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जलस्तर गिरने से ट्यूबवेलों ने दिया जवाब
अमर उजाला ब्यूरो महोबा
Updated Mon, 08 Jun 2015 11:23 PM IST
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पिछले साल बारिश न होने से तालाबाें, बांधों और नदियों के सूख जाने से जल स्तर में तेजी से गिरावट आई है। जिले में छह से आठ फिट तक वाटर लेबल गिरने से जहां दो ट्यूबवेलों ने जवाब दे दिया है, वहीं बीस फीसदी से ज्यादा हैंडपंप ड्राई हो गए हैं। इससे पानी की विकराल समस्या बढ़ती जा रही है।
बुंदेलखंड पठारी क्षेत्र होने के कारण यहां पर ट्यूबवेल सफल नहीं हैं, जिससे जनपद वासियों की प्यास बुझाने के लिए बांधों और चंदेल कालीन सरोवरों से पानी की आपूर्ति के इंतजाम किए गए थे। हालांकि कुछ स्थानों पर ट्यूबवेलों से भी पानी की आपूर्ति की जाती है, लेकिन दिन प्रतिदिन तेजी से घट रहे जलस्तर के कारण इन ट्यूबवेलों ने जवाब दे दिया है। पानी के नीचे खिसकने से ट्यूबवेलों से नाममात्र की आपूर्ति हो रही है। चंदेल शासकों ने दूरदर्शिता के मद्देनजर शहर में चार बड़े- बड़े सरोवर मदन सागर, कीरत सागर, कल्याण और बीजानगर तालाब बनवाए थे। शहर के बीचों बीच बने मदन सागर शहर में और रक्षा अनुसंधान केंद्र में विजय सागर से पानी आपूर्ति की जाती है। शहर में कुछ ट्यूबवेलों के सफल हो जाने से इससे पानी की आपूर्ति शुरू कर दी गई, लेकिन जमीन में काफी नीचे पानी चले जाने से ट़्यूबवेलाें ने जवाब दे दिया है।
गर्मी के मौसम में खुद प्यासा मदन सागर
शहरियों की प्यास बुझाने वाला मदन सागर गर्मी के दिनों में खुद प्यासा है। हालत यह है कि मदन सागर के तट पर बनाए गए इंटेकवेल के स्टेनर से पानी काफी दूर चला गया है, जिससे अब इंटेकवेल तक पानी लाने के लिए मदन सागर के पानी वाले हिस्से पर जल संस्थान नाली बनाकर पानी लाने के लिए प्रयास कर रहा है। गर्मी में मदन सागर सरोवर को खुद पानी की दरकार है।
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प्रदूषित पानी से बीमारियों का खतरा
मदन सागर सरोवर के सूख जाने से तलहटी में बचा पानी कीचड़युक्त हो गया है। इसी पानी की जल संस्थान द्वारा आपूर्ति की जा रही है। पानी की बढ़ती मारामारी के चलते लोग प्रदूषित पानी का ही इस्तेमाल कर रहे हैं। इंटेकवेल के पास जलकुंभी और कीचड़ पटा पड़ा है। इतना ही नहीं इसी सरोवर में जानवर नहाते और गोबर करते है, जिससे पानी और प्रदूषित हो गया है। तेज धूप के चलते तालाब का पानी दिन प्रतिदिन कम होता जा रहा है।
मदन सागर का जल स्तर घटने से पानी की दिक्कत बढ़ी है। पानी स्टेनर से भी दूर चला गया है। जिससे अब तालाब का पानी इंटेकवेल में थोड़ा बहुत आ पाता है। एक सप्ताह बाद गहराई के पानी तक पंपिंग सैट मशीन के पाइप डालकर इंटेकवेल तक पानी लाया जाएगा। जिससे पानी की आपूर्ति बाधित न हो।
एसके वर्मा अवर अभियंता
जल संस्थान महोबा
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बुंदेलखंड पठारी क्षेत्र होने के कारण यहां पर ट्यूबवेल सफल नहीं हैं, जिससे जनपद वासियों की प्यास बुझाने के लिए बांधों और चंदेल कालीन सरोवरों से पानी की आपूर्ति के इंतजाम किए गए थे। हालांकि कुछ स्थानों पर ट्यूबवेलों से भी पानी की आपूर्ति की जाती है, लेकिन दिन प्रतिदिन तेजी से घट रहे जलस्तर के कारण इन ट्यूबवेलों ने जवाब दे दिया है। पानी के नीचे खिसकने से ट्यूबवेलों से नाममात्र की आपूर्ति हो रही है। चंदेल शासकों ने दूरदर्शिता के मद्देनजर शहर में चार बड़े- बड़े सरोवर मदन सागर, कीरत सागर, कल्याण और बीजानगर तालाब बनवाए थे। शहर के बीचों बीच बने मदन सागर शहर में और रक्षा अनुसंधान केंद्र में विजय सागर से पानी आपूर्ति की जाती है। शहर में कुछ ट्यूबवेलों के सफल हो जाने से इससे पानी की आपूर्ति शुरू कर दी गई, लेकिन जमीन में काफी नीचे पानी चले जाने से ट़्यूबवेलाें ने जवाब दे दिया है।
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गर्मी के मौसम में खुद प्यासा मदन सागर
शहरियों की प्यास बुझाने वाला मदन सागर गर्मी के दिनों में खुद प्यासा है। हालत यह है कि मदन सागर के तट पर बनाए गए इंटेकवेल के स्टेनर से पानी काफी दूर चला गया है, जिससे अब इंटेकवेल तक पानी लाने के लिए मदन सागर के पानी वाले हिस्से पर जल संस्थान नाली बनाकर पानी लाने के लिए प्रयास कर रहा है। गर्मी में मदन सागर सरोवर को खुद पानी की दरकार है।
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प्रदूषित पानी से बीमारियों का खतरा
मदन सागर सरोवर के सूख जाने से तलहटी में बचा पानी कीचड़युक्त हो गया है। इसी पानी की जल संस्थान द्वारा आपूर्ति की जा रही है। पानी की बढ़ती मारामारी के चलते लोग प्रदूषित पानी का ही इस्तेमाल कर रहे हैं। इंटेकवेल के पास जलकुंभी और कीचड़ पटा पड़ा है। इतना ही नहीं इसी सरोवर में जानवर नहाते और गोबर करते है, जिससे पानी और प्रदूषित हो गया है। तेज धूप के चलते तालाब का पानी दिन प्रतिदिन कम होता जा रहा है।
मदन सागर का जल स्तर घटने से पानी की दिक्कत बढ़ी है। पानी स्टेनर से भी दूर चला गया है। जिससे अब तालाब का पानी इंटेकवेल में थोड़ा बहुत आ पाता है। एक सप्ताह बाद गहराई के पानी तक पंपिंग सैट मशीन के पाइप डालकर इंटेकवेल तक पानी लाया जाएगा। जिससे पानी की आपूर्ति बाधित न हो।
एसके वर्मा अवर अभियंता
जल संस्थान महोबा