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Mahoba News: कबरई में एक साथ उठीं चार अर्थियां तो हर आंख हुई नम

Sat, 16 May 2026 01:32 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sat, 16 May 2026 01:32 AM IST
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When four coffins were raised simultaneously in Kabrai, every eye became moist.
अंतिम संस्कार के दौरान मौजूद कस्बावासी।  - फोटो : संवाद
कबरई (महोबा)। बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे पर जनपद बांदा के हथौड़ा गांव के पास डीसीएम से टकराकर कार सवार एक ही परिवार के चार लोगों की मौत के बाद शुक्रवार की सुबह करीब दस बजे सभी के शव कस्बा कबरई पहुंचे तो हर आंख नम नजर आई। चीख-पुकार और मातम से पूरा मोहल्ला गूंज उठा। कस्बे के मकरबई रोड स्थित रेलवे क्रॉसिंग के पास परिवार के निजी खेत में चारों का अंतिम संस्कार किया गया।
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कस्बा कबरई के किदवईनगर निवासी अजीत विश्वकर्मा बृहस्पतिवार की सुबह मां प्रेमशिला, दादी चंद्रावती, चाची निशा व चचेरी बहन रिया के साथ कार से आजमगढ़ के जियनपुर गांव से घर लौट रहे थे। बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे पर हादसे में चार लोगों की मौत हो गई थी जबकि रिया का इलाज चल रहा है। पोस्टमार्टम के बाद शुक्रवार को शव घर लाए गए तो चीख-पुकार मच गई।
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एक साथ चार अर्थियां उठी तो लोग गमगीन हो गया। सैकड़ों की संख्या में लोग अंतिम संस्कार में शामिल हुए। अजीत अपने पिता के इकलौते बेटे थे। उनकी मौत के बाद घर में मुखाग्नि देने वाला कोई पुरुष सदस्य नहीं बचा। उनके चाचा श्याम नारायण के बेटे सत्यम ने मुखाग्नि दी। अजीत के पिता रामविनय विश्वकर्मा की डेढ़ साल पहले बीमारी से मौत हो गई थी।
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पहले पिता और अब मां, भाई व दादी को खोने के बाद अविवाहित बेटी अंजू और सोनम का रो-रोकर बुरा हाल रहा। विश्वकर्मा परिवार ने वर्षों की मेहनत से कबरई में मशीनरी निर्माण का बड़ा कारोबार शुरू किया था जो समय के साथ पूरे क्षेत्र में पहचान बन गया लेकिन हादसे ने परिवार की खुशियों को मातम में बदल दिया।

बंद रहे व्यापारिक प्रतिष्ठान
प्रतिष्ठित व्यापारी अजीत विश्वकर्मा समेत परिवार के चार लोगों की सड़क हादसे में मौत होने से शुक्रवार को पत्थरमंडी कबरई के व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद रहे। हर कोई अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए पहुंचा। छोटे कारोबार से काम शुरू कर मुकाम तक पहुंचाने वाले अजीत सरल स्वभाव व मिलनसार थे। एक साथ परिवार के चार लोगों की मौत ने सभी झकझोर दिया। बृहस्पतिवार की शाम को सूचना आने के बाद अधिकांश व्यापारियों ने अपने प्रतिष्ठान बंद कर दिए थे। जो शुक्रवार को भी बंद रहे। सभी की जुबां पर बस हादसे की चर्चा होती दिखी।

नहीं जले मोहल्ले के चूल्हे
कस्बे के किदवई नगर निवासी विश्वकर्मा परिवार के चार लोगों की हादसे में मौत की घटना के बाद क्षेत्र में मातम का माहौल रहा। किदवई नगर में पूरे दिन मोहल्लेवासियों के घरों में चूल्हे नहीं जले। महिलाएं और पुरुष मृतकों के घर पर शोक संवेदना व्यक्त करते रहे। अंतिम संस्कार के बाद देर शाम तक लोगों का मृतकों के घर पहुंचने का सिलसिला चलता रहा। हर कोई परिवार के अन्य सदस्यों को ढांढ़स बंधाता नजर आया।


निशा की मौत से चार बच्चों के सिर से उठा ममता का साया
सड़क हादसे में जान गंवाने वाली निशा (35) अपने परिवार का सहारा थी। रामविनय विश्वकर्मा के चचेरे भाई और निशा के पति दिलीप विश्वकर्मा पांच वर्ष पहले बेटे पीयूष व बेटी रिया के साथ कबरई आकर पचपहरा मोड़ के पास किराये के मकान में रहने लगे थे और वेल्डिंग का कारोबार कर परिवार का भरण-पोषण करते थे। दो वर्ष पहले बड़े भाई शेषनाग के निधन के बाद उनके बेटे आयुष व बेटी खुशबू की जिम्मेदारी भी निशा ने संभाल ली थी। चारों बच्चों की देखभाल से लेकर घर की पूरी जिम्मेदारी निशा निभाती थी। हादसे में निशा की मौत के बाद से चारों बच्चों के सिर से ममता का साया उठ गया। बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल रहा।
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