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बारिश न होने से अस्सी फीसदी फसल बर्बाद
अमर उजाला ब्यूरो महोबा।
Updated Thu, 10 Sep 2015 12:03 AM IST
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सूखे की मार से इस वर्ष जिले की 80 फीसदी खरीफ की फसल बर्बाद हो गई है। बारिश न होने से फसल सूख रही है। जिससे किसानों का बीज तक निकल पाना मुश्किल लग रहा है। बारिश न होने से फसलों को बचाने के लिए किसान ट्यूबवेलों और कुओं का सहारा ले रहे हैं।
जिले में 215 लाख हेक्टेयर भूमि पर रबी और 21 हजार हेक्टेयर में खरीफ की बुवाई की जाती है। जुलाई माह में अच्छी बारिश होने पर किसानों ने ज्वार, मूंग, उर्द, अरहर, मूंगफली और तिल की बुवाई कर ली थी। जुलाई माह में अंत तक अच्छी बारिश होने से खरीफ की फसल लहलहा रही थी। किसानों को इस साल अच्छी फसल की उम्मीद थी, लेकिन अगस्त माह में बारिश न होने के कारण खरीफ की अस्सी फीसदी फसल सूख गई। सूखा पड़ने से मूंगफली की फसल सूख रही है, किसान फसल को जिंदा रखने के लिए कुओं से सिंचाई कर रहे हैं, लेकिन फसल बचती दिखाई नहीं दे रही है। फसल को जरूरत के हिसाब से पानी न मिलने से रबी की फसल बर्बाद हो गई है। हालात यह है कि लाभ तो दूर की बात खेतों में डाला गया बीज भी निकलना मुश्किल लग रहा है। जिससे एक बार फिर किसानों को कर्ज की चिंता सताने लगी है। बुजुर्गों का कहना है कि खेतों में कांस फूलने लगे तो सूखा पड़ने की संभावना रहती है।
पानी न गिरने से रबी की फसल भी होगी प्र्रभावित
इस साल बारिश न होने के कारण तालाब और कुएं सूख गए हैं। कुओं का जलस्तर तेजी से घट रहा है, जिसके चलते रबी की फसल की जुताई, बुवाई पर भी संकट मंडराने लगा है। गौरतलब है कि अक्टूबर माह से रबी की फसल की बुवाई शुरू हो जाती है, लेकिन खेतों में नमी के बजाय धूल उड़ रही है। ऐसी स्थिति में बिना पलेवा किए जुताई, बुवाई नहीं हो सकती। खेतों में पलेवा करने के लिए कुओं में पानी भी बहुत कम है। इससे किसान रबी की फसल को लेकर खासा चिंतित हैं।
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तेज धूप फसल के लिए बनी मुसीबत
बारिश न होने से मौसम का मिजाज भी बदल गया है। हालत यह है कि दिन में तेज धूप निकलने से जहां जून माह का अहसास हो रहा है, वहीं तेज धूप से दलहनी फसलें भी सूखती जा रही हैं। बारिश के दिनों में तेज धूप बैसाख के महीने का अहसास करा रही है। तेज धूप के चलते लोग सिर पर तौलिया, अंगोछा बांध कर निकलने लगे है। बेमौसम निकल रही तेज धूप खरीफ की फसल को बर्बाद कर रही है।
डेढ़ माह तक बारिश न होने के कारण खरीफ की फसल पर ग्रहण लग गया है। पानी पर आधारित उर्द, मूंग, मूंगफली की फसल पूरी तरह सूख गई है, जिससे किसानों की अस्सी फीसदी खरीफ की फसल का नुकसान हुआ है। यदि जल्द ही बारिश नहीं हुई तो शेष बीस फीसदी फसल बर्बाद हो जाएगी।
वंशीधर
कस्बा खरेला
पिछले साल खरीफ की फसल बारिश न होने से पूरी तरह बर्बाद हो गई थी, इस साल जुलाई में अच्छी बारिश होने के कारण फसल खेतों में लहलहा रही थी, लेकिन अगस्त और सितंबर माह में एक बार भी बारिश न होने से अस्सी से नब्बे फीसदी फसल बर्बाद हो गई है।
रामस्वरुप यादव
भटीपुरा, महोबा
बारिश न होने से खरीफ की फसल काफी प्रभावित हुई है, लेकिन अभी भी बारिश होने की उम्मीद है। पिछले साल की अपेक्षा इस साल आधी भी बारिश नहीं हुई है। तेज धूप फसल को और नुकसान पहुंचा रही है। इस साल अगस्त माह में हुई नाममात्र की बारिश से खरीफ की फसल को कोई लाभ नहीं मिला है। सर्वे कराकर ही खरीफ की फसल के नुकसान के बारे में बताया जा सकता है।
