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Mahoba News: बस... बेबस होकर देखते ही रह गए मौत का मंजर
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महोबा। दिल्ली से महोबा आ रही स्लीपर बस की दुर्घटना की खबर जैसे ही महोबा पहुंची तो लोग सकते में आ गए। बस के अचानक आग के लपटों से घिर जाने के बाद कुछ भाग्यशाली लोग सुरक्षित बच गए। ग्रेटर नोएडा प्रशासन ने एक टूरिस्ट गाड़ी पर 15 लोगों को महोबा पहुंचाया। बृहस्पतिवार को सुरक्षित बचे सभी यात्री अपने घर पहुंचे। उनके चेहरे पर अपनों तक पहुंचने की खुशी से ज्यादा हादसे की भयावह तस्वीर और आंखों में खौफनाक मंजर दिख रहा था। इन यात्रियों ने जो आपबीती सुनाई, वह व्यवस्था की खामियों को उजागर करने के साथ ही घटना की गंभीरता को बयां कर रही है।
फोटो 24 एमएएचपी 12 परिचय-रविंद्र राजपूत। संवाद
तेज आवाज के साथ आग की लपटों से घिर गई बस
शहर कोतवाली के जुझार गांव निवासी रविंद्र राजपूत मुख्यालय में ऑटोमोबाइल शॉप चलाते हैं। उनका भतीजा प्रशांत दिल्ली में पढ़ता है। रविंद्र अपने व्यापार के सिलसिले में दिल्ली गए और भतीजे से मिलकर रात में परी चौक से सवार हुए। रविंद्र बताते हैं कि वे सीट पर जाने के बजाय केबिन में ही बैठ गए। कुछ दूर चलने पर बस में इंजन के नीचे तेज धमाके की आवाज आई और आग की लपटें निकलने लगीं। जैसे ही बस रुकी वे कूदकर बाहर निकले। कुछ ही देर में कई लोग बाहर कूदे लेकिन अंदर सो रहे लोग बाहर नहीं निकल सके। पुलिस तो तुरंत आ गई थी लेकिन फायर ब्रिगेड करीब 45 मिनट बाद आई। इसलिए आग ने विकराल रूप ले लिया, जिसे बुझाने में चार घंटे का समय लग गया।
फोटो 24 एमएएचपी 13 परिचय-माता-पिता के बीच घर पहुंच मौके का मंजर बताता मानव द्विवेदी। संवाद
माता-पिता तो मिल गए लेकिन आंखों से वो मंजर नहीं गया
कस्बा कबरई निवासी मानव द्विवेदी दिल्ली से बीटेक कर रहे हैं। वे अपने परिवार से मिलने के लिए परी चौक से इस बस में सवार हुए। मानस के अनुसार वे अपनी स्लीपर सीट में बैठे थे। तभी कंडक्टर ने चिल्लाकर बस खाली करने के लिए कहा। लोगों की भीड़ के बीच वे भी बाहर निकले। लैपटॉप, मोबाइल, बैग आदि बस में ही छूट गए। कुछ ही देर में बस आग की लपटों में घिर गई। लोग मदद करना तो चाह रहे थे लेकिन कोई उपाय नहीं सूझ रहा था। पीछे से आईं कुछ बसों के स्टाफ ने कांच तोड़कर लोगों को निकालने की कोशिश की लेकिन कोई खास सफलता नहीं मिल सकी। वो मंजर आंखों से ओझल नहीं हो रहा है। मानव बताते हैं कि उन्हें अंदेशा था कि घटना की जानकारी मिलने पर मां-पिता घबरा जाएंगे इसलिए केवल भाई को सूचना दी। बृहस्पतिवार को जब घर पहुंचकर मां को जानकारी दी तो उन्होंने सीने से लगा लिया।
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न इमरजेंसी गेट खुला और न ही तोड़ पाए कांच
शहर कोतवाली के मामना निवासी अंकित राजपूत की लवकुशनगर में कपड़े की दुकान है। वे खरीदारी करने के लिए दिल्ली गए थे। लौटते समय बस में सवार हुए थे। लोगों का शोर सुनकर वे भी बाहर की ओर भागे, तो देखा कि बस के गेट के पास ही कई लोग गिर गए थे। उनके ऊपर से लोग निकल रहे थे। इसी बीच गेट के पास भी आग की लपटें आ गईं तो लोगों को खींचकर दूर किया गया। इमरजेंसी गेट नहीं खुला और न ही सीट के पास कांच को तोड़ने के लिए हथौड़ा रखा था।
फोटो 24 एमएएचपी 14 परिचय-विकास कुमार। संवाद
मानव कंकाल देखकर दहल उठा दिल
कस्बा कुलपहाड़ निवासी विकास कुमार बताते हैं कि वह कस्बे में जूता-चप्पल के व्यापार करते हैं। वह दिल्ली से बस में सवार हुए अचानक एक घंटे बाद बस रुकी और अंदर की ओर धुआं भरने लगा। सभी लोग सामान बस में ही छोड़ नीचे कूद गए। फायर ब्रिगेड की चार गाड़ियों ने मिलकर आग पर काबू पाया लेकिन जब तक बस पूरी तरीके से जल चुकी थी। रेस्क्यू ऑपरेशन करने वालों ने बस के अंदर से कंकाल निकाले। जिन्हें देखकर उनका दिल दहल उठा।
फोटो 24 एमएएचपी 15 परिचय-सुनील सोनी। संवाद
सिलिंडर से तोड़ा कांच और बचाई जान
कुलपहाड़ तहसील के सुगिरा गांव निवासी सुनील सोनी दुकान का सामान लेने दिल्ली गए थे। वहां से लौटने के लिए बस पकड़ी। उन्होंने बताया कि जब उनकी नींद खुली तब बस में अफरा-तफरी मची हुई थी। इमरजेंसी गेट नहीं खुला और पीछे का कांच नहीं टूटा। तब राठ के एक व्यक्ति ने आग बुझाने वाले सिलिंडर से साइड के कांच तोड़े। इससे धुएं में कमी आई और लोग कूदकर बाहर निकले। पास में एयरपोर्ट होने के बाद भी आग बुझाने के पर्याप्त इंतजाम नहीं हो सके।
फोटो 24 एमएएचपी 16 परिचय-प्रवेश कुमार। संवाद
इतने डर गए कि दोबारा बस में नहीं बैठे
थाना श्रीनगर के हिलुआ गांव निवासी प्रवेश कुमार ग्रेटर नोएडा में रहकर प्रॉपर्टी का काम करते हैं। वे अपने घर आने के लिए परी चौक से बस में सवार हुए थे। आग लगते ही लोग इधर-उधर भागने लगे। रेस्क्यू टीम देर में आई तब तक बस में कई लोग जिंदा जल गए थे। घटना के बाद वे इतने डर गए कि महोबा जाने वाले यात्रियों के लिए प्रशासन ने जो बस भेजी, वे उसमें भी नहीं बैठे और यात्रा कैंसिल कर दी। घटना का मंजर उनकी आंखों के सामने अभी भी दिख रहा है।
फोटो 24 एमएएचपी 17 परिचय-गोकुल। संवाद
बैग छूटा पर जान बच गई, बस यही काफी है
कुलपहाड़ के लारपुर गांव निवासी गोकुल भी इसी बस में सवार थे। उन्होंने बताया कि ड्राइवर ने उन्हें और पांच अन्य यात्रियों को केबिन में बैठाकर रुपये ले लिए और कुछ देर बाद टिकट देने की बात कही। कुछ देर बाद वे खाली सीट में चले गए। जब आग लगी तो कुछ लोगों ने कांच तोड़ दिए थे। उससे नीचे कूदकर ही जान बचाई। उसे हल्की चोट लगी। बैग में करीब 50 हजार रुपये रखे थे। वे बस में ही रह गए। उसका अफसोस तो है लेकिन खुशी भी है कि सुरक्षित बच गए।
