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1.35 लाख की लागत से बनाए गए 84 आवास
Mahoba
Updated Thu, 03 May 2012 12:00 PM IST
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महोबा। शहरी गरीबों के लिए चलाई जा रही कांशीराम आवास योजना के बाद अब डूडा आईएचएसडीपी योजना के तहत मकानों की कुल लागत के सापेक्ष 10 से 12 प्रतिशत की धनराशि जमा करा कर गरीबों को आशियाने दिलाने की कवायद में जुट गया है।
प्रदेश में वर्ष 2008 में शुरू हुई मान्यवर श्री कांशीराम जी शहरी गरीब आवास योजना के बाद प्रदेश ने केंद्र सरकार के अंशदान से इंट्रीग्रेटेड हाउस एंड श्रम डेवलपमेंट प्रोग्राम के अंतर्गत 1.35 लाख रुपए की लागत से शहर के मध्यम वर्ग के सभी गरीबों को पक्की छत मुहैया कराने के उद्देश्य से जेल के पीछे 84 आवासों का निर्माण जिला नगरीय विकास अभिकरण डूडा द्वारा कराया गया है। इन्हें जल्द ही शासन से हरी झंडी मिलने के बाद शहर के गरीबों में बांट दिया जाएगा। डूडा के सहायक परियोजना अधिकारी अबरार अहमद ने बताया कि इस योजना में तीन मंजिले आवास कांशीराम योजना की तरह ही बनाए गए हैं। इनकी प्रति मकान लागत 1.35 लाख रुपए है। इन मकानोें का आंवटन गरीबों को किया जाएगा। प्रति मकान लागत का ओबीसी सामान्य आवेदक को 12 प्रतिशत और अनुसूचित जाति के आवेदक को 10 प्रतिशत की लागत पर मिल सकेगा। शेष धनराशि केंद्र सरकार और राज्य सरकार अनुदान के रूप में वहन करेगी।
इस योजना के तहत विकलांग, विधवा तथा गरीबी रेखा के नीचे के कुल 84 लोगों का चयन किया जाएगा। चयन की कवायद जल्द ही पूरी की जाएगी। इससे कच्चे मकानों में रहने वाले लोगों को कांशीराम योजना की तरह पक्के आशियाने जल्द ही मिल सकेंगे। इससे पहले शासन द्वारा जिला मुख्यालय में सभी सुविधाओं से युक्त 1500 ऐसे ही आवास गरीबों को निशुल्क वितरित किए गए थे। कांशीराम योजना की भारी सफलता को देखते हुए तत्कालीन बसपा सरकार ने केंद्र से अनुदान लेकर इस आवासीय योजना का संचालन किया था। इस योजना के तहत मकानों का निर्माण वर्ष 2011 में ही पूरा कराया जाना था लेकिन धन की कमी के चलते मकानों के निर्माण का कार्य एक वर्ष पिछड़ गया। शहर के ऐसे मध्यम वर्गीय गरीबों के लिए यह योजना बनाई गई है, जो कम से कम मकान की लागत का 10 से 12 प्रतिशत तक अदा कर अपने आशियाने के स्वामी बन सकते हैं। डूडा अधिकारी अबरार अहमद ने बताया कि सरकार बदलने के कारण योजना में आवासों के आवंटन में पालिसी निश्चित करने का इंतजार किया जा रहा था। अब जल्द ही लोगों को आवास मिल सकेंगे।
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प्रदेश में वर्ष 2008 में शुरू हुई मान्यवर श्री कांशीराम जी शहरी गरीब आवास योजना के बाद प्रदेश ने केंद्र सरकार के अंशदान से इंट्रीग्रेटेड हाउस एंड श्रम डेवलपमेंट प्रोग्राम के अंतर्गत 1.35 लाख रुपए की लागत से शहर के मध्यम वर्ग के सभी गरीबों को पक्की छत मुहैया कराने के उद्देश्य से जेल के पीछे 84 आवासों का निर्माण जिला नगरीय विकास अभिकरण डूडा द्वारा कराया गया है। इन्हें जल्द ही शासन से हरी झंडी मिलने के बाद शहर के गरीबों में बांट दिया जाएगा। डूडा के सहायक परियोजना अधिकारी अबरार अहमद ने बताया कि इस योजना में तीन मंजिले आवास कांशीराम योजना की तरह ही बनाए गए हैं। इनकी प्रति मकान लागत 1.35 लाख रुपए है। इन मकानोें का आंवटन गरीबों को किया जाएगा। प्रति मकान लागत का ओबीसी सामान्य आवेदक को 12 प्रतिशत और अनुसूचित जाति के आवेदक को 10 प्रतिशत की लागत पर मिल सकेगा। शेष धनराशि केंद्र सरकार और राज्य सरकार अनुदान के रूप में वहन करेगी।
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इस योजना के तहत विकलांग, विधवा तथा गरीबी रेखा के नीचे के कुल 84 लोगों का चयन किया जाएगा। चयन की कवायद जल्द ही पूरी की जाएगी। इससे कच्चे मकानों में रहने वाले लोगों को कांशीराम योजना की तरह पक्के आशियाने जल्द ही मिल सकेंगे। इससे पहले शासन द्वारा जिला मुख्यालय में सभी सुविधाओं से युक्त 1500 ऐसे ही आवास गरीबों को निशुल्क वितरित किए गए थे। कांशीराम योजना की भारी सफलता को देखते हुए तत्कालीन बसपा सरकार ने केंद्र से अनुदान लेकर इस आवासीय योजना का संचालन किया था। इस योजना के तहत मकानों का निर्माण वर्ष 2011 में ही पूरा कराया जाना था लेकिन धन की कमी के चलते मकानों के निर्माण का कार्य एक वर्ष पिछड़ गया। शहर के ऐसे मध्यम वर्गीय गरीबों के लिए यह योजना बनाई गई है, जो कम से कम मकान की लागत का 10 से 12 प्रतिशत तक अदा कर अपने आशियाने के स्वामी बन सकते हैं। डूडा अधिकारी अबरार अहमद ने बताया कि सरकार बदलने के कारण योजना में आवासों के आवंटन में पालिसी निश्चित करने का इंतजार किया जा रहा था। अब जल्द ही लोगों को आवास मिल सकेंगे।
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