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राशन कार्डों का कंप्यूटराइजेशन बना मुसीबत

Sun, 01 Mar 2015 11:28 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो महोबा
अमर उजाला ब्यूरो महोबा Updated Sun, 01 Mar 2015 11:28 PM IST
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Computerization of ration cards making trouble
मालूम हो कि एक साल पहले आंगनबाड़ी कार्यकत्रियाें, शिक्षामित्राें और टीचरों को लगाकर डोर टू डोर सर्वे कराने के बाद कार्ड धारकों के फार्म भरे गए। इसके बाद कोटेदारों के यहां कार्डधारकों ने फार्म भरकर जमा किए। इसके उपरांत कंप्यूटर में फीड करने के लिए पहले राशन कार्ड और वोटर कार्ड लेने के बाद फीडिंग हुई। फिर बैंक खाता और मोबाइल नंबर लेकर फीडिंग कराई गई। इसके बावजूद इसके फीडिंग की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है। नतीजतन राशन कार्ड ऑनलाइन कराने की जिम्मेदारी अब उपभोक्ताओं को सौंप दी गई है। जिससे ज्यादातर उपभोक्ताओं के सूची में नाम न होने के कारण वह कैफे में जाकर फीडिंग करा रहे हैं।
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जिले में 2.46 लाख राशन कार्डों के सापेक्ष 2.44 लाख राशन कार्डों की फीडिंग हो चुकी है। लेकिन फीडिंग में गलतियां होने के कारण कंप्यूटर ने फार्म रिजेक्ट कर दिए हैं। जिससे तमाम राशनकार्ड धारक अब स्वयं कंप्यूटर से ऑनलाइन कराने के लिए मशक्कत कर रहे हैं। एक साल से चल रही कंप्यूटराइज्ड राशन कार्ड वितरण की प्रक्रिया कार्ड धारकों के लिए मुसीबत बन गई है।
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कुपोषित परिवारों को मिलेगा 20 किलो गेहूं
जिले में कुपोषण से मुक्ति दिलाने के लिए गांव-गांव में चलाए जा रहे ग्राम स्वास्थ्य पोषण योजना के तहत गांवाें में कुपोषित परिवारों को 20-20 किलो गेहूं राशन की दुकानों से दिलाए जाने के जिला पूर्ति अधिकारी को निर्देश दिए हैं। जिस पर अमल भी शुरू हो गया है।
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खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत अलग-अलग टीमें लगाकर सर्वे कराया जा रहा है कि कौन पात्र है और कौन अपात्र। शहरी क्षेत्राें में 64 फीसदी और ग्रामीण क्षेत्राें में 80 फीसदी लोगों को खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत लाभ दिया जाएगा। अंत्योदय कार्ड धारकाें को स्वत: पात्राें में शामिल कर लिया गया है। चार पहिया वाहन मालिक, साढ़े सात एकड़ जमीन और दो लाख से अधिक वार्षिक आय वालों व आयकर रिटर्न भरने वालों को अपात्रों की श्रेणी में रखा गया है।
 कमलेश गुप्ता, जिला पूर्ति अधिकारी।
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