देखेंगे।
नौ नवंबर 2017 से कराची की लांडी जेल में निरुद्ध चल रहे ग्रामीण मछुआरे सुनील कुशवाहा सहित बुंदेलखंड के पांच भारतीय मछुआरों को पाकिस्तानी शासन ने 23 जनवरी को रिहा कर दिया गया है।
थाना क्षेत्र के लिलवाही गांव निवासी सुनील कुमार कुशवाहा की पत्नी रेखा देवी ने बताया कि शुक्रवार के दिन चार बजे मोबाइल पर पति सुनील ने फोन कर बताया है कि वाघा बार्डर से ओखा पोरबंदर स्थित झालेराम कंपनी ले जाया गया था। उसी कंपनी में काम करने के दौरान मछुआरों को पकड़ा गया था इसलिए शासन की ओर से पाकिस्तान से छूटे सभी मछुआरों को उसी कंपनी के सुपुर्द किया गया है।
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अपने घर पहुंचने के लिए आज ओखा रेलवे स्टेशन से ट्रेन में बैठ गए हैं। रविवार के दिन अपने-अपने घर पहुंचेंगे। यह सुनकर सुनील के परिवार सहित पूरे गांव में भारी खुशी देखी जा रही है।
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रेखा देवी ने बताया कि उसके दो बेटियां खुशबू व रोशनी है। दोनों बेटियां पढ़ रही हैं। इनकी पढ़ाई-लिखाई का खर्च व अन्य पारिवारिक खर्च उठाने में भारी समस्या का सामना करना पड़ा है। उसने यह भी बताया कि बड़ी बेटी की शादी भी करना है किंतु पति के जेल में बंद होने के कारण कैसे शादी हो पाती। यह भी चिंता रात-दिन सता रही थी। अब हम दोनों लोग मेहनत कर कमाएंगे और दोनों बेटियों को खूब पढ़ाएंगे। साथ ही धूमधाम से उनकी शादी करेंगे।
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नौ नवंबर 2017 से कराची की लांडी जेल में निरुद्ध चल रहे ग्रामीण मछुआरे सुनील कुशवाहा सहित बुंदेलखंड के पांच भारतीय मछुआरों को पाकिस्तानी शासन ने 23 जनवरी को रिहा कर दिया गया है।
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थाना क्षेत्र के लिलवाही गांव निवासी सुनील कुमार कुशवाहा की पत्नी रेखा देवी ने बताया कि शुक्रवार के दिन चार बजे मोबाइल पर पति सुनील ने फोन कर बताया है कि वाघा बार्डर से ओखा पोरबंदर स्थित झालेराम कंपनी ले जाया गया था। उसी कंपनी में काम करने के दौरान मछुआरों को पकड़ा गया था इसलिए शासन की ओर से पाकिस्तान से छूटे सभी मछुआरों को उसी कंपनी के सुपुर्द किया गया है।
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अपने घर पहुंचने के लिए आज ओखा रेलवे स्टेशन से ट्रेन में बैठ गए हैं। रविवार के दिन अपने-अपने घर पहुंचेंगे। यह सुनकर सुनील के परिवार सहित पूरे गांव में भारी खुशी देखी जा रही है।
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रेखा देवी ने बताया कि उसके दो बेटियां खुशबू व रोशनी है। दोनों बेटियां पढ़ रही हैं। इनकी पढ़ाई-लिखाई का खर्च व अन्य पारिवारिक खर्च उठाने में भारी समस्या का सामना करना पड़ा है। उसने यह भी बताया कि बड़ी बेटी की शादी भी करना है किंतु पति के जेल में बंद होने के कारण कैसे शादी हो पाती। यह भी चिंता रात-दिन सता रही थी। अब हम दोनों लोग मेहनत कर कमाएंगे और दोनों बेटियों को खूब पढ़ाएंगे। साथ ही धूमधाम से उनकी शादी करेंगे।