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डीएफओ ने विशेषज्ञों के साथ दुर्लभ कल्पवृक्ष का किया निरीक्षण
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महोबा। दुर्लभ कल्पवृक्ष की दयनीय स्थिति पर अमर उजाला ने यह खबर प्रमुखता से प्रकाशित की थी। वन विभाग ने न केवल कल्पवृक्ष की सुध ली, बल्कि डीएफओ रामजी राय ने पूर्व वैज्ञानिक डॉ. रामसेवक चौरसिया के साथ ग्राम सिचौरा पहुंचकर कल्पवृक्ष का स्थलीय निरीक्षण किया। बुजुर्गों से इसकी जानकारी ली और उसे बचाने की कवायद तेज कर दी है।
विकासखंड कबरई के ग्राम सिचौरा में दुर्लभ वृक्ष की दयनीय हालत के बावत अमर उजाला ने 27 नवंबर को खबर प्रमुखता से छापी थी। इस पर अधिकारियों ने कल्पवृक्ष की सुध ली और शनिवार को डीएफओ (जिला वन अधिकारी) ने ग्राम सिचौरा पहुंचकर दुर्लभ कल्पवृक्ष को बारीकी से देखा। जनश्रुति के अनुसार यह वृक्ष दो हजार वर्ष पुराना है। विशेषज्ञों ने भी माना कि यह कल्पवृक्ष देश के उन गिने चुने दुर्लभ वृक्षों में है, जिनकी आयु डेढ़ से दो हजार वर्ष है। इसके दो तने हैं, जिनका व्यास करीब 13-13 मीटर है।
एक तने में फंगस लग गया है। इसमें फफूंद नाशक दवा का लेपन किया जाएगा व उसमें फेवीकोल मिलाकर लकड़ी का बुरादा भरा जाएगा। वन अधिकारी ने बताया कि पानी से बचाने के लिए कल्पवृक्ष के ऊपर सीमेंटिड प्लास्टर भी करना होगा। जुड़वां डालों के भार को सहारा देने के लिए लोहे के दो गार्डर भी लगाने होंगे। एक बोर्ड लगाकर कल्पवृक्ष के महत्व के बारे में भी बताया जाएगा। पूरी रिपोर्ट डीएम अवधेश कुमार तिवारी को सौंप उनसे सिचौरा चलने का आग्रह करेंगे। राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान के पूर्व प्रधान वैज्ञानिक डॉ. रामसेवक चौरसिया ने बताया कि कुछ वर्ष पूर्व प्रयागराज स्थित भारतीय वानस्पतिक सर्वेक्षण विभाग (बीएसआई) की टीम भी यहां आई थी, लेकिन कल्पवृक्ष के संरक्षण पर कुछ हुआ नहीं। अब पहल शुरू हुई है।
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विकासखंड कबरई के ग्राम सिचौरा में दुर्लभ वृक्ष की दयनीय हालत के बावत अमर उजाला ने 27 नवंबर को खबर प्रमुखता से छापी थी। इस पर अधिकारियों ने कल्पवृक्ष की सुध ली और शनिवार को डीएफओ (जिला वन अधिकारी) ने ग्राम सिचौरा पहुंचकर दुर्लभ कल्पवृक्ष को बारीकी से देखा। जनश्रुति के अनुसार यह वृक्ष दो हजार वर्ष पुराना है। विशेषज्ञों ने भी माना कि यह कल्पवृक्ष देश के उन गिने चुने दुर्लभ वृक्षों में है, जिनकी आयु डेढ़ से दो हजार वर्ष है। इसके दो तने हैं, जिनका व्यास करीब 13-13 मीटर है।
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एक तने में फंगस लग गया है। इसमें फफूंद नाशक दवा का लेपन किया जाएगा व उसमें फेवीकोल मिलाकर लकड़ी का बुरादा भरा जाएगा। वन अधिकारी ने बताया कि पानी से बचाने के लिए कल्पवृक्ष के ऊपर सीमेंटिड प्लास्टर भी करना होगा। जुड़वां डालों के भार को सहारा देने के लिए लोहे के दो गार्डर भी लगाने होंगे। एक बोर्ड लगाकर कल्पवृक्ष के महत्व के बारे में भी बताया जाएगा। पूरी रिपोर्ट डीएम अवधेश कुमार तिवारी को सौंप उनसे सिचौरा चलने का आग्रह करेंगे। राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान के पूर्व प्रधान वैज्ञानिक डॉ. रामसेवक चौरसिया ने बताया कि कुछ वर्ष पूर्व प्रयागराज स्थित भारतीय वानस्पतिक सर्वेक्षण विभाग (बीएसआई) की टीम भी यहां आई थी, लेकिन कल्पवृक्ष के संरक्षण पर कुछ हुआ नहीं। अब पहल शुरू हुई है।
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