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Mahoba News: नए कानून से खत्म होगी तारीख पर तारीख की परंपरा
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संवाद न्यूज एजेंसी
महोबा। आपराधिक कानूनों में संशोधन से जुड़े तीन अहम विधेयकों पर लोकसभा की मुहर लग जाने से भीड़ हिंसा और नाबालिग से दुष्कर्म में फांसी की सजा का प्रावधान किया गया है। जिससे इस तरह के मामलों में तारीख पर तारीख की परंपरा खत्म होगी। आरोपियों की गैर मौजूदगी में भी ट्रायल हो सकेगा और इस तरह के मामलों में सजा भी सुनाई जा सकेगी। तीनों अहम विधेयकों के पास होने पर जिलेवासियों ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। समाजसेवियाें और बुद्धजीवियों का कहना है कि अंग्रेजाें के जमाने वाला कानून अब बदल गया है। नाबालिग से दुष्कर्म के मामलों में तीन साल के अंदर सजा सुनाई जा सकेगी। इससे इस तरह के मामलों की पुनरावृत्ति रुकेगी।
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अधिवक्ता तेज प्रताप पचौरी का कहना है कि नया कानून स्वागत योग्य है। इसे कठोरता से लागू करना चाहिए। त्वरित न्याय की व्यवस्था हो। अभी तक अपराधियों में कानून का भय नहीं लगता। उनका मानना होता है कि कोई भी अपराध करने के बाद वह एक-दो साल में छूट जाएंगे। इस प्रकार के सख्त कानून से अपराधियों को दोबारा कृत्य करने से पहले दस बार सोचना पड़ेगा।
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पूर्व प्रधानाचार्य व समाजसेवी शिवकुमार गोस्वामी का कहना कि यह सरकार की बेहतर पहल है। तीनों अहम विधेयकों पर लोकसभा की मुहर लग गई है। कानून में बदलाव से अब इस तरह के मामलों में एफआईआर दर्ज होने के बाद तीन साल के अंदर हर हाल में आरोपियों को सजा सुनाई जाएगी। इससे अपराध में अंकुश लगेगा और पीड़ितों को आसानी से न्याय मिल सकेगा।
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महोबा। आपराधिक कानूनों में संशोधन से जुड़े तीन अहम विधेयकों पर लोकसभा की मुहर लग जाने से भीड़ हिंसा और नाबालिग से दुष्कर्म में फांसी की सजा का प्रावधान किया गया है। जिससे इस तरह के मामलों में तारीख पर तारीख की परंपरा खत्म होगी। आरोपियों की गैर मौजूदगी में भी ट्रायल हो सकेगा और इस तरह के मामलों में सजा भी सुनाई जा सकेगी। तीनों अहम विधेयकों के पास होने पर जिलेवासियों ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। समाजसेवियाें और बुद्धजीवियों का कहना है कि अंग्रेजाें के जमाने वाला कानून अब बदल गया है। नाबालिग से दुष्कर्म के मामलों में तीन साल के अंदर सजा सुनाई जा सकेगी। इससे इस तरह के मामलों की पुनरावृत्ति रुकेगी।
अधिवक्ता तेज प्रताप पचौरी का कहना है कि नया कानून स्वागत योग्य है। इसे कठोरता से लागू करना चाहिए। त्वरित न्याय की व्यवस्था हो। अभी तक अपराधियों में कानून का भय नहीं लगता। उनका मानना होता है कि कोई भी अपराध करने के बाद वह एक-दो साल में छूट जाएंगे। इस प्रकार के सख्त कानून से अपराधियों को दोबारा कृत्य करने से पहले दस बार सोचना पड़ेगा।
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पूर्व प्रधानाचार्य व समाजसेवी शिवकुमार गोस्वामी का कहना कि यह सरकार की बेहतर पहल है। तीनों अहम विधेयकों पर लोकसभा की मुहर लग गई है। कानून में बदलाव से अब इस तरह के मामलों में एफआईआर दर्ज होने के बाद तीन साल के अंदर हर हाल में आरोपियों को सजा सुनाई जाएगी। इससे अपराध में अंकुश लगेगा और पीड़ितों को आसानी से न्याय मिल सकेगा।
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