फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Mahoba News ›   SIR reunites brothers separated after 28 years

Mahoba News: एसआईआर ने 28 साल बाद बिछड़े भाइयों को मिलाया

Sun, 01 Mar 2026 12:18 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महोबा
संवाद न्यूज एजेंसी, महोबा Updated Sun, 01 Mar 2026 12:18 AM IST
विज्ञापन
SIR reunites brothers separated after 28 years
फोटो 28 एमएएचपी 16 परिचय-बड़ा भाई संतोष मिश्रा। संवाद
श्रीनगर (महोबा)। निर्वाचन आयोग की ओर से चलाया जा रहा मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण का अभियान एक परिवार के लिए होली पर खुशियां लेकर आया। 28 साल पहले घर छोड़कर गया भाई एसआईआर के लिए जरूरी डाटा जुटाने की जद्दोजहद में अब वापस लौट आया है। होली से पहले भाई के घर लौटने पर परिवार में खुशियों का माहौल है।
विज्ञापन






तहसील महोबा की ग्राम पंचायत भंडरा में करीब 28 वर्ष पहले गुनिया मिश्रा के दो बेटे संतोष मिश्रा और आत्मदेव मिश्रा रहते थे। गांव में रोजगार न मिला तो आत्मदेव अपने साथी विजय सोनी के साथ घर से बिना बताए ही चले गए। परिवार के लोगों ने उसकी काफी तलाश की लेकिन कोई पता नहीं लगा। करीब 28 साल का समय गुजरने के बाद भी कोई जानकारी न लगने पर परिजन और रिश्तेदार उसे भूल ही गए थे। अचानक ही आत्मदेव भंडरा गांव स्थित अपने घर पहुंच गए। उन्हें पाकर भाई संतोष मिश्रा की खुशियों का कोई ठिकाना न रहा। संतोष कहते हैं कि भले ही एसआईआर के चलते कुछ लोग परेशान हैं लेकिन उनके घर की खुशियां तो इसके चलते लौट आई हैं। इस बार जबरदस्त तरीके से होली मनाई जाएगी।
विज्ञापन

-------------

बीएलओ ने मांगे दस्तावेज तो घर लौटना पड़ा
आत्मदेव मिश्रा बताते हैं कि वे अपने साथी विजय सोनी के साथ घर से रोजगार की तलाश में गए थे। हरियाणा पहुंचने पर कुछ दिन काम मिला लेकिन वहां से राजस्थान के भरतपुर में एक मंदिर में पूजा-गोसेवा के लिए चले गए। वहीं दोस्त विजय अन्य जगह काम करने लगा। मंदिर में रहते हुए जब मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए वर्ष 2003 की मतदाता सूची का डिटेल मांगा गया तो वह दे न सका। घर से कोई संपर्क नहीं होने के कारण गांव लौटना पड़ा। आत्मदेव का कहना है कि जब वह श्रीनगर से भंडरा गांव जा रहा था, तब ऑटो में किसी ने उसे नहीं पहचाना लेकिन अब परिवार का जो प्यार मिला है, उसे शब्दों में बयां नहीं कर सकता हूं।
विज्ञापन
विज्ञापन

--------------

अचानक आकर पैर छुए तो भी पहचान न सकी
आत्मदेव की उम्र अब करीब 56 और उनके भाई संतोष की उम्र वर्तमान में 72 वर्ष है। संतोष की पत्नी शांति का कहना है कि दोपहर में वे घर अकेली थीं कि तभी आत्मदेव ने आकर उनके पैर छूकर भाभी कहकर संबोधित किया। तब भी कुछ समझ न सकीं लेकिन कुछ ही पल में आत्मदेव को पहचान गईं। उन्हें अपनी आंखों पर विश्वास नहीं हुआ कि जो देवर 28 साल पहले घर छोड़कर गया था, वह आज सामने खड़ा है।

--------------

चाचा को अब वापस न जाने देंगे
संतोष मिश्रा का बेटा अमित आरओ कंपनी में टेक्नीशियन है। अमित ने बताया कि जब उनकी उम्र केवल पांच माह थी, तब चाचा उन्हें छोड़कर चले गए थे। उन्होंने तो चाचा के बारे में केवल माता-पिता से सुना था, देखा कभी नहीं। काम से लौटकर घर पहुंचा तब उन्हें चाचा मिले। अब वे चाचा की सेवा करेंगे और कहीं नहीं जाने देंगे।

फोटो 28 एमएएचपी 16 परिचय-बड़ा भाई संतोष मिश्रा। संवाद

फोटो 28 एमएएचपी 16 परिचय-बड़ा भाई संतोष मिश्रा। संवाद

फोटो 28 एमएएचपी 16 परिचय-बड़ा भाई संतोष मिश्रा। संवाद

फोटो 28 एमएएचपी 16 परिचय-बड़ा भाई संतोष मिश्रा। संवाद

फोटो 28 एमएएचपी 16 परिचय-बड़ा भाई संतोष मिश्रा। संवाद

फोटो 28 एमएएचपी 16 परिचय-बड़ा भाई संतोष मिश्रा। संवाद

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed