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उर्मिल बांध व बेलासागर तालाब से खोदी जा रही 300 मीटर नहरें
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उर्मिल बांध में चल रहा इंटेकवेल बनाने का काम।
- फोटो : MAHOBA
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श्रीनगर (महोबा)। नमामि गंगे परियोजना के तहत हर घर नल योजना का काम तेजी से चल रहा है। उर्मिल बांध और बेलासागर तालाब का जल स्तर लगातार घट रहा है। इससे मई व जून माह में पेयजल आपूर्ति बाधित होने का खतरा पैदा हो गया है।
पेयजल आपूर्ति बाधित न हो, इसके लिए निर्माणाधीन इंटेकवेल के पास से तीन मीटर गहरी और 300 मीटर लंबी नहर खोदे जाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। नहरें खोदने से लिफ्ट के जरिये पानी इंटेकवेल में पहुंचेगा।
264 करोड़ रुपये की लागत से धवर्रा-सिजवाहा पेयजल योजना बनाई जा रही है। इससे 101 गांवों को पानी उपलब्ध कराने का लक्ष्य है। योजना के तहत पानी की उपलब्धता उर्मिल बांध व बेलासागर तालाब से की जानी है। इसके लिए उर्मिल बांध व बेलासागर तालाब पर इंटेकवेल का निर्माण कराया जा रहा है।
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इस योजना से पेयजल आपूर्ति बाधित न हो, इसके लिए निर्माण कार्य करा रही कंपनी ने उर्मिल बांध के डूब क्षेत्र में तीन मीटर गहराई और 300 मीटर लंबी नहर की खुदाई का कार्य शुरू करा दिया है, जिससे पेयजल योजना चालू होने के बाद इंटेकवेल में पानी पहुंचता रहे और पानी की कमी न हो।
गौरतलब है कि कई सालों से मध्यप्रदेश के ऊंचाई वाले इलाकों में बारिश कम होने से उर्मिल बांध अपनी क्षमता के अनुरूप नहीं भर पाया है।
इसी तरह जिले में भी कम बारिश होने से बेलासागर तालाब में पानी कम बचा है। कंपनी के प्रोजेक्टर मैनेजर सुनील कुमार पांडेय ने बताया कि उर्मिल बांध का पानी जब डेड लेवल तक पहुंचा जाता है, तो पानी की दिक्कत शुरू हो जाती है, लेकिन बाद के बीचोंबीच गहराई में हमेशा पानी बना रहता है।
नहर खोदने से पानी लिफ्ट के जरिये इंटेकवेल में पहुंच जाएगा और सुचारु रूप से सप्लाई चलती रहेगी।
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पेयजल आपूर्ति बाधित न हो, इसके लिए निर्माणाधीन इंटेकवेल के पास से तीन मीटर गहरी और 300 मीटर लंबी नहर खोदे जाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। नहरें खोदने से लिफ्ट के जरिये पानी इंटेकवेल में पहुंचेगा।
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264 करोड़ रुपये की लागत से धवर्रा-सिजवाहा पेयजल योजना बनाई जा रही है। इससे 101 गांवों को पानी उपलब्ध कराने का लक्ष्य है। योजना के तहत पानी की उपलब्धता उर्मिल बांध व बेलासागर तालाब से की जानी है। इसके लिए उर्मिल बांध व बेलासागर तालाब पर इंटेकवेल का निर्माण कराया जा रहा है।
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इस योजना से पेयजल आपूर्ति बाधित न हो, इसके लिए निर्माण कार्य करा रही कंपनी ने उर्मिल बांध के डूब क्षेत्र में तीन मीटर गहराई और 300 मीटर लंबी नहर की खुदाई का कार्य शुरू करा दिया है, जिससे पेयजल योजना चालू होने के बाद इंटेकवेल में पानी पहुंचता रहे और पानी की कमी न हो।
गौरतलब है कि कई सालों से मध्यप्रदेश के ऊंचाई वाले इलाकों में बारिश कम होने से उर्मिल बांध अपनी क्षमता के अनुरूप नहीं भर पाया है।
इसी तरह जिले में भी कम बारिश होने से बेलासागर तालाब में पानी कम बचा है। कंपनी के प्रोजेक्टर मैनेजर सुनील कुमार पांडेय ने बताया कि उर्मिल बांध का पानी जब डेड लेवल तक पहुंचा जाता है, तो पानी की दिक्कत शुरू हो जाती है, लेकिन बाद के बीचोंबीच गहराई में हमेशा पानी बना रहता है।
नहर खोदने से पानी लिफ्ट के जरिये इंटेकवेल में पहुंच जाएगा और सुचारु रूप से सप्लाई चलती रहेगी।