{"_id":"60fefcad8ebc3e5843066d43","slug":"troubled-by-the-plight-of-the-family-the-handicapped-son-committed-suicide-mahoba-news-knp6425883116","type":"story","status":"publish","title_hn":"परिवार की बदहाली से परेशान अपाहिज बेटे ने की खुदकुशी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
परिवार की बदहाली से परेशान अपाहिज बेटे ने की खुदकुशी
विज्ञापन
घटनास्थल का निरीक्षण करते सीओ
- फोटो : MAHOBA
खरेला (महोबा)। थाना खरेला के बसौंठ गांव में दिव्यांग युवक ने फांसी लगाकर जान दे दी। मृतक अपने इलाज में खर्च हो रहे रुपये से परिवार की बिगड़ रही आर्थिक हालत से परेशान था।
बसौंठ गांव निवासी बुद्धराज कुशवाहा का पुत्र सत्यदीन उर्फ सचिन (20) दो वर्ष पहले गांव के बाहर बने जर्जर कुएं की पाट पर बैठा था। तभी कुआं धसकने से मलबे में दबकर सत्यदीन घायल हो गया। परिजनों ने मजदूरी करके उसका इलाज कराया लेकिन युवक स्वस्थ नहीं हो सका। घर की आर्थिक स्थिति गड़बड़ा जाने के चलते सत्यदीन परेशान रहता था। रविवार की रात खाना खाने के बाद लट्ठे से रस्सी का फंदा बनाकर फांसी लगा ली। जिससे उसकी मौत हो गई।
पिता ने बताया कि उसका पुत्र हर काम में होशियार था। उसका इलाज कराया गया। मेहनत-मजदूरी से मिले रुपये के अलावा गहने भी बेच दिए। घर की आर्थिक स्थिति खराब होने से घर पर अक्सर चर्चा होती थी लेकिन सत्यदीन के सामने ज्यादा बात नहीं करते थे। दो-तीन दिन से पुत्र गुमशुम रहता था। इलाज में आराम न मिलने व घर की आर्थिक स्थिति ठीक न होने पर उसने यह कदम उठाया। सूचना पर सीओ चरखारी उमेशचंद ने मौका मुआयना करते हुए परिजनों से जानकारी ली।
विज्ञापन
विज्ञापन
बसौंठ गांव निवासी बुद्धराज कुशवाहा का पुत्र सत्यदीन उर्फ सचिन (20) दो वर्ष पहले गांव के बाहर बने जर्जर कुएं की पाट पर बैठा था। तभी कुआं धसकने से मलबे में दबकर सत्यदीन घायल हो गया। परिजनों ने मजदूरी करके उसका इलाज कराया लेकिन युवक स्वस्थ नहीं हो सका। घर की आर्थिक स्थिति गड़बड़ा जाने के चलते सत्यदीन परेशान रहता था। रविवार की रात खाना खाने के बाद लट्ठे से रस्सी का फंदा बनाकर फांसी लगा ली। जिससे उसकी मौत हो गई।
विज्ञापन
पिता ने बताया कि उसका पुत्र हर काम में होशियार था। उसका इलाज कराया गया। मेहनत-मजदूरी से मिले रुपये के अलावा गहने भी बेच दिए। घर की आर्थिक स्थिति खराब होने से घर पर अक्सर चर्चा होती थी लेकिन सत्यदीन के सामने ज्यादा बात नहीं करते थे। दो-तीन दिन से पुत्र गुमशुम रहता था। इलाज में आराम न मिलने व घर की आर्थिक स्थिति ठीक न होने पर उसने यह कदम उठाया। सूचना पर सीओ चरखारी उमेशचंद ने मौका मुआयना करते हुए परिजनों से जानकारी ली।
विज्ञापन