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ठेका सफाईकर्मियों की हड़ताल, गंदगी का अंबार
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महोबा। कोरोना संक्रमण काल में शहर की सफाई व्यवस्था पटरी से उतर गई है। चार माह से डोर-टू-डोर सफाई कर्मचारियों को मानदेय नहीं मिला। इससे नाराज होकर कर्मचारी एक माह से हड़ताल पर हैं। हड़ताल से शहर की सफाई व्यवस्था धड़ाम है। जगह-जगह कूड़े के ढेर व गंदगी का अंबार लगा है।
नगर पालिका की ओर से दो वर्ष पहले ठेका प्रथा पर सफाई कर्मचारियों को लगाया गया। यह कर्मचारी प्रतिदिन डोर-टू-डोर जाकर लोगों के घरों से निकलने वाले कूड़े को सीटी बजाकर एकत्र करते थे। जो शहर को साफ-सुथरा रखते थे। चार माह से मानदेय न मिलने पर कर्मचारियों ने एक अप्रैल से हड़ताल कर रखी थी। कई बार मांग के बाद भी मानदेय का भुगतान नहीं किया गया।
वार्डों के अलावा मुख्य मार्ग में भी कूड़े के ढेर नजर आ रहे हैं, जिससे लोगों में आक्रोश है। ओमप्रकाश, प्रमोद, देवीदीन, आकाश आदि का कहना है कि शहर की सफाई व्यवस्था पटरी नहीं है। कोरोना का संक्रमण लगातार बढ़ रहा है। वार्डों में न तो सही तरीके से सफाई हो रही है और न ही सैनिटाइजेशन। इससे बीमारी फैलने का खतरा बढ़ गया है। उधर, ठेका कंपनी के मैनेजर आशुतोष का कहना है कि पालिका से पैमेंट नहीं हुआ है। इस कारण कर्मचारियों को मानदेय नहीं दिया जा सका।
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नगर पालिका की ओर से दो वर्ष पहले ठेका प्रथा पर सफाई कर्मचारियों को लगाया गया। यह कर्मचारी प्रतिदिन डोर-टू-डोर जाकर लोगों के घरों से निकलने वाले कूड़े को सीटी बजाकर एकत्र करते थे। जो शहर को साफ-सुथरा रखते थे। चार माह से मानदेय न मिलने पर कर्मचारियों ने एक अप्रैल से हड़ताल कर रखी थी। कई बार मांग के बाद भी मानदेय का भुगतान नहीं किया गया।
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वार्डों के अलावा मुख्य मार्ग में भी कूड़े के ढेर नजर आ रहे हैं, जिससे लोगों में आक्रोश है। ओमप्रकाश, प्रमोद, देवीदीन, आकाश आदि का कहना है कि शहर की सफाई व्यवस्था पटरी नहीं है। कोरोना का संक्रमण लगातार बढ़ रहा है। वार्डों में न तो सही तरीके से सफाई हो रही है और न ही सैनिटाइजेशन। इससे बीमारी फैलने का खतरा बढ़ गया है। उधर, ठेका कंपनी के मैनेजर आशुतोष का कहना है कि पालिका से पैमेंट नहीं हुआ है। इस कारण कर्मचारियों को मानदेय नहीं दिया जा सका।
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