आरपी चौधरी
उपनिदेशक कृषि, महोबा
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जिले में 215 लाख हेक्टेयर भूमि पर रबी और 21 हजार हेक्टेयर में खरीफ की बुवाई की जाती है। जुलाई माह में अच्छी बारिश होने पर किसानों ने ज्वार, मूंग, उर्द, अरहर, मूंगफली और तिल की बुवाई कर ली थी। जुलाई माह में अंत तक अच्छी बारिश होने से खरीफ की फसल लहलहा रही थी। किसानों को इस साल अच्छी फसल की उम्मीद थी, लेकिन अगस्त माह में बारिश न होने के कारण खरीफ की अस्सी फीसदी फसल सूख गई। सूखा पड़ने से मूंगफली की फसल सूख रही है, किसान फसल को जिंदा रखने के लिए कुओं से सिंचाई कर रहे हैं, लेकिन फसल बचती दिखाई नहीं दे रही है। फसल को जरूरत के हिसाब से पानी न मिलने से रबी की फसल बर्बाद हो गई है। हालात यह है कि लाभ तो दूर की बात खेतों में डाला गया बीज भी निकलना मुश्किल लग रहा है। जिससे एक बार फिर किसानों को कर्ज की चिंता सताने लगी है। बुजुर्गों का कहना है कि खेतों में कांस फूलने लगे तो सूखा पड़ने की संभावना रहती है।
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पानी न गिरने से रबी की फसल भी होगी प्र्रभावित
इस साल बारिश न होने के कारण तालाब और कुएं सूख गए हैं। कुओं का जलस्तर तेजी से घट रहा है, जिसके चलते रबी की फसल की जुताई, बुवाई पर भी संकट मंडराने लगा है। गौरतलब है कि अक्टूबर माह से रबी की फसल की बुवाई शुरू हो जाती है, लेकिन खेतों में नमी के बजाय धूल उड़ रही है। ऐसी स्थिति में बिना पलेवा किए जुताई, बुवाई नहीं हो सकती। खेतों में पलेवा करने के लिए कुओं में पानी भी बहुत कम है। इससे किसान रबी की फसल को लेकर खासा चिंतित हैं।
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तेज धूप फसल के लिए बनी मुसीबत
बारिश न होने से मौसम का मिजाज भी बदल गया है। हालत यह है कि दिन में तेज धूप निकलने से जहां जून माह का अहसास हो रहा है, वहीं तेज धूप से दलहनी फसलें भी सूखती जा रही हैं। बारिश के दिनों में तेज धूप बैसाख के महीने का अहसास करा रही है। तेज धूप के चलते लोग सिर पर तौलिया, अंगोछा बांध कर निकलने लगे है। बेमौसम निकल रही तेज धूप खरीफ की फसल को बर्बाद कर रही है।
डेढ़ माह तक बारिश न होने के कारण खरीफ की फसल पर ग्रहण लग गया है। पानी पर आधारित उर्द, मूंग, मूंगफली की फसल पूरी तरह सूख गई है, जिससे किसानों की अस्सी फीसदी खरीफ की फसल का नुकसान हुआ है। यदि जल्द ही बारिश नहीं हुई तो शेष बीस फीसदी फसल बर्बाद हो जाएगी।
वंशीधर
कस्बा खरेला
पिछले साल खरीफ की फसल बारिश न होने से पूरी तरह बर्बाद हो गई थी, इस साल जुलाई में अच्छी बारिश होने के कारण फसल खेतों में लहलहा रही थी, लेकिन अगस्त और सितंबर माह में एक बार भी बारिश न होने से अस्सी से नब्बे फीसदी फसल बर्बाद हो गई है।
रामस्वरुप यादव
भटीपुरा, महोबा
बारिश न होने से खरीफ की फसल काफी प्रभावित हुई है, लेकिन अभी भी बारिश होने की उम्मीद है। पिछले साल की अपेक्षा इस साल आधी भी बारिश नहीं हुई है। तेज धूप फसल को और नुकसान पहुंचा रही है। इस साल अगस्त माह में हुई नाममात्र की बारिश से खरीफ की फसल को कोई लाभ नहीं मिला है। सर्वे कराकर ही खरीफ की फसल के नुकसान के बारे में बताया जा सकता है।
आरपी चौधरी
उपनिदेशक कृषि, महोबा