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गौशाला की हालत खराब

Sun, 07 Aug 2016 10:52 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, महोबा
अमर उजाला ब्यूरो, महोबा Updated Sun, 07 Aug 2016 10:52 PM IST
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Cowshed in a mess
गौशाला में बंधे बछड़े। - फोटो : अमर उजाला
शहर में रामकुंड के समीप एक दशक से संचालित गौशाला की हालत बेहद खराब है। सरकारी मदद के लिए समाजसेवियों ने कई बार मुख्यमंत्री को पत्र भेजे लेकिन कोई सहायता नहीं मिली। शहर के दर्जनों की संख्या में समाजसेवी गोरक्षा के लिए प्रतिमाह सहायता राशि जमा करते हैं। लेकिन इतना काफी नहीं है। उधर, रविवार को गौशाला में हकीकत परखने गई ‘अमर
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उजाला’ टीम को महज आधा दर्जन बछड़े ही गौशाला में मिले, मौके पर एक भी गाय नहीं दिखी। जानकारी करने पर गायों के चरने जाने की बात बताई गई। गौशाला के प्रबंधक शिवप्रसाद चौबे ने बताया कि गौशाला में इस समय 200 गाय है। जो सुबह चरने जाती हैं। सरकारी मदद कोई नहीं है। मार्च माह में एक लाख दो हजार, अप्रैल में एक लाख 32 हजार, मई में एक लाख
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89 हजार और जून एक लाख 15 हजार रुपये चंदा एकत्र किया गया। इस पैसे को गायों के खानपान पर खर्च किया गया। गौशाला के सहयोगी विक्रम यादव, भारत सिंह यादव आदि ने बताया कि समाजसेवियों के सहयोग से गौशाला का संचालन किया जा रहा है। सरकारी मदद मिले तो सुविधा बेहतर हो सकती हैं। गौशाला पानी पीने के लिए चरही व गायों के ठहरने के लिए एक पक्का टीन शेड है।
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छह माह से नहीं गया कोई डाक्टर
गौशाला में कहने को तो 200 गाय हैं, लेकिन इनकी देखभाल व इलाज के लिए छह माह से कोई पशु चिकित्सक नहीं पहुंचा। सप्ताह में एक बार गायों के परीक्षण का प्रावधान है। इलाज के अभाव में रविवार को ही एक गाय की मौत हो गई। बीते एक माह से गाय बीमार चल रही थी।
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