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Mahoba News: नेचर पार्क और साइंस सिटी देखकर समझी चंद्रयान की बारीकियां
Wed, 25 Mar 2026 12:42 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महोबा
संवाद न्यूज एजेंसी, महोबा
Updated Wed, 25 Mar 2026 12:42 AM IST
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महोबा। जिले के परिषदीय स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे पांच दिनों की यात्रा पूरी करके इसरो के अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र का भ्रमण कर वापस महोबा लौटे।अंतरिक्ष विज्ञान के नए-नए प्रयोग, चंद्रयान मिशन, सैटेलाइट आदि की बारीकियां जानने के साथ ही साइंस सिटी और नेचर पार्क देखकर बच्चे प्रसन्न नजर आए। उन्होंने अपने अनुभव को शानदार बताया।
जिलाधिकारी गजल भारद्वाज के विशेष प्रयास से भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान (इसरो) व व्योमिका फाउंडेशन के सहयोग से जिले के 40 परिषदीय विद्यालयों में स्पेस लैब की स्थापना की जा रही है। इन्हीं स्कूलों में पढ़ने वाले एक-एक प्रतिभाशाली बच्चे का चयन अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र (सैक) की एक्सपोजर विजिट के लिए किया गया था। इन बच्चों के साथ अहमदाबाद गईं शिक्षिका पूजा वर्मा ने बताया कि सैक पहुंचने पर बच्चों को सबसे पहले सैटेलाइट निर्माण और सेंसर के काम करने के तरीकों के बारे में बताया गया। यहां पर सैक के डायरेक्टर डाॅ. नीलेश देसाई ने बच्चों से बात करते हुए उन्हें जिज्ञासु बनने और प्रश्न करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने इसरो की ओर से अब तक भेजे गए विभिन्न सैटेलाइट के बारे में बताया। साइंस सिटी में स्पेस एंड एस्ट्रोनोमी सेक्शन में भारत के विभिन्न अंतरिक्ष मिशन, भविष्य के गगनयान, मंगलयान, सौर मंडल और रोबोट के बारे में बताया। रोबोटिक गैलरी में कई प्रकार रोबोट देखे। एक्वेटिक गैलरी में बहुत प्रकार के जलीय जीवों को देखकर बच्चे रोमांचित हुए। इस टूर के दौरान स्कूल में नोडल अधिकारी के तौर पर बीईओ जैतपुर अवनीश यादव, शिक्षक गौतम राजपूत, राजेंद्र कुमार, शिक्षिका मीरा पटैरिया भी साथ रहे।
जीवन का एक अलग अनुभव रहा
उच्च प्राथमिक विद्यालय बम्हौरीकलां की छात्रा संतोषी ने कहा कि इसरो के अंतरिक्ष मिशन, चंद्रयान, मंगलयान आदि के बारे में विस्तार से जानने का मौका मिला। यह जीवन का अलग ही अनुभव रहा। सभी बच्चों को ऐसे टूर का मौका मिलना चाहिए।
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उच्च प्राथमिक विद्यालय कंपोजिट पड़ोरा की छात्रा निशा ने बताया कि साइंस सिटी में रोबोट देखकर भविष्य में रोबोट की उपयोगिता को समझा। सैटेलाइट निर्माण की प्रक्रिया को समझकर काफी अच्छा लगा। वैज्ञानिकों के साथ संवाद काफी अच्छा रहा।
उच्च प्राथमिक विद्यालय महेवा के छात्र इशांत ने बताया कि सौर मंडल और अंतरिक्ष के बारे में जितना पढ़ा था, उससे कहीं अधिक विस्तार होने की जानकारी मिली। यह बिल्कुल अलग तरह का अनुभव था।
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जिलाधिकारी गजल भारद्वाज के विशेष प्रयास से भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान (इसरो) व व्योमिका फाउंडेशन के सहयोग से जिले के 40 परिषदीय विद्यालयों में स्पेस लैब की स्थापना की जा रही है। इन्हीं स्कूलों में पढ़ने वाले एक-एक प्रतिभाशाली बच्चे का चयन अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र (सैक) की एक्सपोजर विजिट के लिए किया गया था। इन बच्चों के साथ अहमदाबाद गईं शिक्षिका पूजा वर्मा ने बताया कि सैक पहुंचने पर बच्चों को सबसे पहले सैटेलाइट निर्माण और सेंसर के काम करने के तरीकों के बारे में बताया गया। यहां पर सैक के डायरेक्टर डाॅ. नीलेश देसाई ने बच्चों से बात करते हुए उन्हें जिज्ञासु बनने और प्रश्न करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने इसरो की ओर से अब तक भेजे गए विभिन्न सैटेलाइट के बारे में बताया। साइंस सिटी में स्पेस एंड एस्ट्रोनोमी सेक्शन में भारत के विभिन्न अंतरिक्ष मिशन, भविष्य के गगनयान, मंगलयान, सौर मंडल और रोबोट के बारे में बताया। रोबोटिक गैलरी में कई प्रकार रोबोट देखे। एक्वेटिक गैलरी में बहुत प्रकार के जलीय जीवों को देखकर बच्चे रोमांचित हुए। इस टूर के दौरान स्कूल में नोडल अधिकारी के तौर पर बीईओ जैतपुर अवनीश यादव, शिक्षक गौतम राजपूत, राजेंद्र कुमार, शिक्षिका मीरा पटैरिया भी साथ रहे।
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जीवन का एक अलग अनुभव रहा
उच्च प्राथमिक विद्यालय बम्हौरीकलां की छात्रा संतोषी ने कहा कि इसरो के अंतरिक्ष मिशन, चंद्रयान, मंगलयान आदि के बारे में विस्तार से जानने का मौका मिला। यह जीवन का अलग ही अनुभव रहा। सभी बच्चों को ऐसे टूर का मौका मिलना चाहिए।
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उच्च प्राथमिक विद्यालय कंपोजिट पड़ोरा की छात्रा निशा ने बताया कि साइंस सिटी में रोबोट देखकर भविष्य में रोबोट की उपयोगिता को समझा। सैटेलाइट निर्माण की प्रक्रिया को समझकर काफी अच्छा लगा। वैज्ञानिकों के साथ संवाद काफी अच्छा रहा।
उच्च प्राथमिक विद्यालय महेवा के छात्र इशांत ने बताया कि सौर मंडल और अंतरिक्ष के बारे में जितना पढ़ा था, उससे कहीं अधिक विस्तार होने की जानकारी मिली। यह बिल्कुल अलग तरह का अनुभव था।