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Mahoba News: रसायन से पके केलों से हो सकती हैं आंत की बीमारियां

Tue, 30 Sep 2025 12:26 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महोबा
संवाद न्यूज एजेंसी, महोबा Updated Tue, 30 Sep 2025 12:26 AM IST
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Bananas ripened with chemicals can cause intestinal diseases
फोटो 29 एमएएचपी 01 परिचय-बाजार में ठेले पर रखे केले। संवाद
महोबा। बाजार में बिक रहे रसायन से पके केले आपकी सेहत बिगाड़ सकते हैं। इससे आंखों की रोशनी पर फर्क पड़ने के साथ आंत की बीमारियां जैसी गंभीर समस्या हो सकती है। ठेलों पर रखे केले के नीचे का हिस्सा पीला फिर हल्का हरा व ऊपर से गहरा हरा दिखाई दे है तो समझे कि वह रसायन से पकाया गया है।
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जिला अस्पताल की ओपीडी खुलते ही मरीजों और तीमारदारों की भीड़ जुट रही है। पर्चा बनवाने से लेकर दवाएं लेने के लिए घंटों लोगों को अपनी बारी का इंतजार करना पड़ रहा है। बदलते मौसम में डायरिया, खांसी, बुखार, पेटदर्द आदि के मरीजों के साथ रसायन से पके केले खाने से हो रही बीमारियों से भी ग्रसित लोग भी जिला अस्पताल पहुंच रहे हैं। स्वास्थ्यकर्मियों के अनुसार प्रतिदिन 40 से 50 मरीज होम्योपैथी कक्ष में दवा लेने आते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि कारोबारी कैल्शियम कार्बाइड के घोल में केले को डुबाकर रख देते हैं जो सात से आठ घंटे में पीला हो जाता है। कैल्शियम कार्बाइड कार्सिनोजेनिक होता है, जो कैंसर का कारक है। ऐसे केलों का सेवन करने से प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है। डिहाइड्रेशन, आंत की बीमारियां, डायरिया, पेप्टिक अल्सर जैसी समस्या का सामना करना पड़ सकता है।
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कार्बाइड से पके केले को ऐसे पहचानें
महोबा। प्राकृतिक तरीके से पके केले पर हल्के भूरे व काले रंग के धब्बे होते हैं। खाने में ये मीठे होते हैं। इनका छिलका गहरा पीला और दागदार होता है, साथ ही पतला होता है। ऐसे केलों का डंठल काला दिखाई देता है। वहीं, कार्बाइड या रसायन आदि से पके हुए केले एकदम प्लेन और हल्के पीले रंग के होते हैं। इसका छिलका मोटा होता है। ऊपर से डंठल हरा दिखाई देता है।
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रसायन से पके केले आदि फल खाने से मुंह में छाले हो जाते हैं। फलों का स्वाभाविक स्वाद भी खत्म हो जाता है। प्रतिदिन 40 से 50 मरीज मुंह में छाले, पेप्टिक अल्सर, डिहाइड्रेशन आदि शिकायतें लेकर आ रहे है। यह रसायनयुक्त फलों के खाने से हो रहा है। -डॉ. नीलम, होम्योपैथिक चिकित्सक, जिला अस्पताल महोबा।
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