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भादों ने कराया जेठ का अहसास
Mahoba
Updated Sat, 23 Aug 2014 05:30 AM IST
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महोबा। मौसम के बदले मिजाज ने एक बार फिर गर्मी का अहसास करा दिया है। दिन प्रतिदिन बढ़ रही गर्मी के चलते अधिकतम तापमान 44 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया है। इससे भादों माह ने जेठ माह का अहसास करा रहा है।
भादाें माह में चाराें तरफ हरियाली छाई रहती है और बारिश होने से मौसम खुशगवार हो जाता है। इतना ही नहीं इस माह में कूलर बंद हो जाते हैं। परंतु इस साल मौसम के बदले मिजाज के चलते बारिश के मौसम में बरसात होने के बजाय गर्मी तेजी से बढ़ रही है। वहीं आग उगल रही सूरज की किरणें मई, जून माह का अहसास करा रही हैं। तेज धूप और गर्मी ने लोगाें की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। वहीं उमस भरी गर्मी से लोगाें का बुरा हाल है।
पिछले एक पखवाड़े से बारिश न होने के कारण धूप में तेजी आ गई है। सुबह 11 बजे से सूरज की किरणें लोगाें को घराें में कैद कर देती हैं। तेज धूप पड़ते ही घराें में रखे कैप, तौलिया और स्टॉल एक बार फिर निकल आए हैं। महिलाएं और छात्राएं धूप से बचने को सिर पर स्टॉल बांधकर निकल रही हैं। गर्मी से लोग बिलबिला रहे हैं। वहीं दिन में बिजली की बेहिसाब कटौती होने से लोगाें को खासी मशक्कत करनी पड़ रही है।
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फसल पर छाए संकट के बादल- भादाें माह में बारिश के बजाय तेज धूप निकलने से 30 फीसदी फसल सूखकर बर्बाद हो गई है। शेष फसल पर भी संकट के बादल छा गये हैं। किसान फसल को बचाने के लिये आसमान की तरफ टकटकी लगाए बैठा है, लेकिन इंद्र देवता के मेहरबान न होने से खरीफ की फसल बर्बाद हो रही है। किसानाें का कहना है कि पहले ही कम बारिश होने के कारण ज्यादातर खेताें में बुवाई नहीं हो सकी है। अब बुवाई वाले खेताें की फसल भी पानी न मिलने से सूखने लगी है, जिससे किसान चिंतित है।
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भादाें माह में चाराें तरफ हरियाली छाई रहती है और बारिश होने से मौसम खुशगवार हो जाता है। इतना ही नहीं इस माह में कूलर बंद हो जाते हैं। परंतु इस साल मौसम के बदले मिजाज के चलते बारिश के मौसम में बरसात होने के बजाय गर्मी तेजी से बढ़ रही है। वहीं आग उगल रही सूरज की किरणें मई, जून माह का अहसास करा रही हैं। तेज धूप और गर्मी ने लोगाें की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। वहीं उमस भरी गर्मी से लोगाें का बुरा हाल है।
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पिछले एक पखवाड़े से बारिश न होने के कारण धूप में तेजी आ गई है। सुबह 11 बजे से सूरज की किरणें लोगाें को घराें में कैद कर देती हैं। तेज धूप पड़ते ही घराें में रखे कैप, तौलिया और स्टॉल एक बार फिर निकल आए हैं। महिलाएं और छात्राएं धूप से बचने को सिर पर स्टॉल बांधकर निकल रही हैं। गर्मी से लोग बिलबिला रहे हैं। वहीं दिन में बिजली की बेहिसाब कटौती होने से लोगाें को खासी मशक्कत करनी पड़ रही है।
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फसल पर छाए संकट के बादल- भादाें माह में बारिश के बजाय तेज धूप निकलने से 30 फीसदी फसल सूखकर बर्बाद हो गई है। शेष फसल पर भी संकट के बादल छा गये हैं। किसान फसल को बचाने के लिये आसमान की तरफ टकटकी लगाए बैठा है, लेकिन इंद्र देवता के मेहरबान न होने से खरीफ की फसल बर्बाद हो रही है। किसानाें का कहना है कि पहले ही कम बारिश होने के कारण ज्यादातर खेताें में बुवाई नहीं हो सकी है। अब बुवाई वाले खेताें की फसल भी पानी न मिलने से सूखने लगी है, जिससे किसान चिंतित है।