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Mahoba News: उंगली पकड़ जिनको चलाना सिखाया, वही आज...
Mon, 26 May 2025 12:19 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महोबा
संवाद न्यूज एजेंसी, महोबा
Updated Mon, 26 May 2025 12:19 AM IST
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सत्संग में भजन पेश करतीं पूनम सिंह। स्रोत: समिति
- फोटो : सत्संग में भजन पेश करतीं पूनम सिंह। स्रोत: समिति
महोबा। शहर के मोहल्ला कठकुलवापुरा स्थित संत कबीर आश्रम में रविवार को अमृतवाणी सत्संग समिति के तत्वावधान में सत्संग कार्यक्रम का आयोजन हुआ। सत्संग में वक्ताओं ने स्वरचित रचनाओं से सभी का दिल जीत लिया। कवि लखनलाल चौरसिया ने वर्तमान परिप्रेक्ष की कविता उंगली पकड़ जिनको चलाना सिखाया, वही आज उंगली उठाने लगे है सुनाकर खूब वाहवाही लूटी।
सत्संग की शुरूआत कबीर वंदना से हुई। समिति प्रमुख डॉ. एलसी अनुरागी ने कहा कि जो भक्त सदैव प्रभु की ओर देखता है और सब कुछ प्रभु में ही देखता है। उसके लिए प्रभु सदैव समस्याओं के समाधान को सामने खड़े रहते हैं। पूनम सिंह ने भजन चली जा रही है उमर धीरे-धीरे व बुंदेलखंड मुक्ति मोर्चा के गायक इंद्रजीत सिंह ने काहे तेरी अंखियों में पानी सुनाया। पं. जगप्रसाद रिछारिया ने जरा देर ठहरो राम तमन्ना यही है, अभी हमने जी भरके देखा नहीं है भजन सुनाकर सभी को भाव-विभोर कर दिया। शिक्षक सुरेश सोनी ने रचना जो तन गोरो होय चाहे कारो पेश की। पं. हरीशंकर नायक ने बड़ा हुआ तो क्या हुआ जैसे पेड़ खजूर की व्याख्या की। साध्वी सुनीता ने कबीर के विचारों को अंधविश्वास समाप्त करने, जाति-पाति का भेद मिटाने और भक्ति प्राप्त करने के लिए अनिवार्य बताया। इस मौके पर हरिश्चंद्र वर्मा, मदनलाल राठौर, सुशील तिवारी, लखनलाल, नारायण दास, कमलापत, रामऔतार सेन आदि मौजूद रहे।
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सत्संग की शुरूआत कबीर वंदना से हुई। समिति प्रमुख डॉ. एलसी अनुरागी ने कहा कि जो भक्त सदैव प्रभु की ओर देखता है और सब कुछ प्रभु में ही देखता है। उसके लिए प्रभु सदैव समस्याओं के समाधान को सामने खड़े रहते हैं। पूनम सिंह ने भजन चली जा रही है उमर धीरे-धीरे व बुंदेलखंड मुक्ति मोर्चा के गायक इंद्रजीत सिंह ने काहे तेरी अंखियों में पानी सुनाया। पं. जगप्रसाद रिछारिया ने जरा देर ठहरो राम तमन्ना यही है, अभी हमने जी भरके देखा नहीं है भजन सुनाकर सभी को भाव-विभोर कर दिया। शिक्षक सुरेश सोनी ने रचना जो तन गोरो होय चाहे कारो पेश की। पं. हरीशंकर नायक ने बड़ा हुआ तो क्या हुआ जैसे पेड़ खजूर की व्याख्या की। साध्वी सुनीता ने कबीर के विचारों को अंधविश्वास समाप्त करने, जाति-पाति का भेद मिटाने और भक्ति प्राप्त करने के लिए अनिवार्य बताया। इस मौके पर हरिश्चंद्र वर्मा, मदनलाल राठौर, सुशील तिवारी, लखनलाल, नारायण दास, कमलापत, रामऔतार सेन आदि मौजूद रहे।
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