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अंतर्कलह से बचने को निकाय चुनाव से पल्ला झाड़ा
Mahoba
Updated Wed, 02 May 2012 12:00 PM IST
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महोबा। बसपा के बाद अब सपा ने भी निकाय चुनाव में टिकटों के बटवारे में आने वाली परेशानियों का हल उसी तर्ज पर निकाल लिया है ताकि निकाय चुनाव में पार्टी के टिकट वितरण में अंतर्कलह से बच सके। अब सपा नगर पालिका और नगर पंचायतों में पार्टी के चुनाव चिह्न अपने प्रत्याशी नहीं उतारेगी जिससे पार्टी में टिकट के दावेदाराें के चेहरे मुरझा गए हैं।
सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव ने बसपा की तर्ज पर नगर पालिका और नगर पंचायत के चुनाव में अपनी पार्टी के प्रत्याशी न उतारने का ऐलान कर दिया है। इससे पार्टी के टिकट पर अपनी जीत सुनिश्चित मान बैठे संभावित दावेदारों के चेहरे मुरझा गए हैं। अब उन्हें निर्दलीय ही चुनाव में उतरकर अपनी ताकत दिखानी होगी। जिले की पांच नगर निकाय सीटों में जहां महोबा, कुलपहाड़, खरेला अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है तो वहीं चरखारी पिछड़ी जाति के लिए और कबरई सामान्य जाति की महिला के लिए आरक्षित हो गई है। आरक्षण में जहां तक बदलाव का सवाल है तो 3 मई आरक्षण के अंतिम निस्तारण के लिए नगर विकास विभाग ने आपत्तियां दाखिल करने का समय दिया है लेकिन जानकार सूत्रों का कहना है कि इसके पहले वर्ष 2000 व 2006 में हुए निकाय आरक्षण में भी लोगों ने शासन द्वारा प्रस्तावित आरक्षण के खिलाफ आपत्तियां दाखिल की थीं लेकिन आरक्षण में शासन स्तर पर बदलाव नहीं किया गया और अपने प्रस्तावित आरक्षण में विधिक तर्क देकर आरक्षण को यथावत रख दिया। केवल हाई प्रोफाइल मंत्री की विशेष पैरवी पर ही कुछ सीटों में पूर्व में बदलाव किए गए थे। चूंकि यहां जिले की दोनाें विधानसभा सीटों से सपा पराजित हो गई है।
महोबा में पहले भी अनुसूचित जाति की दो बार लगातार वर्ष 2000 और 2006 में सीट हो चुकी है। ऐसी स्थिति में फिर से अनुसूचित जाति के लिए महोबा सीट आरक्षित करने की बात उनके गले नहीं उतर रही है।
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कुलपहाड़ के श्रीप्रकाश अड़जरिया, जावेद खान उर्फ बीरु, गंगाराम नामदेव ने बताया कि बड़ी मुश्किल से यहां सामान्य सीट का मौका उन्हें मिला था, जो चला गया उन्हाेंने आपत्तियां जरूर लगाई हैं लेकिन उन पर अमल की उम्मीद न के बराबर है। कबरई के रामप्रकाश पाठक का कहना है कि पहले ही पिछड़ी जाति की दो बार सीट हो चुकी है ऐसी स्थिति में सामान्य सीट होने के बाद अब तीसरी बार पिछड़ी सीट नहीं हो सकती।
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सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव ने बसपा की तर्ज पर नगर पालिका और नगर पंचायत के चुनाव में अपनी पार्टी के प्रत्याशी न उतारने का ऐलान कर दिया है। इससे पार्टी के टिकट पर अपनी जीत सुनिश्चित मान बैठे संभावित दावेदारों के चेहरे मुरझा गए हैं। अब उन्हें निर्दलीय ही चुनाव में उतरकर अपनी ताकत दिखानी होगी। जिले की पांच नगर निकाय सीटों में जहां महोबा, कुलपहाड़, खरेला अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है तो वहीं चरखारी पिछड़ी जाति के लिए और कबरई सामान्य जाति की महिला के लिए आरक्षित हो गई है। आरक्षण में जहां तक बदलाव का सवाल है तो 3 मई आरक्षण के अंतिम निस्तारण के लिए नगर विकास विभाग ने आपत्तियां दाखिल करने का समय दिया है लेकिन जानकार सूत्रों का कहना है कि इसके पहले वर्ष 2000 व 2006 में हुए निकाय आरक्षण में भी लोगों ने शासन द्वारा प्रस्तावित आरक्षण के खिलाफ आपत्तियां दाखिल की थीं लेकिन आरक्षण में शासन स्तर पर बदलाव नहीं किया गया और अपने प्रस्तावित आरक्षण में विधिक तर्क देकर आरक्षण को यथावत रख दिया। केवल हाई प्रोफाइल मंत्री की विशेष पैरवी पर ही कुछ सीटों में पूर्व में बदलाव किए गए थे। चूंकि यहां जिले की दोनाें विधानसभा सीटों से सपा पराजित हो गई है।
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महोबा में पहले भी अनुसूचित जाति की दो बार लगातार वर्ष 2000 और 2006 में सीट हो चुकी है। ऐसी स्थिति में फिर से अनुसूचित जाति के लिए महोबा सीट आरक्षित करने की बात उनके गले नहीं उतर रही है।
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कुलपहाड़ के श्रीप्रकाश अड़जरिया, जावेद खान उर्फ बीरु, गंगाराम नामदेव ने बताया कि बड़ी मुश्किल से यहां सामान्य सीट का मौका उन्हें मिला था, जो चला गया उन्हाेंने आपत्तियां जरूर लगाई हैं लेकिन उन पर अमल की उम्मीद न के बराबर है। कबरई के रामप्रकाश पाठक का कहना है कि पहले ही पिछड़ी जाति की दो बार सीट हो चुकी है ऐसी स्थिति में सामान्य सीट होने के बाद अब तीसरी बार पिछड़ी सीट नहीं हो सकती।