फोटो 24 एमएएचपी 18 परिचय-मुकेश गोस्वामी। संवाद
धुआं भरने के कारण बेहोश होते गए यात्री
कस्बा कुलपहाड़ के मोहल्ला किशोरगंज निवासी मुकेश गोस्वामी दिल्ली से इसी बस में सवार होकर लौट रहे थे। उन्होंने बताया कि आग लगने पर लोग केबिन की ओर भागे लेकिन केबिन में धुआं भरा था और लोग बेहोश होने लगे। कुछ लोग किसी प्रकार आगे के दरवाजे से बाहर निकल गए लेकिन कई लोग बेहोश हो गए। मुकेश के अनुसार स्थानीय प्रशासन के एसडीएम ने एक टूरिस्ट गाड़ी पर 15 लोगों को कुलपहाड़, महोबा व राठ भिजवाया। प्रशासन ने हमें बहुत सहयोग किया। 1,500 रुपये भी दिए।
हादसे के बाद से भाजपा नेता की पत्नी और बेटा लापता
फोटो 24 एमएएचपी 19 परिचय-सुनीता। स्रोत: परिजन
फोटो 24 एमएएचपी 20 परिचय-शशांक गुप्ता। स्रोत: परिजन
महोबा। भाजपा के जिला कोषाध्यक्ष नीरज गुप्ता निवासी चरखारी का बेटा शशांक गुप्ता दिल्ली की एक कंपनी में इंजीनियर है। नीरज की पत्नी सुनीता गुप्ता अपना इलाज कराने के लिए बेटे के पास दिल्ली गई थी। नीरज ने बताया कि बुधवार की रात 10 बजे पत्नी सुनीता से आखिरी बार बात हुई थी। इसमें उन्होंने बस से महोबा आने की बात कही थी। इसके बाद हादसे की जानकारी सामने आई तभी से पत्नी और बेटे से संपर्क करने का प्रयास कर रहे हैं लेकिन कोई संपर्क नहीं हो सका। इसके बाद से नीरज सुध-बुध खो बैठे हैं। जानकारी करने के लिए नीरज के भाई अजय गुप्ता और बेटा निखिल गुप्ता ग्रेटर नोएडा के लिए रवाना हो गए हैं। इस घटना के बाद से कस्बे में गम का माहौल है।
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फोटो 24 एमएएचपी 12 परिचय-रविंद्र राजपूत। संवाद
तेज आवाज के साथ आग की लपटों से घिर गई बस
शहर कोतवाली के जुझार गांव निवासी रविंद्र राजपूत मुख्यालय में ऑटोमोबाइल शॉप चलाते हैं। उनका भतीजा प्रशांत दिल्ली में पढ़ता है। रविंद्र अपने व्यापार के सिलसिले में दिल्ली गए और भतीजे से मिलकर रात में परी चौक से सवार हुए। रविंद्र बताते हैं कि वे सीट पर जाने के बजाय केबिन में ही बैठ गए। कुछ दूर चलने पर बस में इंजन के नीचे तेज धमाके की आवाज आई और आग की लपटें निकलने लगीं। जैसे ही बस रुकी वे कूदकर बाहर निकले। कुछ ही देर में कई लोग बाहर कूदे लेकिन अंदर सो रहे लोग बाहर नहीं निकल सके। पुलिस तो तुरंत आ गई थी लेकिन फायर ब्रिगेड करीब 45 मिनट बाद आई। इसलिए आग ने विकराल रूप ले लिया, जिसे बुझाने में चार घंटे का समय लग गया।
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फोटो 24 एमएएचपी 13 परिचय-माता-पिता के बीच घर पहुंच मौके का मंजर बताता मानव द्विवेदी। संवाद
