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जर्जर पिलर गिरने से मासूम की मौत, आक्रोशित लोगों ने लगाया जाम
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अजनर (महोबा)। विकास खंड जैतपुर के हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर इंद्रहटा में वैक्सीनेशन के दौरान मुख्य गेट का जर्जर पिलर गिरने से सात वर्षीय बच्चे की दबकर मौत हो गई। घटना से गुस्साएं परिजनों और ग्रामीणों ने सड़क पर जाम लगा दिया। एसडीएम और सीओ ने दोषियों पर कार्रवाई, परिवार को आर्थिक सहायता का भरोसा दिलाया। इस पर करीब एक घंटे बाद जाम खुला। सीएमओ के निर्देश पर गठित तीन सदस्यीय टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच की।
इंद्रहटा गांव निवासी संतोष सेन की पत्नी शीला अपने सात वर्षीय बेटे संगम के साथ गुरुवार को कोरोना की वैक्सीन लगवाने हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर गई थी। मां अंदर कुर्सी पर बैठकर बारी का इंतजार कर रही थी। संगम गेट के पास खड़ा हो गया। इसी दौरान बारिश से गीली गेट की जर्जर दीवार का एक पिलर भरभराकर गिर गया।
मलबे में दबे बच्चे की चीख सुनकर लोग दौड़ पड़े और किसी तरह उसे बाहर निकालकर नौगांव ले गए। डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। घटना से गुस्साए परिजनों और ग्रामीणों ने गांव की मुख्य सड़क पर जाम लगा दिया। स्वास्थ्य विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाया। घटना की सूचना मिलते ही एसडीएम सुथान अब्दुल्लाह और सीओ कुलपहाड़ तेज प्रताप सिंह पुलिस फोर्स के साथ मौके पर पहुंचे।
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अधिकारियों ने जाम लगाए लोगों को समझा बुझाकर शांत कराया और आर्थिक सहायता दिलाने का भरोसा दिया। इसके बाद करीब एक घंटे बाद जाम खुल सका। हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर के मुख्य गेट का पिलर गिरने के मामले को गंभीरता से लेते हुए सीएमओ डॉ. मनोजकांत सिन्हा ने तीन सदस्यीय टीम गठित की है। सीएमओ के निर्देश पर डॉ. जीआर रत्मेले, डॉ. ममता अहिरवार व डॉ. गौरव पटेल ने घटनास्थल पहुंचकर पिलर गिरने के मामले की जांच की। एएसपी आरके गौतम ने बताया कि मामले की जांच कराई जा रही है।
बेटे की मौत से मां बेहाल
वैक्सीनेशन कराने बेटे के साथ अस्पताल गई शीला बेटे की मौत पर बदहवाश हो गई। वह कई बार अचेत हुई। परिवार की महिलाएं बार-बार पानी के छीटें मारकर होश में लाने का प्रयास करती रहीं। पिता संतोष ने बताया कि उसकी तीन पुत्रियां बीना, रीना और रागिनी हैं। दो की शादी हो गई है। बड़ा पुत्र सागर (14) है, जबकि संगम सबसे छोटा बेटा था। एक एकड़ जमीन होने के चलते परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है।
पांच माह पहले डीएम ने किया था निरीक्षण
डीएम सत्येंद्र कुमार ने करीब पांच माह पहले नौ फरवरी को हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर का निरीक्षण किया था। टूटे-फूटे गेटों की मरम्मत के निर्देश दिए थे। निरीक्षण के दौरान एएनएम उमादेवी नदारद मिली थीं। तत्कालीन प्रधान देशराज सिंह ने बताया था कि मरम्मत का पैसा एएनएम के खाते में ट्रांसफर कर दिया गया है, लेकिन मरम्मत का कार्य नहीं कराया गया। ग्रामीणों का आरोप है कि यदि जर्जर गेट की समय से मरम्मत कराई जाती तो यह घटना नहीं होती।
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इंद्रहटा गांव निवासी संतोष सेन की पत्नी शीला अपने सात वर्षीय बेटे संगम के साथ गुरुवार को कोरोना की वैक्सीन लगवाने हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर गई थी। मां अंदर कुर्सी पर बैठकर बारी का इंतजार कर रही थी। संगम गेट के पास खड़ा हो गया। इसी दौरान बारिश से गीली गेट की जर्जर दीवार का एक पिलर भरभराकर गिर गया।
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मलबे में दबे बच्चे की चीख सुनकर लोग दौड़ पड़े और किसी तरह उसे बाहर निकालकर नौगांव ले गए। डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। घटना से गुस्साए परिजनों और ग्रामीणों ने गांव की मुख्य सड़क पर जाम लगा दिया। स्वास्थ्य विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाया। घटना की सूचना मिलते ही एसडीएम सुथान अब्दुल्लाह और सीओ कुलपहाड़ तेज प्रताप सिंह पुलिस फोर्स के साथ मौके पर पहुंचे।
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अधिकारियों ने जाम लगाए लोगों को समझा बुझाकर शांत कराया और आर्थिक सहायता दिलाने का भरोसा दिया। इसके बाद करीब एक घंटे बाद जाम खुल सका। हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर के मुख्य गेट का पिलर गिरने के मामले को गंभीरता से लेते हुए सीएमओ डॉ. मनोजकांत सिन्हा ने तीन सदस्यीय टीम गठित की है। सीएमओ के निर्देश पर डॉ. जीआर रत्मेले, डॉ. ममता अहिरवार व डॉ. गौरव पटेल ने घटनास्थल पहुंचकर पिलर गिरने के मामले की जांच की। एएसपी आरके गौतम ने बताया कि मामले की जांच कराई जा रही है।
बेटे की मौत से मां बेहाल
वैक्सीनेशन कराने बेटे के साथ अस्पताल गई शीला बेटे की मौत पर बदहवाश हो गई। वह कई बार अचेत हुई। परिवार की महिलाएं बार-बार पानी के छीटें मारकर होश में लाने का प्रयास करती रहीं। पिता संतोष ने बताया कि उसकी तीन पुत्रियां बीना, रीना और रागिनी हैं। दो की शादी हो गई है। बड़ा पुत्र सागर (14) है, जबकि संगम सबसे छोटा बेटा था। एक एकड़ जमीन होने के चलते परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है।
पांच माह पहले डीएम ने किया था निरीक्षण
डीएम सत्येंद्र कुमार ने करीब पांच माह पहले नौ फरवरी को हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर का निरीक्षण किया था। टूटे-फूटे गेटों की मरम्मत के निर्देश दिए थे। निरीक्षण के दौरान एएनएम उमादेवी नदारद मिली थीं। तत्कालीन प्रधान देशराज सिंह ने बताया था कि मरम्मत का पैसा एएनएम के खाते में ट्रांसफर कर दिया गया है, लेकिन मरम्मत का कार्य नहीं कराया गया। ग्रामीणों का आरोप है कि यदि जर्जर गेट की समय से मरम्मत कराई जाती तो यह घटना नहीं होती।