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दो स्कूली वाहन भिड़े, वैन चालक की मौत, दर्जनभर बच्चे घायल

Fri, 09 Sep 2016 10:52 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, महोबा
अमर उजाला ब्यूरो, महोबा Updated Fri, 09 Sep 2016 10:52 PM IST
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Two school vehicles clashed van driver killed, dozen injured
दुर्घटना के बाद घटनास्थल पर लगी भीड़। - फोटो : अमर उजाला
झांसी - मिर्जापुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर शुक्रवार को छतेसर गांव के पास दो स्कूली वाहनों के आमने- सामने भिड़ने से दर्जनभर छात्र-छात्राएं घायल हो गए। इस दौरान वैन चालक की मौत हो गई, जबकि चार बच्चों को झांसी रेफर कर दिया गया है। ज्ञानगंगा स्कूल पनवाड़ी की मैजिक आसपास के गांवों के 10 बच्चों को लेकर शुक्रवार सुबह स्कूल जा रही थी कि छतेसर गांव के
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पास विवेकानंद स्कूल की वैन से टक्कर हो गई। दोनाें स्कूली वाहनों के आमने -सामने टकराने से चीख पुकार मच गई। आसपास के ग्रामीण दौड़ पड़े। किसी तरह वाहनों में फंसे बच्चों को बाहर निकाला। सभी बच्चों को पनवाड़ी स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया। यहां वैन सवार ऋषभ (11), शिवम (13), मनीष (12), गौरव (10) और वैन चालक
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घासीराम (35) की हालत गंभीर देख मेडिकल कालेज झांसी रेफर कर दिया गया। मेडिकल कालेज ले जाते समय रास्ते में चालक घासीराम की मौत हो गई। जबकि केशव (9), राजनारायण (12), रितिक (9), कोमल (11 साल), प्रांशी (13) हिमांशु (10), सोनम (07) एवं मैजिक सवार हुसैन (11), तारिक (10), अजमत (12), अवरोधी (8), पिंकी (9), रोहन (11) की
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मरहम पट्टी के बाद छुट्टी दे दी गई। दूसरी तरफ मृतक घासीराम के परिजनों ने आरोप लगाया कि  सीएचसी में सही इलाज नहीं मिलने की वजह से ही उसकी मौत हो गई।

दुर्घटना सुनकर घटना स्थल पर भागे परिजन
पनवाड़ी के पास दो स्कूली वाहनों में हुई भिड़ंत के बाद चारों तरफ चीख पुकार मच गई। मौके पर कहीं बच्चे रो बिलख रहे थे, तो कहीं बच्चों के परिजन रोते हुए दुर्घटना स्थल की तरफ भाग रहे थे। वहीं, दोनों स्कूलों में तुरंत छुट्टी कर दी गई, सभी बच्चों के इलाज की व्यवस्था में जुटे रहे। हर कोई घायल बच्चों को लेकर अस्पताल की तरफ भाग रहा था। वहीं, बच्चों के घरों में गमगीन माहौल बना हुआ है, लोग परिजनों को सांत्वना देने पहुंच रहे हैं। उधर, दुर्घटना से सहमे बच्चों का बुरा हाल है। बच्चे बार-बार रोकर माता-पिता की गोद में दुबके दिखे। दर्द और भय से बच्चों को चेहरा बेहाल है।

 नहीं मिला सही इलाज
मृतक के बेटे गंगाराम और पत्नी उर्मिला ने आरोप लगाया कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पनवाड़ी में उपचार न मिल पाने के कारण ही घासीराम ने रास्ते में दम तोड़ दिया। आरोप है कि अस्पताल में डाक्टर भी नहीं था। मौके पर मौजूद एक फार्मेसिस्ट ने ही घासीराम को रेफर कर दिया।

ज्यादा बच्चे बैठने से बिगड़ जाता है संतुलन
शहर के स्कूली वाहनों में आठ बच्चों की जगह होने के बाद भी 12-12 बच्चे बैठाए जा रहे हैं। चालक के बगल में कई बच्चे बैठने से कई बार चालक का संतुलन बिगड़ जाता है। शुक्रवार को भी यही हुआ। मोड़ पर अचानक दूसरी गाड़ी दिखाई देने पर चालक का संतुलन बिगड़ गया। इससे गाड़ी धीमी नहीं हो सकी और दुर्घटना हो गई।  


रात में ग्रामीणों की मदद करता था घासीराम
पनवाड़ी (महोबा)। स्कूली वाहनों की टक्कर में वाहन चालक घासीराम की मौत से गांव का माहौल गमगीन हो गया है। महुआ गांव निवासी घासीराम रात में ग्रामीणों को इमरजेंसी पड़ने पर निशुल्क अस्पताल लाने-ले जाने के लिए भी हमेशा तैयार रहता था। उसकी सेवाएं याद कर करके ग्रामीण गमगीन हैं।
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