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तिलहनी फसलों में सल्फर के इस्तेमाल से बढ़ेगी पैदावार: मुकेश चंद
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महोबा/बेलाताल। कृषि विज्ञान केंद्र बेलाताल की ओर विकास खंड जैतपुर के ग्राम मोहारी में सरसों की फसल बढ़ाने के तरीके बैठक में बताए। खेतों में सल्फर के प्रयोग की सलाह दी।
किसान विज्ञान केंद्र के अध्यक्ष डॉ. मुकेश चंद ने किसानों को बुंदेलखंड में कम पानी की दशा में सरसों की खेती और मिट्टी के महत्व व मृदा परीक्षण के बारे में विस्तार से बताया। कहा कि कृषकों ने सरसों की गिरिराज प्रजाति प्रदर्शन की प्रशंसा की । इस किस्म से कृषकों को अधिक पैदावार मिलने के साथ-साथ कम पानी की स्थिति में भी अच्छा लाभ प्राप्त हो सकेगा। तिलहन उत्पादन में सल्फर (एनपीकेएस) जब जाता है तो उनकी पैदावार बढ़ा देता है। तेल की मात्रा के साथ-साथ उसकी गुणवत्ता बढ़ जाती है। तिलहनी फसलों में 30 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर के हिसाब करना चाहिए।
केंद्र के उद्यान वैज्ञानिक डा. बृजेश पांडेय ने किसानों को जैविक खेती करने पर बल दिया। शस्य वैज्ञानिक डॉ. गौरव द्वारा फसलों में समय से खरपतवार नियंत्रण विषय में जानकारी दी एवं किसानों को कृषि की विभिन्न तकनीकों के बारे में उचित दूरी पर बुवाई की सलाह दी। सरसों की पैदावार बढ़ाने की तकनीकी के साथ ही सरसों के प्रमुख रोग व कीट प्रबंधन के बारे में विस्तृत जानकारी दी। इस अवसर पर प्रगतिशील कृषक करन सिंह, जयराम, राम कुमार, महेंद्र सिंह, जयराज सहित 30 कृषक उपस्थित रहे।
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किसान विज्ञान केंद्र के अध्यक्ष डॉ. मुकेश चंद ने किसानों को बुंदेलखंड में कम पानी की दशा में सरसों की खेती और मिट्टी के महत्व व मृदा परीक्षण के बारे में विस्तार से बताया। कहा कि कृषकों ने सरसों की गिरिराज प्रजाति प्रदर्शन की प्रशंसा की । इस किस्म से कृषकों को अधिक पैदावार मिलने के साथ-साथ कम पानी की स्थिति में भी अच्छा लाभ प्राप्त हो सकेगा। तिलहन उत्पादन में सल्फर (एनपीकेएस) जब जाता है तो उनकी पैदावार बढ़ा देता है। तेल की मात्रा के साथ-साथ उसकी गुणवत्ता बढ़ जाती है। तिलहनी फसलों में 30 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर के हिसाब करना चाहिए।
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केंद्र के उद्यान वैज्ञानिक डा. बृजेश पांडेय ने किसानों को जैविक खेती करने पर बल दिया। शस्य वैज्ञानिक डॉ. गौरव द्वारा फसलों में समय से खरपतवार नियंत्रण विषय में जानकारी दी एवं किसानों को कृषि की विभिन्न तकनीकों के बारे में उचित दूरी पर बुवाई की सलाह दी। सरसों की पैदावार बढ़ाने की तकनीकी के साथ ही सरसों के प्रमुख रोग व कीट प्रबंधन के बारे में विस्तृत जानकारी दी। इस अवसर पर प्रगतिशील कृषक करन सिंह, जयराम, राम कुमार, महेंद्र सिंह, जयराज सहित 30 कृषक उपस्थित रहे।
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