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कैसे जीतेंगे जंग, कुपोषण के शिकार 99 फीसद बच्चे निजी अस्पतालों के भरोसे
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महोबा। जिले के 6791 बच्चे कुपोषण का शिकार है। इनको कुपोषण से मुक्त कराने के लिए जिले में पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) भी स्थापित हैं। लेकिन पिछले छह माह में एक फ़ीसदी का भी इलाज नहीं कराया गया है। ऐसे में भला बुंदेलखंड के सबसे पिछड़े जिले में शामिल महोबा कुपोषण की जंग कैसे जीतेगा। जागरुकता की कमी से कुपोषण के शिकार बच्चे एनआरसी नहीं पहुंच पा रहे हैं।
विभागीय कर्मचारी से लेकर अधिकारियों के चलते कुपोषण का दंश झेलने वाले बच्चों के अभिभावक निजी डॉक्टरों के पास इलाज कराने को मजबूर हैं। पिछले छह माह में पोषण पुनर्वास केंद्र पर महज 28 बच्चों को भर्ती करके ही इलाज कराया गया है। अधिकारी कागजी कार्रवाई कर ही अपनी पीठ थपथपा रहे हैं जबकि कुपोषण को दूर करने के लिए जिम्मेदारों द्वारा ठोस प्रयास नहीं किया जा रहा है।
जिले में 881आंगनबाड़ी केंद्र है और इनपर इतनी ही कार्यकर्ता भी कार्यरत है। इन कार्यकर्ताओं से लेकर जिला कार्यक्रम अधिकारी तक बच्चों को कुपोषण से मुक्त कराने की जिम्मेदारी है। लेकिन बीते छह माह में कुपोषण से जंग जीतने के लिए एनआरसी केंद्र में महज 28 बच्चे भर्ती किए गए हैं। जबकि जिले में कुल 6791 बच्चे कुपोषण का शिकार हैं। --------------------------------
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- इनसेट-
इनको निभानी है जिम्मेदारी
कुपोषण के शिकार बच्चों को पोषण पुनर्वास केंद्र तक पहुंचाने के लिए आरबीएसके टीम, एएनएम, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता आशा की भी जिम्मेदारी है कि जो बच्चे कुपोषण का शिकार है उनके अभिभावकों को प्रेरित कर पोषण पुनर्वास केंद्र तक पहुंचाएं।
पोषण पुनर्वास केंद्र के छह माह के आंकड़े
माह भर्ती हुए बच्चे डिस्चार्ज रेफर
मार्च 05 03 01
अप्रैल 03 04 00
मई 02 02 00
जून 10 03 00
जुलाई 09 09 02
अगस्त 09 07 02
वर्जन-
कुपोषित बच्चों को इलाज और पोषण वितरण के लिए बैठक में निर्देश दिए गए हैं। कई बार अभिभावक अस्पताल में रुकना नहीं चाहते हैं जिससे बच्चों इलाज नहीं हो पाता है। कुपोषित बच्चों की संख्या की तुलना में इलाज कराने वालों की संख्या कम हैं, जिसके लिए प्रेरित किया जाएगा।
डॉ. हरिचरण, मुख्य विकास अधिकारी
------------------
कुपोषित बच्चों के परिवारों की काउंसलिंग की जाती है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारी है कि जिन बच्चों को इलाज की आवश्यकता है उन्हें एनआरसी केंद्र तक पहुंचाया जाए। जिन बच्चों को इलाज की आवश्यकता है उन्हे इलाज के लिए भर्ती कराया जाएगा।
हर्षवर्धन, जिला कार्यक्रम अधिकारी
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विभागीय कर्मचारी से लेकर अधिकारियों के चलते कुपोषण का दंश झेलने वाले बच्चों के अभिभावक निजी डॉक्टरों के पास इलाज कराने को मजबूर हैं। पिछले छह माह में पोषण पुनर्वास केंद्र पर महज 28 बच्चों को भर्ती करके ही इलाज कराया गया है। अधिकारी कागजी कार्रवाई कर ही अपनी पीठ थपथपा रहे हैं जबकि कुपोषण को दूर करने के लिए जिम्मेदारों द्वारा ठोस प्रयास नहीं किया जा रहा है।
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जिले में 881आंगनबाड़ी केंद्र है और इनपर इतनी ही कार्यकर्ता भी कार्यरत है। इन कार्यकर्ताओं से लेकर जिला कार्यक्रम अधिकारी तक बच्चों को कुपोषण से मुक्त कराने की जिम्मेदारी है। लेकिन बीते छह माह में कुपोषण से जंग जीतने के लिए एनआरसी केंद्र में महज 28 बच्चे भर्ती किए गए हैं। जबकि जिले में कुल 6791 बच्चे कुपोषण का शिकार हैं। --------------------------------
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इनको निभानी है जिम्मेदारी
कुपोषण के शिकार बच्चों को पोषण पुनर्वास केंद्र तक पहुंचाने के लिए आरबीएसके टीम, एएनएम, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता आशा की भी जिम्मेदारी है कि जो बच्चे कुपोषण का शिकार है उनके अभिभावकों को प्रेरित कर पोषण पुनर्वास केंद्र तक पहुंचाएं।
पोषण पुनर्वास केंद्र के छह माह के आंकड़े
माह भर्ती हुए बच्चे डिस्चार्ज रेफर
मार्च 05 03 01
अप्रैल 03 04 00
मई 02 02 00
जून 10 03 00
जुलाई 09 09 02
अगस्त 09 07 02
वर्जन-
कुपोषित बच्चों को इलाज और पोषण वितरण के लिए बैठक में निर्देश दिए गए हैं। कई बार अभिभावक अस्पताल में रुकना नहीं चाहते हैं जिससे बच्चों इलाज नहीं हो पाता है। कुपोषित बच्चों की संख्या की तुलना में इलाज कराने वालों की संख्या कम हैं, जिसके लिए प्रेरित किया जाएगा।
डॉ. हरिचरण, मुख्य विकास अधिकारी
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कुपोषित बच्चों के परिवारों की काउंसलिंग की जाती है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारी है कि जिन बच्चों को इलाज की आवश्यकता है उन्हें एनआरसी केंद्र तक पहुंचाया जाए। जिन बच्चों को इलाज की आवश्यकता है उन्हे इलाज के लिए भर्ती कराया जाएगा।
हर्षवर्धन, जिला कार्यक्रम अधिकारी