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सूखा से तंगहाली में फंसे पशुपालक
अमर उजाला ब्यूरो, महोबा
Updated Mon, 11 Apr 2016 12:34 PM IST
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समस्या बताते पशुपालक घसीटाराम कुशवाहा
- फोटो : अमर उजाला
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सूखा से पशुपालक आर्थिक तंगी में फंसने लगे हैं। फसलें मारी जाने से चारा भूसा का विकराल संकट है। ऐसे में पशुपालक अच्छी नस्ल के पशुओं को कम दामों में बेचने के लिए मजबूर हैं।
जिले में सूखा पड़ा है। किसानों के खुद केे परिवार केे लिए दो जून की रोटी जुटाना मुश्किल हो रहा है। यह मवेशियों के लिए भी चारा भूसा का बंदोबस्त नहीं कर पा रहे हैं। इस मुश्किल में यह मवेशियों को औने पौने दामों में बेचकर रोजगार की तलाश में शहरों की ओर पलायन कर रहे हैं।
पशुपालकों का कहना है कि दूध से चारा भूसा महंगा है। 40 से 50 रुपये प्रति लीटर बिकने वाले दूध से मवेशियों की देखरेख नहीं हो पा रही है। इससे मवेशियों को बेच रहे हैं। सरकार की योजना के तहत मिलने वाला भूसा पर्याप्त साबित नहीं हुआ।
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परथनिया के 70 वर्षीय घसीटा और इनके बेटे रामप्रकाश ने बताया कि छह हेक्टेयर खेती के बाद भी चारा भूसा नहीं है। भूसा आसपास भी ढूंढे नहीं मिल रहा। पेट न भर पाने से दोनों वक्त छह लीटर दूध देने वाली भैंस दो लीटर ही दूध दे रही है। सरकार से भूसा मिलने की उम्मीद थी। यह पूरी नहीं हुई। भूसा चारा के संकट से दो मवेशी बेच दिए हैं। परिवार के गुजारा के लिए मजदूरी करना पड़ रही
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जिले में सूखा पड़ा है। किसानों के खुद केे परिवार केे लिए दो जून की रोटी जुटाना मुश्किल हो रहा है। यह मवेशियों के लिए भी चारा भूसा का बंदोबस्त नहीं कर पा रहे हैं। इस मुश्किल में यह मवेशियों को औने पौने दामों में बेचकर रोजगार की तलाश में शहरों की ओर पलायन कर रहे हैं।
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पशुपालकों का कहना है कि दूध से चारा भूसा महंगा है। 40 से 50 रुपये प्रति लीटर बिकने वाले दूध से मवेशियों की देखरेख नहीं हो पा रही है। इससे मवेशियों को बेच रहे हैं। सरकार की योजना के तहत मिलने वाला भूसा पर्याप्त साबित नहीं हुआ।
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परथनिया के 70 वर्षीय घसीटा और इनके बेटे रामप्रकाश ने बताया कि छह हेक्टेयर खेती के बाद भी चारा भूसा नहीं है। भूसा आसपास भी ढूंढे नहीं मिल रहा। पेट न भर पाने से दोनों वक्त छह लीटर दूध देने वाली भैंस दो लीटर ही दूध दे रही है। सरकार से भूसा मिलने की उम्मीद थी। यह पूरी नहीं हुई। भूसा चारा के संकट से दो मवेशी बेच दिए हैं। परिवार के गुजारा के लिए मजदूरी करना पड़ रही