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राजेंद्र तिवारी के सचिव बनने से महोबा में खुशी की लहर
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महोबा। मुख्य सचिव पद पर असीन हुए महोबा के मूल निवासी राजेंद्र तिवारी अब सरकार की जिम्मेदारी उठाएंगे। उनकी इस उपलब्धि से जनपदवासियों में खुशी की लहर है। अब यहां के बाशिंदों की उम्मीदें बढ़ गईं हैं। लोगों ने घर जाकर उनके माता-पिता से मुलाकात कर बेटे के मुख्य सचिव बनने पर बधाई दी।
बुंदेलखंड के सबसे पिछड़े जनपद महोबा के मोहल्ला मलकपुरा निवासी वर्ष 1985 में आईएएस बनने के बाद प्रदेश के मुख्य सचिव का पद ग्रहण कर महोबा के इतिहास में अपना नाम दर्ज कराया है। बुंदेलखंड से पहली बार महोबा के राजेंद्र तिवारी ने सूबे का सबसे बड़ा पद संभाला है। जिससे बुंदेलों में खासी खुशी है। शहर के मोहल्ला मलकपुरा निवासी गया प्रसाद तिवारी ने अपने तीनों बेटों की प्राइमरी शिक्षा महोबा शहर के परिषदीय विद्यालयों में कराई। पेशे से अध्यापक होने के कारण उनका सस्थानांतरण राजकीय इंटर कॉलेज ललितपुर में हो जाने के कारण सूबे के मुख्य सचिव ने जीआईसी से इंटरमीडिएट की परीक्षा पास की। बड़े बेटे देवेंद्र कुमार तिवारी ने एमबीबीएस की डिग्री ली। छोटे बेेटे राजेंद्र तिवारी ने बीटेक किया, जबकि सबसे छोटे धीरेंद्र तिवारी ने स्नातक की डिग्री ली। इसके बाद तीनों भाई आईएएस अधिकारी बने। सबसे बड़े बेटे देवेंद्र तिवारी झारखंड के मुख्य सचिव हैं। राजेंद्र तिवारी उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव बन गए। छोटे बेटे धीरेंद्र तिवारी पंजाब में आईएएस अफसर हैं। राजेंद्र के मुख्य सचिव बनने पर डीएवी इंटर कॉलेज पूर्व प्रधानाचार्य शिवकुमार गोस्वामी, वरिष्ठ नागरिक पेंशनर्स सेवा संघ के जिलाध्यक्ष सुुनील शर्मा व महामंत्री बीके तिवारी सहित तमाम बुद्धजीवियों ने उन्हें बधाई दी। तीन आईएएस बेटों के पिता प्रधानाचार्य पद से सेवानिवृत्त हैं।
पिता का संघर्ष लाया रंग
मुख्य सचिव के पिता गया प्रसाद तिवारी गंगा सिंह इंटर कॉलेज चरखारी में नियुक्ति के दौरान प्रतिदिन 40 किमी साइकिल चलाकर महोबा से चरखारी आते-जाते थे। कड़े संघर्ष के बाद बेटों की पढ़ाई में कोई कमी नहीं की। नतीजतन आज उनके तीनों बेटे और एक बहू आईएएस अफसर हैं, लेकिन वह आज भी पुराने भवन में सादगी पूर्ण जिदंगी गुजार रहे हैं।
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बुंदेलखंड के सबसे पिछड़े जनपद महोबा के मोहल्ला मलकपुरा निवासी वर्ष 1985 में आईएएस बनने के बाद प्रदेश के मुख्य सचिव का पद ग्रहण कर महोबा के इतिहास में अपना नाम दर्ज कराया है। बुंदेलखंड से पहली बार महोबा के राजेंद्र तिवारी ने सूबे का सबसे बड़ा पद संभाला है। जिससे बुंदेलों में खासी खुशी है। शहर के मोहल्ला मलकपुरा निवासी गया प्रसाद तिवारी ने अपने तीनों बेटों की प्राइमरी शिक्षा महोबा शहर के परिषदीय विद्यालयों में कराई। पेशे से अध्यापक होने के कारण उनका सस्थानांतरण राजकीय इंटर कॉलेज ललितपुर में हो जाने के कारण सूबे के मुख्य सचिव ने जीआईसी से इंटरमीडिएट की परीक्षा पास की। बड़े बेटे देवेंद्र कुमार तिवारी ने एमबीबीएस की डिग्री ली। छोटे बेेटे राजेंद्र तिवारी ने बीटेक किया, जबकि सबसे छोटे धीरेंद्र तिवारी ने स्नातक की डिग्री ली। इसके बाद तीनों भाई आईएएस अधिकारी बने। सबसे बड़े बेटे देवेंद्र तिवारी झारखंड के मुख्य सचिव हैं। राजेंद्र तिवारी उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव बन गए। छोटे बेटे धीरेंद्र तिवारी पंजाब में आईएएस अफसर हैं। राजेंद्र के मुख्य सचिव बनने पर डीएवी इंटर कॉलेज पूर्व प्रधानाचार्य शिवकुमार गोस्वामी, वरिष्ठ नागरिक पेंशनर्स सेवा संघ के जिलाध्यक्ष सुुनील शर्मा व महामंत्री बीके तिवारी सहित तमाम बुद्धजीवियों ने उन्हें बधाई दी। तीन आईएएस बेटों के पिता प्रधानाचार्य पद से सेवानिवृत्त हैं।
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पिता का संघर्ष लाया रंग
मुख्य सचिव के पिता गया प्रसाद तिवारी गंगा सिंह इंटर कॉलेज चरखारी में नियुक्ति के दौरान प्रतिदिन 40 किमी साइकिल चलाकर महोबा से चरखारी आते-जाते थे। कड़े संघर्ष के बाद बेटों की पढ़ाई में कोई कमी नहीं की। नतीजतन आज उनके तीनों बेटे और एक बहू आईएएस अफसर हैं, लेकिन वह आज भी पुराने भवन में सादगी पूर्ण जिदंगी गुजार रहे हैं।
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