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बिना पैन कार्ड के दाखिल नहीं हाेंगे वैट रिटर्न
Mahoba
Updated Sat, 22 Sep 2012 12:00 PM IST
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महोबा। वाणिज्यकर के डिप्टी कमिश्नर आरके मौर्य ने कहा कि बिना पैन कार्ड का नंबर डाले किसी भी दशा में वैट के रिटर्न दाखिल नहीं हो सकेंगे। हर हाल में अब पैन नंबर रिटर्न में दाखिल करना होगा। ऐसा न करने पर 10 हजार रुपए तक का जुर्माना भुगतना पड़ सकता है।
गुरुवार को श्री मौर्या वाणिज्यकर कार्यालय में आयोजित गोष्ठी को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि हर व्यापारी को मासिक, त्रैमासिक और वार्षिक कारोबार के रिटर्न दाखिल करने पर फर्म का पैन कार्ड का नंबर डालना होगा। वरना उसके रिटर्न अस्वीकार कर दिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि शासन की मंशा हर व्यापारी के कारोबार को पारदर्शी बनाने की है जिससे उसे वाणिज्य कर विभाग द्वारा सभी प्रकार की सहूलियतें दी जा सकें। उन्होंने कहा कि हर व्यापारी का चार लाख का दुर्घटना बीमा उनके विभाग द्वारा कराया जाता है। साथ ही उसका निस्तारण दावे के तुरंत बाद ही समय पर करा दिया जाता है। श्री मौर्य ने कहा कि यदि व्यापारी पेपर में अपने कारोबार के सही आंकड़े देगा तो उसे बिना किसी जांच पड़ताल के कर निर्धारण में वैट कानून के अनुसार लाभ दिया जाएगा। वरिष्ठ अधिवक्ता प्रदीप चंद्र गुप्ता ने कहा कि व्यापारियाें को वैट कानून की समुचित जानकारी न होने के कारण कुछ व्यवहारिक परेशानियां आती हैं जिसे समय पर अधिकारियों की मदद से सुलझा लिया जाता है। उन्होंने मांग रखी कि जल्द ही वाणिज्यकर अधिकारी और असिस्टेंट कमिश्नर के रिक्त पदों पर अधिकारियों की तैनाती कराई जाए। ताकि व्यापारियों को जल्दी काम कराने में सुविधा हो सके। एक ही अधिकारी पर तीन तीन पदों के दायित्व के कारण काम का बोझ अधिक रहता है और अधिकारी रात तक बैठकर काम करते रहते हैं। बैठक में व्यापारी नेता शिवकुमार सोनी, अजय गुप्ता, बलराम गुप्ता, जितेंद्र गजया, बसंत लाल, जगदीश बाबू, चंदन सिंह, जितेंद्र कुमार, शशि प्रभा, कालूराम, बृजेंद्र गुप्ता, अरुण पुरवार सहित तमाम लोग मौजूद रहे।
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गुरुवार को श्री मौर्या वाणिज्यकर कार्यालय में आयोजित गोष्ठी को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि हर व्यापारी को मासिक, त्रैमासिक और वार्षिक कारोबार के रिटर्न दाखिल करने पर फर्म का पैन कार्ड का नंबर डालना होगा। वरना उसके रिटर्न अस्वीकार कर दिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि शासन की मंशा हर व्यापारी के कारोबार को पारदर्शी बनाने की है जिससे उसे वाणिज्य कर विभाग द्वारा सभी प्रकार की सहूलियतें दी जा सकें। उन्होंने कहा कि हर व्यापारी का चार लाख का दुर्घटना बीमा उनके विभाग द्वारा कराया जाता है। साथ ही उसका निस्तारण दावे के तुरंत बाद ही समय पर करा दिया जाता है। श्री मौर्य ने कहा कि यदि व्यापारी पेपर में अपने कारोबार के सही आंकड़े देगा तो उसे बिना किसी जांच पड़ताल के कर निर्धारण में वैट कानून के अनुसार लाभ दिया जाएगा। वरिष्ठ अधिवक्ता प्रदीप चंद्र गुप्ता ने कहा कि व्यापारियाें को वैट कानून की समुचित जानकारी न होने के कारण कुछ व्यवहारिक परेशानियां आती हैं जिसे समय पर अधिकारियों की मदद से सुलझा लिया जाता है। उन्होंने मांग रखी कि जल्द ही वाणिज्यकर अधिकारी और असिस्टेंट कमिश्नर के रिक्त पदों पर अधिकारियों की तैनाती कराई जाए। ताकि व्यापारियों को जल्दी काम कराने में सुविधा हो सके। एक ही अधिकारी पर तीन तीन पदों के दायित्व के कारण काम का बोझ अधिक रहता है और अधिकारी रात तक बैठकर काम करते रहते हैं। बैठक में व्यापारी नेता शिवकुमार सोनी, अजय गुप्ता, बलराम गुप्ता, जितेंद्र गजया, बसंत लाल, जगदीश बाबू, चंदन सिंह, जितेंद्र कुमार, शशि प्रभा, कालूराम, बृजेंद्र गुप्ता, अरुण पुरवार सहित तमाम लोग मौजूद रहे।
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