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बुंदेलखंड की विजय पताका फहराई झलकारी ने
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महोबा। शहर के कठकुलवापुरा स्थित संत कबीर आश्रम में स्वतंत्रता संग्राम की प्रथम वीरांगना झलकारी बाई की पूर्व संध्या पर काव्य गोष्ठी का आयोजन लखनलाल चौरसिया की अध्यक्षता में हुआ। गोष्ठी में कवियों ने रचनाएं पेशकर वातावरण वीररस से ओतप्रोत कर दिया।
कवि जीतेंद्र आदित्य ने वाणी वंदना शारदे स्वर भरी साधना दो हमें प्रस्तुत की। उन्होंने रचना में कहा कि इक हिम्मतवाली बेटी का अंदाज बहुत ही न्यारा था, दुर्गादल की वीरांगना ने गोरों को ललकारा था सुनाई। वरिष्ठ कवि हरीश वर्मा ने वीरतापूर्ण रचना बुंदेलखंड की विजय पताका फहराई झलकारी ने, महिला समाज का मान बढ़ाया इस भारतीय नारी ने पढ़ी। कार्यक्रम संचालक डिग्री कॉलेज के प्रवक्ता डॉ. एलसी अनुरागी ने रचना सुनो-सुनो ए दुनिया वालों झलकारी की अमर कहानी, वो झलकारी पूज्य थी इतनी जितना गंगा मां का पानी सुनाई।
इस मौके पर पं. हरिशंकर नायक, दयाशंकर राठौर, आल्हा सम्राट वंश गोपाल यादव, इंद्रजीत सिंह, रघुवीर अनुरागी, राधेश्याम पुरवार, जगदीशचंद्र ने भी रचनाएं प्रस्तुत कीं।
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कवि जीतेंद्र आदित्य ने वाणी वंदना शारदे स्वर भरी साधना दो हमें प्रस्तुत की। उन्होंने रचना में कहा कि इक हिम्मतवाली बेटी का अंदाज बहुत ही न्यारा था, दुर्गादल की वीरांगना ने गोरों को ललकारा था सुनाई। वरिष्ठ कवि हरीश वर्मा ने वीरतापूर्ण रचना बुंदेलखंड की विजय पताका फहराई झलकारी ने, महिला समाज का मान बढ़ाया इस भारतीय नारी ने पढ़ी। कार्यक्रम संचालक डिग्री कॉलेज के प्रवक्ता डॉ. एलसी अनुरागी ने रचना सुनो-सुनो ए दुनिया वालों झलकारी की अमर कहानी, वो झलकारी पूज्य थी इतनी जितना गंगा मां का पानी सुनाई।
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इस मौके पर पं. हरिशंकर नायक, दयाशंकर राठौर, आल्हा सम्राट वंश गोपाल यादव, इंद्रजीत सिंह, रघुवीर अनुरागी, राधेश्याम पुरवार, जगदीशचंद्र ने भी रचनाएं प्रस्तुत कीं।
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