माता-पिता तो मिल गए लेकिन आंखों से वो मंजर नहीं गया
कस्बा कबरई निवासी मानव द्विवेदी दिल्ली से बीटेक कर रहे हैं। वे अपने परिवार से मिलने के लिए परी चौक से इस बस में सवार हुए। मानस के अनुसार वे अपनी स्लीपर सीट में बैठे थे। तभी कंडक्टर ने चिल्लाकर बस खाली करने के लिए कहा। लोगों की भीड़ के बीच वे भी बाहर निकले। लैपटॉप, मोबाइल, बैग आदि बस में ही छूट गए। कुछ ही देर में बस आग की लपटों में घिर गई। लोग मदद करना तो चाह रहे थे लेकिन कोई उपाय नहीं सूझ रहा था। पीछे से आईं कुछ बसों के स्टाफ ने कांच तोड़कर लोगों को निकालने की कोशिश की लेकिन कोई खास सफलता नहीं मिल सकी। वो मंजर आंखों से ओझल नहीं हो रहा है। मानव बताते हैं कि उन्हें अंदेशा था कि घटना की जानकारी मिलने पर मां-पिता घबरा जाएंगे इसलिए केवल भाई को सूचना दी। बृहस्पतिवार को जब घर पहुंचकर मां को जानकारी दी तो उन्होंने सीने से लगा लिया।
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शहर कोतवाली के मामना निवासी अंकित राजपूत की लवकुशनगर में कपड़े की दुकान है। वे खरीदारी करने के लिए दिल्ली गए थे। लौटते समय बस में सवार हुए थे। लोगों का शोर सुनकर वे भी बाहर की ओर भागे, तो देखा कि बस के गेट के पास ही कई लोग गिर गए थे। उनके ऊपर से लोग निकल रहे थे। इसी बीच गेट के पास भी आग की लपटें आ गईं तो लोगों को खींचकर दूर किया गया। इमरजेंसी गेट नहीं खुला और न ही सीट के पास कांच को तोड़ने के लिए हथौड़ा रखा था।
फोटो 24 एमएएचपी 14 परिचय-विकास कुमार। संवाद
मानव कंकाल देखकर दहल उठा दिल
कस्बा कुलपहाड़ निवासी विकास कुमार बताते हैं कि वह कस्बे में जूता-चप्पल के व्यापार करते हैं। वह दिल्ली से बस में सवार हुए अचानक एक घंटे बाद बस रुकी और अंदर की ओर धुआं भरने लगा। सभी लोग सामान बस में ही छोड़ नीचे कूद गए। फायर ब्रिगेड की चार गाड़ियों ने मिलकर आग पर काबू पाया लेकिन जब तक बस पूरी तरीके से जल चुकी थी। रेस्क्यू ऑपरेशन करने वालों ने बस के अंदर से कंकाल निकाले। जिन्हें देखकर उनका दिल दहल उठा।
फोटो 24 एमएएचपी 15 परिचय-सुनील सोनी। संवाद
सिलिंडर से तोड़ा कांच और बचाई जान
कुलपहाड़ तहसील के सुगिरा गांव निवासी सुनील सोनी दुकान का सामान लेने दिल्ली गए थे। वहां से लौटने के लिए बस पकड़ी। उन्होंने बताया कि जब उनकी नींद खुली तब बस में अफरा-तफरी मची हुई थी। इमरजेंसी गेट नहीं खुला और पीछे का कांच नहीं टूटा। तब राठ के एक व्यक्ति ने आग बुझाने वाले सिलिंडर से साइड के कांच तोड़े। इससे धुएं में कमी आई और लोग कूदकर बाहर निकले। पास में एयरपोर्ट होने के बाद भी आग बुझाने के पर्याप्त इंतजाम नहीं हो सके।
