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डूब क्षेत्र की जमीन के मुआवजे के लिए आंदोलन
ब्यूरो/अमर उजाला, महोबा
Updated Mon, 13 Feb 2017 10:23 PM IST
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ग्रामीणों को समझाते एसडीएम व सीओ।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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कोतवाली क्षेत्र के गांव झिरसहेबा के ग्रामीणों द्वारा कबरई बांध के तहत डूब क्षेत्र में आने वाली भूमि के उचित मुआवजे की मांग को लेकर आंदोलन किया जा रहा है। ग्रामीण दो दिन से धरना प्रदर्शन कर रहे है। सोमवार को एसडीएम व सीओ ने सिंचाई विभाग के अधिकारियों के साथ मौके पर पहुंच ग्रामीणों को समझाया, लेकिन ग्रामीण नहीं माने। इसके बाद अधिकारी लौट आए।
गांव झिरसहेबा के तीन दर्जन से अधिक ग्रामीणों ने 11 फरवरी को जिला निर्वाचन अधिकारी अजय कुमार सिंह को पत्र सौंपा। इसमें कहा गया कि डूब क्षेत्र में आने वाली भूमि का सर्किल रेट के हिसाब से मुआवजा दी जाए। साथ ही गांव में मूलभूत सुविधाओं की व्यवस्था कराने की मांग की। रविवार को झिरसहेबा के ग्रामीणों ने मुआवजे की मंाग को लेकर प्रदर्शन किया था।
सोमवार को तीन दर्जन से अधिक ग्रामीण हाईवे से झिरसहेबा गांव के लिए निकले संपर्क मार्ग के पास मतदान बहिष्कार को बैनर लगाकर धरने पर बैठ गए। सूचना मिलते ही उपजिलाधिकारी प्रबुद्घ सिंह, पुलिस क्षेत्राधिकारी सदर जीतेंद्र दुबे सिंचाई विभाग के अधिकारियों के साथ मौके पर पहुंच गए। कहा कि चुनाव बाद उचित मुआवजा दिलाते हुए समस्याओं के निस्तारण किया जाएगा लेकिन ग्रामीण नहीं माने। इससे अफसर बिना किसी निष्कर्ष के वापस लौट आए और ग्रामीण धरने पर डटे रहे।
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गांव झिरसहेबा के तीन दर्जन से अधिक ग्रामीणों ने 11 फरवरी को जिला निर्वाचन अधिकारी अजय कुमार सिंह को पत्र सौंपा। इसमें कहा गया कि डूब क्षेत्र में आने वाली भूमि का सर्किल रेट के हिसाब से मुआवजा दी जाए। साथ ही गांव में मूलभूत सुविधाओं की व्यवस्था कराने की मांग की। रविवार को झिरसहेबा के ग्रामीणों ने मुआवजे की मंाग को लेकर प्रदर्शन किया था।
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सोमवार को तीन दर्जन से अधिक ग्रामीण हाईवे से झिरसहेबा गांव के लिए निकले संपर्क मार्ग के पास मतदान बहिष्कार को बैनर लगाकर धरने पर बैठ गए। सूचना मिलते ही उपजिलाधिकारी प्रबुद्घ सिंह, पुलिस क्षेत्राधिकारी सदर जीतेंद्र दुबे सिंचाई विभाग के अधिकारियों के साथ मौके पर पहुंच गए। कहा कि चुनाव बाद उचित मुआवजा दिलाते हुए समस्याओं के निस्तारण किया जाएगा लेकिन ग्रामीण नहीं माने। इससे अफसर बिना किसी निष्कर्ष के वापस लौट आए और ग्रामीण धरने पर डटे रहे।
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