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महोबाः ये स्कूली वाहन बच्चों के लिए बने हैं खतरा
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सीमा से अधिक बच्चों को भरकर ले जाती स्कूली वैन।
- फोटो : MAHOBA
महोबा। अनफिट और जर्जर स्कूली वाहन बच्चों के लिए खतरा बने हैं। 90 स्कूली वाहन बिना फिटनेस के ही सड़कों पर फर्राटा भर रहे हैं।
जिले के महोबा, चरखारी, कुलपहाड़, कबरई, बेलाताल, पनवाड़ी, श्रीनगर, खन्ना, अजनर, महोबकंठ, खरेला, ग्योड़ी में संचालित स्कूलों में बच्चों को लाने ले जाने के लिए वाहन लगाए गए हैं। स्कूली वाहनों की जांच के लिए माह अप्रैल में अभियान चलाया गया। पंजीकृत 214 वाहनों में से 90 वाहन बिना फिटनेस के पाए गए थे। कई बार नोटिस भेजा गया लेकिन वाहन संचालकों ने फिटनेस नहीं कराई। एक-एक वैन में दस से 15 बच्चों को बैठाया जाता है। बिना एआरटीओ की अनुमति के कई वैन में एलपीजी व सीएनजी किट लगवाई गईं हैं।
अभिभावन राम प्रताप का कहना है कि स्कूल से बच्चा जब घर वापस आ जाता है, तभी दिल को सुकून मिलता है। तौसीब अंसारी ने कहा कि कई स्कूलों में खुद के वाहन लगे हैं लेकिन आने-जाने का किराया महंगा होने के चलते बच्चों को बजट के अनुसार ई-रिक्शा से भेजते हैं। बिना नियमों के दौड़ते स्कूली वाहनों पर रोक जरूरी है। ताकि बच्चे सही सलामत घर पहुंच सके।
नियमों की अनदेखी करने वाले वाहन स्वामी पर कार्रवाई की जाती है। मानक व सुरक्षा पर कोई समझौता नहीं किया जाता है। अभियान चलाकर स्कूली वाहनों की जांच कराई जाएगी।
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-सुरेश कुमार, सहायक परिवहन अधिकारी
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जिले के महोबा, चरखारी, कुलपहाड़, कबरई, बेलाताल, पनवाड़ी, श्रीनगर, खन्ना, अजनर, महोबकंठ, खरेला, ग्योड़ी में संचालित स्कूलों में बच्चों को लाने ले जाने के लिए वाहन लगाए गए हैं। स्कूली वाहनों की जांच के लिए माह अप्रैल में अभियान चलाया गया। पंजीकृत 214 वाहनों में से 90 वाहन बिना फिटनेस के पाए गए थे। कई बार नोटिस भेजा गया लेकिन वाहन संचालकों ने फिटनेस नहीं कराई। एक-एक वैन में दस से 15 बच्चों को बैठाया जाता है। बिना एआरटीओ की अनुमति के कई वैन में एलपीजी व सीएनजी किट लगवाई गईं हैं।
अभिभावन राम प्रताप का कहना है कि स्कूल से बच्चा जब घर वापस आ जाता है, तभी दिल को सुकून मिलता है। तौसीब अंसारी ने कहा कि कई स्कूलों में खुद के वाहन लगे हैं लेकिन आने-जाने का किराया महंगा होने के चलते बच्चों को बजट के अनुसार ई-रिक्शा से भेजते हैं। बिना नियमों के दौड़ते स्कूली वाहनों पर रोक जरूरी है। ताकि बच्चे सही सलामत घर पहुंच सके।
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नियमों की अनदेखी करने वाले वाहन स्वामी पर कार्रवाई की जाती है। मानक व सुरक्षा पर कोई समझौता नहीं किया जाता है। अभियान चलाकर स्कूली वाहनों की जांच कराई जाएगी।
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-सुरेश कुमार, सहायक परिवहन अधिकारी