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गरीबों के हक पर कोटेदार डाल रहे डाका

Thu, 21 Aug 2014 05:30 AM IST
Mahoba
Mahoba Updated Thu, 21 Aug 2014 05:30 AM IST
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महोबा। विभागीय लापरवाही और उदासीनता से जिले में सार्वजनिक वितरण प्रणाली पुरसाहाल नहीं है। गरीबाें को सस्ता गेहूं और चावल मुहैया कराने के लिए खोली गई राशन की दुकानों पर कार्डधारकों को कोटेदारों की मनमानी का शिकार होना पड़ रहा है। यूं तो राशन की दुकानों के सुबह 7:30 बजे से 11:30 और दोपहर 3:30 बजे से रात आठ बजे तक खुलने का समय तय है। लेकिन दुकानें कभी भी समय पर नहीं खुलती हैं। इससे लोगों को राशन लेने के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता है। अनाज की गुणवत्ता का अंदाज इससे लगाया जा सकता है कि गरीबों को चूहों की गंदगी मिला अनाज बांटा जा रहा है। यही नहीं पत्नी के नाम आवंटित सरकारी राशन की दुकानों को उनके पति धड़ल्ले से चलाते हैं। सरकारी राशन की दुकानों के सूरतेहाल का जायजा लेती अमर उजाला की रिपोर्ट : बुधवार को मोहल्ला नारूपुरा में कोटेदार कृतार्थ कुमार सक्सेना राशन कार्ड धारकाें के इंतजार में दुकान में बैठे थे। शटर वाली दुकान के बाहर साइन बोर्ड नहीं लगा था। राशनकार्डधारकों की सूची का भी कोई पता नहीं था। मिट्टी के तेल का ड्रम और गेहूं बिखरा न मिलता तो पता ही नहीं चलता कि यह सरकारी राशन की दुकान है। दुकान के अंदर जाने पर साइनबोर्ड कबाड़ में पड़ा मिला। लापरवाही का यह हाल था खुले में रखे अनाज में चूहों की गंदगी मिली थी। कोटेदार ने बताया चाहे जितना इंतजाम कर लो, फिर भी चूहे दुकान में आ ही जाते हैं। मोहल्ला नारूपुरा में रामदेवी के नाम आवंटित सरकारी राशन की दुकान में उनके पति राशन बांटते मिले। दुकान में खुले में रखे गेहूं में चूहों की गंदगी साफ नजर आ रही थी। और यही गेहूं बिना साफ कराए कार्डधारकों को बांटा जा रहा था। खराब गुणवत्ता वाले गेहूं को खाकर किसी भी कार्डधारक के परिवार के सदस्य बीमार हो सकते हैं। दुकानदार ने बताया शनिवार और रविवार को विशेष वितरण दिवस पर सारा दिन गेहूं का वितरण किया जाता है। मोहल्ला नारूपुरा में विमला देवी गुप्ता की दुकान में भी अव्यवस्था मिली। दुकान में पांच-पांच किलो के दो ही बांट मिले। बाकी का काम पत्थरों से चलाया जा रहा है। पूछताछ पर पता चला पत्थराें को तराजू के एक पलड़े का वजन संतुलित करने के लिए रखा जाता है। दुकान के बाहर न तो साइन बोर्ड लगा मिला और न रेट लिस्ट । कार्डधारकों के नाम भी दर्ज नहीं मिले। अनाज का स्टाक दिखाने वाला बोर्ड भी दुकान के एक कोने में पड़ा था। सफाई नहीं किए जाने से धूल से पटे बोर्ड पर मकड़ी का जाला भी लगा था। दुकान में राशन बांट रहे कर्मचारी ने बताया बोर्ड रोज लगाया जाता है लेकिन भीड़ होने से उतार कर अंदर रख दिया जाता है। मोहल्ला नारूपुरा स्थित रामश्री की सरकारी राशन की दुकान में भी ताला लगा था। राशन लेने आईं तीन महिलाएं दुकान के बाहर बैठीं कोटेदार की राह ताक रही थीं। दो घंटे इंतजार करने के बाद भी कोटेदार का कुछ पता नहीं चला। भटियाना निवासी बीना ने बताया दो घंटे से कोटेदार का इंतजार कर रहे हैं। समद नगर निवासी फहमीदा कहती हैं डेढ़ घंटे इंतजार करने के बाद भी कोटेदार के न आने से खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। अब फिर राशन लेने आना पड़ेगा। बार-बार टेंपों से आने से पैसे और समय की बर्बादी होती है।पूर्ति निरीक्षक सलीम अहमद ने बताया समय-समय पर कोटेदाराें की जांच की जाती है। इस दौरान दुकानें बंद मिलने पर कोटेदारों से जवाबतलब कर उन्हे चेतावनी दी जाती है। इसके बाद भी न सुधरने पर दुकानें निलंबित कर दी जाती हैं। दुकान बंद होने का मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। फिर भी जांच कराई जाएगी।
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