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कुआं दे रहा दुर्घटनाओं को दावत
Mahoba
Updated Thu, 23 Oct 2014 05:32 AM IST
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खन्ना (महोबा)। ब्लाक कबरई के लोहिया गांव मवई में गांव के बीचोंबीच तिराहे पर स्थित एक कुआं दुर्घटनाआें को दावत दे रहा है। बिना बाउंड्री वाले इस कुएं में अब तक कई ग्रामीण गिरकर मौत का शिकार होने से बाल-बाल बचे हैं, लेकिन इसके बाद भी प्रशासन द्वारा कुएं के चारों तरफ बाउंड्रीवाल का निर्माण नहीं कराया गया।
डॉ. लोहिया ग्राम मवई जब से लोहिया गांवों की सूची में शामिल हुआ है। तब से यहां प्राथमिकता से विकास कार्य कराए जा रहे हैं, लेकिन बीचोंबीच तिराहा पर स्थित कुएं के किनारे बाउंड्रीवाल का निर्माण नहीं कराया जा रहा है। पानी से लबालब 50 फुट गहरे और छह फुट परिधि वाले इस कुएं में गिरकर कई ग्रामीण मौत के मुंह में जाते-जाते बच चुके हैं। इस कुएं में बैलगाड़ी, बाइक, साइकिल से लेकर एक महिला तक कुएं में गिर चुकी है।
ग्राम मवई निवासी राघवेंद्र, ऊदल, मूलचंद्र, पप्पू, विनय ने बताया कि कुएं में दिन रात किसी के गिरने की आशंका बनी रहती है। सड़क के किनारे कुएं की जगत समतल होने के कारण अंधेरे में आते जाते समय ग्रामीणाें को कुएं का पता नहीं चल पाता। रात के समय रास्ते से आते जाते समय ग्रामीणाें को कुएं में गिरने का डर सताता रहता है। ग्राम पंचायत विकास अधिकारी से कई बार कुएं के किनारे बाउंड्रीवाल बनवाने या कुएं पर छत डलवाने की मांग की गई, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिले हैं।
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डॉ. लोहिया ग्राम मवई जब से लोहिया गांवों की सूची में शामिल हुआ है। तब से यहां प्राथमिकता से विकास कार्य कराए जा रहे हैं, लेकिन बीचोंबीच तिराहा पर स्थित कुएं के किनारे बाउंड्रीवाल का निर्माण नहीं कराया जा रहा है। पानी से लबालब 50 फुट गहरे और छह फुट परिधि वाले इस कुएं में गिरकर कई ग्रामीण मौत के मुंह में जाते-जाते बच चुके हैं। इस कुएं में बैलगाड़ी, बाइक, साइकिल से लेकर एक महिला तक कुएं में गिर चुकी है।
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ग्राम मवई निवासी राघवेंद्र, ऊदल, मूलचंद्र, पप्पू, विनय ने बताया कि कुएं में दिन रात किसी के गिरने की आशंका बनी रहती है। सड़क के किनारे कुएं की जगत समतल होने के कारण अंधेरे में आते जाते समय ग्रामीणाें को कुएं का पता नहीं चल पाता। रात के समय रास्ते से आते जाते समय ग्रामीणाें को कुएं में गिरने का डर सताता रहता है। ग्राम पंचायत विकास अधिकारी से कई बार कुएं के किनारे बाउंड्रीवाल बनवाने या कुएं पर छत डलवाने की मांग की गई, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिले हैं।
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