गरीबी और अशिक्षा है कुपोषण की जड़
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
लोक निर्माण विभाग के सचिव संजीव कुमार ने कहा कि कुपोषण देश को दीमक की तरह खाए जा रहा रहा है। गरीबी और अशिक्षा के चलते शहर के साथ-साथ ग्रामीण अंचलाें में बच्चाें की परवरिश ठीक ढंग से नहीं हो पाती, जिससे बच्चे बीमारियाें और कुपोषण की चपेट में आ जाते हैं।
सचिव शनिवार को सहयोगी सेवा संस्थान के तत्वावधान में टूरिस्ट बंगला में आयोजित कार्यशाला में बोल रहे थे। उन्हाेंने कहा कि मौजूदा समय में 25 फीसदी बच्चे कुपोषण का शिकार हैं। लोगों को बच्चों की देखभाल पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
उन्हाेंने शासन द्वारा चलाई जा रही योजनाओं का लाभ उठाकर बच्चाें की बेहतर देखभाल करने की बात कही। साथ ही मुख्य चिकित्सा अधिकारी को कुपोषण के खिलाफ जंग में बेहतर ढंग से कार्य करने के निर्देश दिए।
डीएम वीरेश्वर सिंह ने कहा कि बच्चे कुपोषण का शिकार होकर मानसिक और शारीरिक रूप से कमजोर हो जाते हैं। कहा कि नवजात शिशुआें की बेहतर देखभाल ही कुपोषण से बचाने का बेहतर विकल्प है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. एसके वार्ष्णेय ने कहा कि नवजात शिशुआें के लिए मां का दूध बेहद फायदेमंद है। साथ ही छह माह के बाद से उन्हें पौष्टिक आहार देना शुरू कर चाहिए, जिससे बच्चों को कुपोषण से बचाया जा सके। उन्हाेंने लोगाें से शासन द्वारा चलाई जा रही योजनाओं का लाभ लेने की अपील की।
कार्यक्रम आयोजक सहयोगी सेवा संस्थान की अध्यक्ष नेहा चंसौरिया ने अतिथियों का आभार प्रकट किया। इस मौके पर पूर्व प्रधानाचार्य शिवकुमार गोस्वामी, दाऊ तिवारी, रामजी गुप्ता आदि मौजूद रहे।