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Mahoba News: जिले में लगेंगी गौरा पत्थर व धातु शिल्प उद्योग की छह इकाइयां

Sat, 17 Jun 2023 12:02 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sat, 17 Jun 2023 12:02 AM IST
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Six units of Gaura stone and metal craft industry will be set up in the district
महोबा। उद्योग विभाग की एक जनपद-एक उत्पाद योजना अब रंग लाने लगी है। गौरा पत्थर उद्योग व धातु शिल्प उद्योग की इकाई स्थापित किए जाने को लेकर विभाग को छह आवेदन प्राप्त हुए हैं। आवेदन पत्रों के परीक्षण करने के बाद उद्योग लगाने के लिए हरी झंडी देने के साथ ही आवेदकों को बैंक के माध्यम से ऋण दिलाया जाएगा। श्रीनगर क्षेत्र में धातु शिल्प की तीन और चरखारी तहसील क्षेत्र के गौरहारी गांव में तीन औद्योगिक इकाइयां स्थापित होंगी।
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जिले में वित्तीय वर्ष 2023-24 में एक जनपद-एक उत्पाद योजना के तहत उद्योग, सेवा और व्यवसाय क्षेत्र में चयनित गौरा पत्थर व धातु शिल्प को बढ़ावा दिया जा रहा है। उद्योग विभाग ने बेरोजगार नवयुवकोंं, युवतियों और महिलाओं को लाभान्वित करने के लिए ऑनलाइन आवेदन मांगे थे। उद्योग विभाग आवेदकों को इस कारोबार से जुड़ा व्यवसाय शुरू करने के लिए बैंक से ऋण दिलाने में मदद करेगा। साथ ही व्यापार में कुल लागत का 25 फीसदी अनुदान दिया जाएगा। हालांकि, लाभार्थी को व्यवसाय शुरू करने के दौरान पूंजी के रूप में पांच से दस फीसदी अंशदान जमा करना होगा। विभाग ने कुछ शर्त भी तय की हैं। आवेदक की आयु 18 वर्ष से कम नहीं होना चाहिए। पूर्व में आवेदक ने प्रधानमंत्री रोजगार योजना, प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम, मुख्यमंत्री रोजगार योजना या केंद्र व प्रदेश सरकार की किसी भी स्वरोजगार योजना का लाभ न लिया हो। इसका शपथ पत्र भी आवेदक को जमा करना होगा।
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जिले का गौरा पत्थर देशभर में अपनी उत्तम हस्तकला के लिए प्रसिद्ध है। हस्तकला में इस्तेमाल होने वाला गौरा पत्थर सफेद रंग का पत्थर होता है जो खासतौर पर जिले के चरखारी तहसील के गौरहारी गांव में पाया जाता है। गौरा पत्थर का हस्तकला की कला और शिल्प के क्षेत्र में एक अलग पहचान व महत्व है। हस्तकला में इस्तेमाल करने से पहले गौरा पत्थर को छोटे-छोटे टुकड़ों में तोड़ा जाता है, फिर उन टुकड़ों से विभिन्न सजावटी शिल्प वस्तुओं का निर्माण किया जाता है।
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धातु से कारीगरी करने में महोबा के श्रीनगर क्षेत्र के शिल्पकारों की अपनी अलग पहचान है। तांबा, पीतल, जस्ता व लोहे से बनी अनेकों कलाकृतियां देश के विभिन्न भागों में पसंद की जाती हैं। इन कलाकृतियों में धार्मिक महत्त्व की मूर्तियां, सजावटी सामान आदि प्रसिद्ध हैं। यह उद्योग कुटीर उद्योग की सीमा लांघ कर लघु उद्योग की श्रेणी में आ पहुंचा है। इसमें अब पारंपरिक शैली के अतिरिक्त आधुनिक प्रौद्योगिकी का प्रयोग भी हो रहा है। जिस कारण निर्मित उत्पादों की गुणवत्ता व फिनिशिंग विश्वस्तरीय हो गई है।


उपायुक्त उद्योग महेशचंद्र सरोज का कहना है कि एक जनपद-एक उत्पाद योजना के तहत अभी तक छह आवेदन विभाग के पास आए हैं। इनका परीक्षण किया जा रहा है। इसके बाद आवेदकों को योजना का लाभ दिया जाएगा। इस योजना के तहत आवेदन प्रक्रिया साल भर चलती है।
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