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तीन और क्रशर संचालक सुप्रीम कोर्ट में दायर करेंगे याचिका
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कबरई (महोबा)। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) द्वारा नियमों के उल्लंघन पर आठ जून को छह क्रशर पर छह करोड़ से अधिक का जुर्माना लगाया था, जिस मामले में तीन क्रशर संचालकों द्वारा सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। जिस पर फैसला आने तक क्रशर प्लांटों में जुर्माने पर रोक लगा दी गई वहीं शेष तीन क्रेशर प्लांट आर बी एसोसिएट्स, अरिहंत ग्रेनाइट व प्रयागराज ग्रेनाइट के संचालकों ने बताया कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा जुर्माना वसूली पर रोक लगाए जाने से न्याय मिलने की उम्मीद जग गई है।
गौरतलब हो कि 31 मई 2019 को जनपद के बिलबई गांव निवासी किसान मदनपाल सिंह आदि ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के नियमों का उल्लंघन कर चलाए जा रहे क्रेशर प्लांटों के खिलाफ एनजीटी में याचिका दायर की थी। दिसंबर 2019 को किसानों की याचिका पर सुनवाई करते हुए पत्थर मंडी की 42 क्रेशर सहित जिलाधिकारी महोबा, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड मिलाकर 49 लोगों के खिलाफ प्रदूषण नियंत्रण के मामले में राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण में मामला दर्ज हुआ था। जिसकी सुनवाई के फलस्वरूप आठ जून को एनजीटी के न्यायाधीश आदर्श कुमार गोयल, सुधीर अग्रवाल, एम सत्यनारायणन, ब्रजेश सेठी व नागिन नंदा की पीठ ने पत्थर मंडी की छह क्रशर प्लांटों कृष्णा ग्रेनाइट,आर बी एसोसिएट्स, अरिहंत ग्रेनाइट, प्रयागराज ग्रेनाइट, पारस ग्रेनाइट व जय मां गंगोत्री ग्रेनाइट को 10 वर्षों तक वायु प्रदूषण नियंत्रण नियमों के विपरीत क्रेशर प्लांट संचालित करने का दोषी करार दिया था। सभी छह क्रशर को सीजकर 6 करोड़ 41 लाख 80 हजार का जुर्माना वसूल करने का आदेश भी दिया था।
एनजीटी के आदेश पर जिलाधिकारी द्वारा सभी प्लांटों को सीज करवाकर नीलामी करा जुर्माना वसूली करने के निर्देश दिए गए थे। एनजीटी के फैसले पर रोक लगाने के लिए तीन क्रशर संचालकों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने एक अक्तूबर को क्रशर संचालकों द्वारा अपना पक्ष रखने के आदेश देते हुए मामले के फैसले तक कृष्णा ग्रेनाइट, पारस ग्रेनाइट व मां गंगोत्री ग्रेनाइट से जुर्माना वसूली पर रोक लगा दी है। जुर्माना वसूली पर रोक लगने से क्रशर संचालकों राहत महसूस की है।
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सीनियर अधिवक्ता सीमा पटनाहा सिंह ने बताया कि हम कोर्ट के आदेश का सम्मान करते हैं, कोर्ट के आदेश की कॉपी देख ली है अब इसी के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी, किसानों की जमीनों को पिछले दस वर्षो से बंजर बनाया जा रहा था।
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गौरतलब हो कि 31 मई 2019 को जनपद के बिलबई गांव निवासी किसान मदनपाल सिंह आदि ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के नियमों का उल्लंघन कर चलाए जा रहे क्रेशर प्लांटों के खिलाफ एनजीटी में याचिका दायर की थी। दिसंबर 2019 को किसानों की याचिका पर सुनवाई करते हुए पत्थर मंडी की 42 क्रेशर सहित जिलाधिकारी महोबा, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड मिलाकर 49 लोगों के खिलाफ प्रदूषण नियंत्रण के मामले में राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण में मामला दर्ज हुआ था। जिसकी सुनवाई के फलस्वरूप आठ जून को एनजीटी के न्यायाधीश आदर्श कुमार गोयल, सुधीर अग्रवाल, एम सत्यनारायणन, ब्रजेश सेठी व नागिन नंदा की पीठ ने पत्थर मंडी की छह क्रशर प्लांटों कृष्णा ग्रेनाइट,आर बी एसोसिएट्स, अरिहंत ग्रेनाइट, प्रयागराज ग्रेनाइट, पारस ग्रेनाइट व जय मां गंगोत्री ग्रेनाइट को 10 वर्षों तक वायु प्रदूषण नियंत्रण नियमों के विपरीत क्रेशर प्लांट संचालित करने का दोषी करार दिया था। सभी छह क्रशर को सीजकर 6 करोड़ 41 लाख 80 हजार का जुर्माना वसूल करने का आदेश भी दिया था।
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एनजीटी के आदेश पर जिलाधिकारी द्वारा सभी प्लांटों को सीज करवाकर नीलामी करा जुर्माना वसूली करने के निर्देश दिए गए थे। एनजीटी के फैसले पर रोक लगाने के लिए तीन क्रशर संचालकों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने एक अक्तूबर को क्रशर संचालकों द्वारा अपना पक्ष रखने के आदेश देते हुए मामले के फैसले तक कृष्णा ग्रेनाइट, पारस ग्रेनाइट व मां गंगोत्री ग्रेनाइट से जुर्माना वसूली पर रोक लगा दी है। जुर्माना वसूली पर रोक लगने से क्रशर संचालकों राहत महसूस की है।
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सीनियर अधिवक्ता सीमा पटनाहा सिंह ने बताया कि हम कोर्ट के आदेश का सम्मान करते हैं, कोर्ट के आदेश की कॉपी देख ली है अब इसी के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी, किसानों की जमीनों को पिछले दस वर्षो से बंजर बनाया जा रहा था।