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बै ंककर्मियों की हड़ताल से प्रभावित रहा दस करोड़ का लेनदेन
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इंडियन बैंक के बाहर प्रदर्शन करते बैंक कर्मचारी।
- फोटो : MAHOBA
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महोबा। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन की अपील पर दो दिवसीय हड़ताल के पहले दिन गुरुवार को बैंककर्मियों ने प्रदर्शन कर नारेबाजी की। बैंकों के निजीकरण के विरोध में हड़ताल के चलते जिले की सभी बैंक बंद रहीं। हड़ताल से करीब दस करोड़ रुपये का लेनदेन प्रभावित रहा। बैंक बंद होने से विभिन्न कार्य के लिए पहुंचे उपभोक्ता बैरंग लौटने को मजबूर हुए। शुक्रवार को दूसरे दिन भी बैंकों में कामकाज ठप रहेगा।
शहर के इंडियन बैंक के बाहर विभिन्न बैकों के कर्मचारियों ने प्रदर्शन कर विरोध जताया। यूपी बैंक इंप्लाइज यूनियन के जिलाध्यक्ष जयपाल सिंह परिहार ने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के दो बैंकों के निजीकरण के विरोध में कर्मचारी हड़ताल पर हैं। उन्होंने निजीकरण के लिए किए जाने वाले बैंकिंग कानून में संशोधन की मांग की। कहा कि भारत में 736 निजी बैंक डूब चुके हैं। इसके बावजूद सरकार दो बैंकों को निजी क्षेत्र में देने का मन बना रही है। जिसके लिए कर्मचारी आरपार की लड़ाई लड़ेंगे।
हड़ताल से यूनियन बैंक, यूको बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, केनरा बैंक, सेंट्रल बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, बैंक ऑफ इंडिया, एचडीएफसी बैंक आदि बैंकों में ताले लटकते रहे। जिसके चलते लेनदेन के लिए पहुंचे ग्राहक बैरंग लौट गए। हड़ताल में सुरेंद्र गुप्ता, दीपेंद्र सिंह, अयाज अली, अशोक कुमार, सीमा, दीपक समेत तमाम कर्मचारी शामिल रहे। उधर, एलडीएम आशीष विवेक का कहना है कि बैंकों की हड़ताल से करीब दस करोड़ का लेनदेन प्रभावित रहा। हालांकि ग्रामीण क्षेत्रों की कुछ बैंकों की शाखाएं खुली रहीं।
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एटीएम ने भी छोड़ा साथ
निजीकरण के विरोध में बैंककर्मियों की हड़ताल से जहां जिले के बैंक बंद रहे तो वहीं एटीएम भी उपभोक्ताओं का साथ नहीं दे सके। अधिकांश एटीएम में शाम के समय कैश खत्म हो गया। वहीं कुछ एटीएम के शटर गिरा दिए गए। रुपये की जरूरत पड़ने पर लोग इधर-उधर भटकते रहे। राजेश, नासिर आदि ने बताया कि उन्हें अपने परिजनों के इलाज के लिए बाहर जाना था। अचानक बैंकों की हड़ताल होने और एटीएम के जवाब देने पर उन्होंने रिश्तेदारों से किसी तरह पैसे की व्यवस्था की।
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शहर के इंडियन बैंक के बाहर विभिन्न बैकों के कर्मचारियों ने प्रदर्शन कर विरोध जताया। यूपी बैंक इंप्लाइज यूनियन के जिलाध्यक्ष जयपाल सिंह परिहार ने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के दो बैंकों के निजीकरण के विरोध में कर्मचारी हड़ताल पर हैं। उन्होंने निजीकरण के लिए किए जाने वाले बैंकिंग कानून में संशोधन की मांग की। कहा कि भारत में 736 निजी बैंक डूब चुके हैं। इसके बावजूद सरकार दो बैंकों को निजी क्षेत्र में देने का मन बना रही है। जिसके लिए कर्मचारी आरपार की लड़ाई लड़ेंगे।
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हड़ताल से यूनियन बैंक, यूको बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, केनरा बैंक, सेंट्रल बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, बैंक ऑफ इंडिया, एचडीएफसी बैंक आदि बैंकों में ताले लटकते रहे। जिसके चलते लेनदेन के लिए पहुंचे ग्राहक बैरंग लौट गए। हड़ताल में सुरेंद्र गुप्ता, दीपेंद्र सिंह, अयाज अली, अशोक कुमार, सीमा, दीपक समेत तमाम कर्मचारी शामिल रहे। उधर, एलडीएम आशीष विवेक का कहना है कि बैंकों की हड़ताल से करीब दस करोड़ का लेनदेन प्रभावित रहा। हालांकि ग्रामीण क्षेत्रों की कुछ बैंकों की शाखाएं खुली रहीं।
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एटीएम ने भी छोड़ा साथ
निजीकरण के विरोध में बैंककर्मियों की हड़ताल से जहां जिले के बैंक बंद रहे तो वहीं एटीएम भी उपभोक्ताओं का साथ नहीं दे सके। अधिकांश एटीएम में शाम के समय कैश खत्म हो गया। वहीं कुछ एटीएम के शटर गिरा दिए गए। रुपये की जरूरत पड़ने पर लोग इधर-उधर भटकते रहे। राजेश, नासिर आदि ने बताया कि उन्हें अपने परिजनों के इलाज के लिए बाहर जाना था। अचानक बैंकों की हड़ताल होने और एटीएम के जवाब देने पर उन्होंने रिश्तेदारों से किसी तरह पैसे की व्यवस्था की।