फोटो 24 एमएएचपी 16 परिचय-प्रवेश कुमार। संवाद
इतने डर गए कि दोबारा बस में नहीं बैठे
थाना श्रीनगर के हिलुआ गांव निवासी प्रवेश कुमार ग्रेटर नोएडा में रहकर प्रॉपर्टी का काम करते हैं। वे अपने घर आने के लिए परी चौक से बस में सवार हुए थे। आग लगते ही लोग इधर-उधर भागने लगे। रेस्क्यू टीम देर में आई तब तक बस में कई लोग जिंदा जल गए थे। घटना के बाद वे इतने डर गए कि महोबा जाने वाले यात्रियों के लिए प्रशासन ने जो बस भेजी, वे उसमें भी नहीं बैठे और यात्रा कैंसिल कर दी। घटना का मंजर उनकी आंखों के सामने अभी भी दिख रहा है।
फोटो 24 एमएएचपी 17 परिचय-गोकुल। संवाद
बैग छूटा पर जान बच गई, बस यही काफी है
कुलपहाड़ के लारपुर गांव निवासी गोकुल भी इसी बस में सवार थे। उन्होंने बताया कि ड्राइवर ने उन्हें और पांच अन्य यात्रियों को केबिन में बैठाकर रुपये ले लिए और कुछ देर बाद टिकट देने की बात कही। कुछ देर बाद वे खाली सीट में चले गए। जब आग लगी तो कुछ लोगों ने कांच तोड़ दिए थे। उससे नीचे कूदकर ही जान बचाई। उसे हल्की चोट लगी। बैग में करीब 50 हजार रुपये रखे थे। वे बस में ही रह गए। उसका अफसोस तो है लेकिन खुशी भी है कि सुरक्षित बच गए।
फोटो 24 एमएएचपी 18 परिचय-मुकेश गोस्वामी। संवाद
धुआं भरने के कारण बेहोश होते गए यात्री
कस्बा कुलपहाड़ के मोहल्ला किशोरगंज निवासी मुकेश गोस्वामी दिल्ली से इसी बस में सवार होकर लौट रहे थे। उन्होंने बताया कि आग लगने पर लोग केबिन की ओर भागे लेकिन केबिन में धुआं भरा था और लोग बेहोश होने लगे। कुछ लोग किसी प्रकार आगे के दरवाजे से बाहर निकल गए लेकिन कई लोग बेहोश हो गए। मुकेश के अनुसार स्थानीय प्रशासन के एसडीएम ने एक टूरिस्ट गाड़ी पर 15 लोगों को कुलपहाड़, महोबा व राठ भिजवाया। प्रशासन ने हमें बहुत सहयोग किया। 1,500 रुपये भी दिए।
हादसे के बाद से भाजपा नेता की पत्नी और बेटा लापता
फोटो 24 एमएएचपी 19 परिचय-सुनीता। स्रोत: परिजन
फोटो 24 एमएएचपी 20 परिचय-शशांक गुप्ता। स्रोत: परिजन
महोबा। भाजपा के जिला कोषाध्यक्ष नीरज गुप्ता निवासी चरखारी का बेटा शशांक गुप्ता दिल्ली की एक कंपनी में इंजीनियर है। नीरज की पत्नी सुनीता गुप्ता अपना इलाज कराने के लिए बेटे के पास दिल्ली गई थी। नीरज ने बताया कि बुधवार की रात 10 बजे पत्नी सुनीता से आखिरी बार बात हुई थी। इसमें उन्होंने बस से महोबा आने की बात कही थी। इसके बाद हादसे की जानकारी सामने आई तभी से पत्नी और बेटे से संपर्क करने का प्रयास कर रहे हैं लेकिन कोई संपर्क नहीं हो सका। इसके बाद से नीरज सुध-बुध खो बैठे हैं। जानकारी करने के लिए नीरज के भाई अजय गुप्ता और बेटा निखिल गुप्ता ग्रेटर नोएडा के लिए रवाना हो गए हैं। इस घटना के बाद से कस्बे में गम का माहौल है।