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भागवत कथा सुनने से दूर होते हैं दुख-दर्द- निधि प्रिया
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कथा का रसपान करातीं निधि प्रिया कौशिक।
- फोटो : MAHOBA
चरखारी (महोबा)। कस्बे के ऐतिहासिक गोवर्धन्नाथ मेले में शुक्रवार से सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ हो गया। मथुरा से आईं कथावाचिका निधि प्रिया ने कहा कि भागवत कथा ऐसा ग्रंथ है, जिसके पढ़ने व सुनने मात्र से मानव के कष्ट दूर हो जाते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
मेला परिसर आयोजित संगीतमय भागवत कथा में कथा व्यास ने कहा कि जिस स्थान पर भागवत कथा का आयोजन होता है। वहां भगवान स्वयं विराजमान रहते हैं। कथा श्रवण के दौरान मुख्य यजमान देेवेंद्र सिंह, पुष्पा सिंह, मनोज पाठक, प्रदीप पंसारी, पालिकाध्यक्ष मूलचंद्र अनुरागी, ईओ केके सोनकर, परवेज, सौरभ सक्सेना आदि मौजूद रहे। वहीं मेला परिसर में चल रहे विष्णु महायज्ञ में भक्त बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हुए आहुतियां दे रहे हैं।
भगवान गोवर्धन से क्षमा मांगने पहुंचे इंद्र
चरखारी। कस्बे के धार्मिक व सांस्कृतिक महत्व के ऐतिहासिक गोवर्धन्नाथ मेले में भगवान की सवारियां निकाली गईं। मेले में इंद्र भगवान गोवर्धन से क्षमा मांगने पहुंचे। परंपरा के अनुसार राजा इंद्र गोकुलवासियों पर किए गए अत्याचार के लिए भगवान कृष्ण के द्वार पहुंचे। जहां गोवर्धनधारी भगवान कृष्ण अपनी कनिष्ठा अंगुली पर गोवर्धन पर्वत को लेकर गोकुल वासियों की रक्षा करते हैं। वहीं कस्बे में राजा इंद्र की सवारी निकाली गई। जो विभिन्न मार्गों से होते हुए मेला परिसर पहुंची।
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मेला परिसर आयोजित संगीतमय भागवत कथा में कथा व्यास ने कहा कि जिस स्थान पर भागवत कथा का आयोजन होता है। वहां भगवान स्वयं विराजमान रहते हैं। कथा श्रवण के दौरान मुख्य यजमान देेवेंद्र सिंह, पुष्पा सिंह, मनोज पाठक, प्रदीप पंसारी, पालिकाध्यक्ष मूलचंद्र अनुरागी, ईओ केके सोनकर, परवेज, सौरभ सक्सेना आदि मौजूद रहे। वहीं मेला परिसर में चल रहे विष्णु महायज्ञ में भक्त बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हुए आहुतियां दे रहे हैं।
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भगवान गोवर्धन से क्षमा मांगने पहुंचे इंद्र
चरखारी। कस्बे के धार्मिक व सांस्कृतिक महत्व के ऐतिहासिक गोवर्धन्नाथ मेले में भगवान की सवारियां निकाली गईं। मेले में इंद्र भगवान गोवर्धन से क्षमा मांगने पहुंचे। परंपरा के अनुसार राजा इंद्र गोकुलवासियों पर किए गए अत्याचार के लिए भगवान कृष्ण के द्वार पहुंचे। जहां गोवर्धनधारी भगवान कृष्ण अपनी कनिष्ठा अंगुली पर गोवर्धन पर्वत को लेकर गोकुल वासियों की रक्षा करते हैं। वहीं कस्बे में राजा इंद्र की सवारी निकाली गई। जो विभिन्न मार्गों से होते हुए मेला परिसर पहुंची।
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