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बूढ़े किसान की मेहनत से महकने लगी बगिया

Sat, 06 Feb 2016 11:11 PM IST
The old farmer had sown nursery
The old farmer had sown nursery Updated Sat, 06 Feb 2016 11:11 PM IST
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The old farmer had sown nursery
बुंदेलखंड की सूखी और  प्यासी जमीन पर बूढ़े  किसान ने मेहनत और लगन से बगिया गुलजार कर दी। सिंचाई के संसाधन न होने के बावजूद   700 से अधिक फलदार पेड़ पौधे यहां लहलहा रहे हैं।  इसके लिए छोटेलाल ने कड़ी मेहनत की।  बगिया से एक किलोमीटर दूर लगे हैंडपंप से पानी लाकर पौेधों की सिंचाई की। दस सालों की मेहनत से  लहलहाती बगिया इलाके के लिए नजीर बन गई है।  
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जिले में सूखे और अकाल की काली छाया से किसान हताश हैं। इनके हौसले टूटने लगे हैं।  वहीं खरेला के मोहल्ला मानिक निवासी छोटेलाल राठौर (75)की लहलहाती बगिया किसानों के लिए हिम्मत और मेहनत की नजीर हैै।  सात सालों  से दैवीय आपदा से तबाह बुंदेलखंड के छोटेलाल  डेढ़ हेक्टेयर खेत में उपज न होने से परेशान थे।
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 परिवार के गुजारे पर संकट खड़ा हो गया था। छोेेटेलाल के पास कमाई का कोई और जरिया भी नहीं था। जो कुछ था , वह खेती ही थी। ऐसे में इन्होंने बागवानी का संकल्प लिया ।  आसपास कूप ,नाला और नदी न होने के बाद भी छोटेलाल ने  हिम्मत नहीं हारी । यह  सरकारी मदद के बगैर फलदार पौधों को जमीन पर रोपने लगे।
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  छोेटेलाल की इस कोशिश पर लोगों ने तंज भी किया। तंज कसने वालों में अपने भी शामिल थेेे।  छोटेलाल के बेटे  राकेश ने  सूखी जमीन में पौध लहलहाना असंभव बता दिया। साथ ही सहयोग से भी मुंह मोड़ लिया। धुन के पक्के छोटेलाल ने किसी की फि क्र नहीं की।
दस साल की हाड़ तोड़ मेहनत के बाद छोेटेलाल की मेहनत रंग लाई।  छोटेलाल उत्साह के  साथ बताते हैं कि  अन्ना मवेशियों और पानी के संकट के बीच बगिया लगाना बड़ी  चुनौती थी। परिवार के सदस्यों ने मदद से हाथ खींच लिए थे। वह अकेले लगे रहे।

अब  अमरूद, नीबू, आंवला, मौसमी, करंौंदा, आम, बेलपत्र, जामुन, अनार, सीताफल सहित कई प्रजाति के करीब 700 पौधे फल फूल रहे है। सिंचाई के लिए  हैंडपंप से घड़ों में पानी भरकर इन्हें सिर पर ढोया। छोटेलाल का कहना है कि उद्यान और वन विभाग से  कोई सहयोग नही मिला।
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