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Mahoba News: नदियों की बालू के स्थान पर एम सैंड के प्रयोग की मांग

Tue, 27 Jun 2023 11:28 PM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महोबा
संवाद न्यूज एजेंसी, महोबा Updated Tue, 27 Jun 2023 11:28 PM IST
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Demand for use of M sand in place of river sand
कबरई (महोबा)। राजस्थान, कर्नाटक, तेलंगाना व तमिलनाडु की तर्ज पर अब यूपी में भी बालू के विकल्प के रूप में निर्मित रेत (एम सैंड) का उपयोग किए जाने की मांग तेज हो गई है। इसको लेकर खनन एवं क्रशर यूनियन ने मुख्यमंत्री व प्रमुख सचिव को पत्र भेजा है। जिसमें प्रदेश में चल रहे सभी शासकीय निर्माण व विकास कार्यों में नदियों की बालू के स्थान पर पहाड़ खनन क्षेत्रों के अवशिष्ट से निर्मित एम सैंड के प्रयोग की मांग की गई है।
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यूनियन पदाधिकारी बालकिशोर, देवेंद्र मिश्र, प्रणव त्रिपाठी, रूपेंद्र सिंह, मनोज जैन आदि ने कहा है कि रिवर सैंड (नदी की बालू) के स्थान पर ऐम सैंड के प्रयोग किए जाने को अनिवार्य कर न सिर्फ पर्यावरण को बचाया जा सकता है बल्कि इससे नदियों और जल जंतुओं की भी रक्षा की जा सकती है। बताया कि लगातार नदियों की बालू का खनन करने से नदियों की धाराओं ने अपनी दिशा बदल दी है। वहीं जल जंतुओं के जीवन पर भी संकट बढ़ता जा रहा है।
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बताया कि उच्चतम न्यायालय ने भी वर्ष 2012 में इस पर चिंता व्यक्त की थी। नदी तल की बालू के स्थान पर विकल्प के रूप में एम सैंड का प्रयोग पूरी तरह से मानक के अनुरूप भी है। प्रदेश के भू-तत्व व खनिकर्म विभाग ने जिले में एम सैंड के निर्माण के लिए कच्चे माल के रूप में पहाड़ खनन क्षेत्रों में पड़े अवशिष्ट के नीलामी की ई -टेंडरिंग प्रक्रिया शुरू की है लेकिन एम सैंड के प्रयोग के लिए शासकीय निर्माण और विकास कार्यों में अनिवार्यता का आदेश जारी नहीं किया गया है। जिससे व्यापारी एम सैंड प्लांट स्थापित करने को लेकर दुविधा में है जबकि राजस्थान, कर्नाटक, तेलंगाना व तमिलनाडु में बालू के विकल्प के रूप में एम सैंड का उपयोग पहले से ही किया जा रहा है।
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इंसेट
ये होती है एम सैंड कबरई।



एम सैंड कृतिम रेत है। जो बड़े कठोर पत्थरों, मुख्य रूप से चट्टानों या ग्रेनाइट को बारीक कणों से निर्मित किया जाता है। जिसे बाद में धोया जाता है और बारीक वर्गीकृत किया जाता है। इसका व्यापक रूप से निर्माण कार्यों में नदी की रेत के विकल्प के रूप में उपयोग किया जाता है।
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