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हकदार न मिलने पर साढ़े 18 एकड़ जमीन ग्राम की संपत्ति बनी
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महोबा। तहसील कुलपहाड़ के ग्राम अजनर में साढ़े 18 एकड़ से अधिक भूमि के मृतक मालिक के बाद जमीन के असली वारिस की तलाश में 25 से चकबंदी न्यायालय में चल रहे मामले में हकदार न मिलने पर जमीन नवीन परती में दर्ज हो गई। चरखारी उपजिलाधिकारी प्रभारी बंदोबस्ती अधिकारी चकबंदी न्यायालय रमेश कुमार ने गुरुवार को फैसला सुनाते हुए जमीन को नवीन परती में दर्ज करने का आदेश दे दिया है। आदेश बाद अब यह जमीन ग्राम सभा की संपत्ति बन गई।
बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी न्यायालय ने गुरुवार को ग्राम अजनर की मृतक महिला रानीबाई पुत्री प्रेमलाल के नाम दर्ज जमीन के वारिस को लेकर वर्ष 1996 से न्यायालय में चल रहे प्रकरण में अहम निर्णय दिया। लंबे समय से चल रहे मामले में किसी भी दावेदार द्वारा असली हकदार होने का दावा साबित न कर पाने के कारण जमीन को ग्राम पंचायत अजनर में नवीन परती जमीन के रूप में दर्ज करने का आदेश जारी कर दिया। हालाकि 25 साल से न्यायालय में चल रहे मामले में 18 एकड़ से अधिक जमीन को पाने के लिए फर्जी वारिस बनकर यह जमीन बेच दी गई थी। जो बाद में जांच की हकीकत अलग होने पर खारिज हो गई थी।उसके बाद भी कई लोगो ने इस जमीन का बारिश बन कर न्यायालय में दावा भी पेश किया था। वह भी अपना हक साबित ही नहीं कर सके। न्यायालय बंदोबस्ती अधिकारी चकबंदी रमेश कुमार ने बताया की इस जमीन को फर्जी कागजात के सहारे नाम दर्ज करवा कर बिक्री कर दिया गया था। जो सत्यता जांच में सामने आने पर खारिज किया गया। उसके बाद भी जमीन पाने के लिए कई फर्जी दावा भी सामने आए लेकिन मृतका के वारिस साबित कोई नही कर पाया। जमीन का हकदार न मिलने के कारण यह जमीन अब ग्राम समाज की संपत्ति में शामिल हो जाएगी।
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बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी न्यायालय ने गुरुवार को ग्राम अजनर की मृतक महिला रानीबाई पुत्री प्रेमलाल के नाम दर्ज जमीन के वारिस को लेकर वर्ष 1996 से न्यायालय में चल रहे प्रकरण में अहम निर्णय दिया। लंबे समय से चल रहे मामले में किसी भी दावेदार द्वारा असली हकदार होने का दावा साबित न कर पाने के कारण जमीन को ग्राम पंचायत अजनर में नवीन परती जमीन के रूप में दर्ज करने का आदेश जारी कर दिया। हालाकि 25 साल से न्यायालय में चल रहे मामले में 18 एकड़ से अधिक जमीन को पाने के लिए फर्जी वारिस बनकर यह जमीन बेच दी गई थी। जो बाद में जांच की हकीकत अलग होने पर खारिज हो गई थी।उसके बाद भी कई लोगो ने इस जमीन का बारिश बन कर न्यायालय में दावा भी पेश किया था। वह भी अपना हक साबित ही नहीं कर सके। न्यायालय बंदोबस्ती अधिकारी चकबंदी रमेश कुमार ने बताया की इस जमीन को फर्जी कागजात के सहारे नाम दर्ज करवा कर बिक्री कर दिया गया था। जो सत्यता जांच में सामने आने पर खारिज किया गया। उसके बाद भी जमीन पाने के लिए कई फर्जी दावा भी सामने आए लेकिन मृतका के वारिस साबित कोई नही कर पाया। जमीन का हकदार न मिलने के कारण यह जमीन अब ग्राम समाज की संपत्ति में शामिल हो जाएगी।
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